स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों पर सब-लिमिट्स के प्रभाव के बारे में जानिए   

मुंबई- आज, स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी होना एक अहम जरूरत बन गई है। बढ़ती चिकित्सा के खर्चों और विकराल होती स्वास्थ्य समस्याओं ने एक अच्छी तरह से डिजाइन की गई स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी की आवश्यकता को और भी बढ़ा दिया है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि संकट के समय में हमारी सारी मेहनत की कमाई चिकित्सा बिलों के भुगतान पर खर्च नहीं हो जाए। हालांकि यह भी सच है कि केवल एक बीमा पॉलिसी होना ही पर्याप्त नहीं है। हमें अपनी कवर की सीमा को सही मायने में जानने और बाद में किसी झटके से बचने के लिए पॉलिसी की महत्वपूर्ण विशेषताओं को अच्छी तरह से जान और समझ लेना चाहिए।  

सब लिमिट को आपकी पॉलिसी में रखी गई मौद्रिक सीमा (monetary cap) के रूप में परिभाषित किया गया है। स्पष्ट रूप से यह कैप पॉलिसी में एक निश्चित राशि के रूप में व्यक्त की जाती है। कुछ मामलों में सब लिमिट को बीमा राशि के प्रतिशत के रूप में भी व्यक्त किया जाता है। उदाहरण के लिए, सब लिमिट का उल्लेख किसी बीमारी के लिए 30,000 रुपये के रूप में किया जा सकता है या फिर प्रतिशत के रूप में उल्लेख किया जा सकता है, जैसे एम्बुलेंस चार्जेस के लिए कुल बीमा राशि (sum insured) का 1% कहा जा सकता है।  

निर्दिष्ट बीमारियों या उपचार के साथ-साथ कुछ लाभों के लिए सब लिमिट रखी जाती हैं। इसके अतिरिक्त, अस्पताल में भर्ती होने से पहले और बाद के खर्चों पर भी सब लिमिट लगाई जाती है, जैसे कि दिनों की संख्या या बीमित राशि का कुछ प्रतिशत। सब लिमिट बीमाकर्ता की लायबिलिटी को उल्लिखित राशि तक सीमित करती है, चाहे बीमा राशि कुछ भी हो। इसलिए, यदि आपकी पॉलिसी की बीमा राशि 5 लाख है और किसी बीमारी के लिए 50,000 रुपये की सब लिमिट है तो इसका मतलब है कि उक्त बीमारी के लिए आपके बीमाकर्ता की देयता 50,000 रुपये तक सीमित है और उससे ज्यादा खर्च आता है तो उसे ग्राहक को वहन करना होगा। मोटे तौर पर सब लिमिट्स तीन प्रकार की होती हैं।  वे इस प्रकार हैं:-

यह विशिष्ट बीमारियों पर लगाई गई एक सीमा के बारे में होता है। ऐसी लिमिट आम तौर पर मोतियाबिंद, साइनस, गुर्दे की पथरी, बवासीर, घुटने के लिगामेंट प्रक्रियाओं, टॉन्सिल, साइनस, मातृत्व जैसी सामान्य बीमारियों पर लगाए जाते हैं। बीमारियों की लिस्ट और सब लिमिट अलग अलग बीमा कंपनियों और प्रोडक्ट के लिए अलग अलग होती है। विशेष पॉलिसी में संबंधित उपचार के बारे में बीमाकर्ता द्वारा प्रदान किए गए कवरेज की सीमा को समझने के लिए आपको दिए गए लिस्ट को ध्यान से पढ़ना चाहिए।

इसमें आमतौर पर कमरे के किराए के खर्च या अस्पताल में भर्ती होने के मामले में आईसीयू के चार्जेस, एम्बुलेंस चार्जेस, ओपीडी, घरेलू अस्पताल ( domiciliary hospitalization) में भर्ती की सीमा शामिल है। यदि आप एक कमरे के किराए की सब लिमिट का विकल्प चुनते हैं, तो इसका मतलब है कि आपका बीमाकर्ता कमरे के किराए के खर्च को केवल उसी लिमिट तक ही कवर करेगा।  

आमतौर पर कमरे के किराए की सब लिमिट को बीमित राशि के एक निश्चित प्रतिशत के रूप में व्यक्त किया जाता है। मान लीजिए कि आपकी बीमा राशि 5 लाख है और कमरे के किराए की सब लिमिट बीमा राशि का 2% है, तो आप 10,000 तक के कमरे के किराए के लिए ही पात्र होंगे। कुछ बीमाकर्ता कमरे के प्रकार पर भी एक कैप लगा देते हैं, जैसे कि ट्विन-शेयरिंग रूम या जनरल रूम, या सिंगल प्राइवेट एसी रूम।

प्री-हॉस्पिटलाइज़ेशन कॉस्ट उन खर्चों के बारे में होता है जो किसी को अस्पताल में भर्ती होने से पहले डायग्नोस्टिक टेस्ट और एक्स-रे जैसे खर्च के लिए करने पड़ते हैं, जबकि अस्पताल में भर्ती होने के बाद का खर्च वह खर्च होता है जो किसी को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वहन करना पड़ता है, जैसे कि रिकवरी के दौरान डायग्नोस्टिक, ट्रीटमेंट और परामर्श शुल्क। अस्पताल में भर्ती होने से पहले और बाद के ऐसे खर्च आमतौर पर दिनों की संख्या के लिए सब लिमिट के अधीन होते हैं।  

अधिकांश बीमाकर्ता अस्पताल में भर्ती होने से 30 दिन पहले और अस्पताल में भर्ती होने के बाद 90 दिनों तक हुए खर्च को अपने कवर में शामिल करते हैं। आगे अपनी लोकेशन के आधार पर आप अपने बीमा की लागत को कम करने के लिए उपयुक्त सब लिमिट पर फैसला ले सकते हैं। मान लीजिए कि आपके शहर में अधिकतम कमरे का किराया शुल्क 5,000 रुपया है तो आप प्रीमियम में कमी सुनिश्चित करते हुए उपयुक्त सब लिमिट वाले प्रोडक्ट चुन सकते हैं।

विभिन्न स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों का मूल्यांकन करते समय पॉलिसी में उल्लिखित सब लिमिट्स पर ध्यान देना काफी महत्वपूर्ण होता है। हालांकि वे बीमा प्रीमियम को कम करने में मदद करते हैं, लेकिन वे कवरेज को भी सीमित कर जेब खर्च में वृद्धि करते हैं। पूर्ण कवर प्राप्त करने के लिए उन पॉलिसी की तलाश करना उचित है जिनकी सब लिमिट्स अधिक हैं या कोई सब लिमिट नहीं है। भले ही यह कम सब लिमिट वाली पॉलिसी की तुलना में थोड़ा अधिक महंगा ही क्यों न हो। यह सुनिश्चित करेगा कि जब भी आपको जरूरत पड़े आपका आर्थिक रूप से सुरक्षित रहें। 

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