पत्नी से 10 हजार रुपए उधारी लेकर शुरू हुई थी इंफोसिस  

मुंबई- इंफोसिस को नारायण मूर्ति और उनके 6 इंजीनियर दोस्तों ने मिलकर शुरू किया था। ये 6 दोस्त हैं- नंदन नीलेकणि, एसडी शिबुलाल, क्रिस गोपालकृष्णन, अशोक अरोड़ा, एनएस राघवन और के दिनेश। कमाल की बात ये है कि ये सभी लोग पाटनी कंप्यूटर सिस्टम्स के कर्मचारी थे। नौकरी से इस्तीफा देकर इन्होंने इंफोसिस शुरू करने का फैसला किया। 

1981 में नारायण मूर्ति ने कंपनी शुरू करने का फैसला तो कर लिया, लेकिन पूंजी नहीं थी। ऐसे में उनकी पत्नी ने अपनी सेविंग्स से 10 हजार रुपए मूर्ति को दिए। इस छोटी सी रकम से मूर्ति ने पुणे में कंपनी शुरू की और नाम रखा- इंफोसिस कंसल्टेंट्स। कंपनी का पहला ऑफिस नारायण मूर्ति के घर का एक कमरा था। कंपनी का रजिस्टर्ड ऑफिस राघवन का घर था। 

आमतौर पर माना जाता है कि जब कंपनी नारायण मूर्ति ने शुरू की, तो वही इसके पहले कर्मचारी भी होंगे। मूर्ति पहले, दूसरे, तीसरे नहीं बल्कि चौथे कर्मचारी हैं। दरअसल, कंपनी शुरू होने के बाद भी मूर्ति करीब एक साल तक पाटनी कंप्यूटर्स सिस्टम्स के साथ ही जुड़े थे।  

इंफोसिस एक आईटी कंपनी के बतौर शुरू हुई, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि शुरुआती दो साल तक कंपनी के पास कोई कंप्यूटर ही नहीं था। 1983 में मूर्ति ने पहला कंप्यूटर खरीदा। इसका मॉडल था- डेटा जनरल 32-बिट MV8000. 

शुरू होने के महज 8 साल बाद 1989 में कंपनी बंद होने की कगार पर आ गई। दरअसल, इंफोसिस का अमेरिकी पार्टनर कर्ट सलमॉन एसोसिएट्स के साथ करार काम नहीं किया। उसी वक्त कंपनी के एक को-फाउंडर अशोक अरोड़ा भी कंपनी छोड़ गए। दूसरे लोगों में भी निराशा थी। यहां नारायण मूर्ति ने कमान संभाली।  

उन्होंने अन्य लोगों से कहा- अगर आप सभी भी जाना चाहते हैं, तो जाइए। मैं यहां आखिर तक लडू़ंगा। सभी पार्टनर्स ने कंपनी में बने रहने का फैसला किया और फिर कंपनी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1993 में इंफोसिस ने शेयर मार्केट में जाने का फैसला किया। आपको जानकर हैरानी होगी कि आज की आईटी दिग्गज इंफोसिस का IPO 13% कम भरा था। उस वक्त इंफोसिस के एक शेयर की कीमत 95 रुपए थी। जिसने भी 9,500 रुपए के 100 शेयर खरीदे थे, वो आज करोड़पति हो गए हैं।  

100 शेयर आज बोनस और स्प्लिट मिलाकर 1,02,400 शेयर हो चुके हैं। मौजूदा शेयर प्राइस के हिसाब से आज उनकी कीमत करीब 18 करोड़ रुपए है। 1999 तक इंफोसिस का रेवेन्यू 100 मिलियन डॉलर पहुंच चुका था। इसी साल कंपनी नैस्डैक में लिस्ट होने वाली भारत की पहली आईटी कंपनी बन गई।  

41 साल पहले शुरू हुई इंफोसिस का साम्राज्य बहुत बड़ा हो चुका है। कंपनी के पास 2.92 लाख कर्मचारी हैं। करीब 1 लाख करोड़ रुपए इसका रेवेन्यू है और करीब 8 लाख करोड़ रुपए मार्केट कैप है। इंफोसिस आज भारत की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी है। 

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