प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत कर्ज लेनेवालों की संख्या में आ रही है कमी  

मुंबई- केंद्र सरकार ने छोटे उद्यम शुरू करने के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) की शुरुआत की थी। इसके तहत लोगों को अपना कारोबार शुरू करने के लिए छोटी रकम का लोन दिया जाता है, लेकिन इसके हालिया आंकड़े सरकार के लिए परेशानी का सबब बन सकते हैं।  

दरअसल प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत वित्त वर्ष 2021-22 में सूक्ष्म और लघु उद्यमों (MSE) को स्वीकृत लोन की संख्या 5 करोड़ से नीचे आ गई है। यह आंकड़ा पिछले चार वर्षों में सबसे कम है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2022 में 3,10,563.84 करोड़ रुपये के 4.89 करोड़ लोन स्वीकृत किए गए, जिनमें से 3,02,948.49 करोड़ रुपये लोन वितरित किए गए हैं। 

वित्त वर्ष 2021 की बात करें तो तब 3,21,759.25 करोड़ रुपये के 5.07 करोड़ लोन स्वीकृत किए गए थे, जबकि इस दौरान 3,11,754.47 करोड़ रुपये लोन जरूरतमंदों को दिए गए। वहीं, सबसे अधिक लोन वित्त वर्ष 2020 में स्वीकृत किए गए थे। वित्त वर्ष 2020 में 3,37,495.53 करोड़ रुपये के 6.22 करोड़ लोन स्वीकृत किए गए थे, जिनमें से 3,29,715.03 करोड़ रुपये वितरित किए गए। 

इसके अलावा, वित्त वर्ष 2019 में 3,21,722.79 करोड़ रुपये की राशि के 5.98 करोड़ लोन स्वीकृत किए गए थे, जबकि इस दौरान वितरित राशि 3,11,811.38 करोड़ रुपये थी। इस योजना के तहत मंजूर और वितरित लोन की संख्या में गिरावट की एक वजह सरकार की इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ECLGS) भी हो सकती है।  

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के चीफ इकनॉमिस्ट सुजीत कुमार ने बताया, “मुद्रा स्कीम बैंक के नए ग्राहक (NTB) और मौजूदा ग्राहक दोनों के लिए है। हालांकि, ECLGS के माध्यम से मौजूदा ग्राहकों को दी जाने वाली सहायता में वृद्धि के साथ उधार देने का दायरा बढ़ने लगा, यह ऐसे बॉरोअर्स के लिए पसंदीदा विकल्प बन गया। बैंकों के लिए भी अपने मौजूदा SME ग्राहकों को ECLGS के माध्यम से अधिक उधार देना आसान हो गया. 

साल 2015 में छोटे उद्यम शुरू करने के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) की शुरुआत की गई थी। इसके तहत लोगों को अपना कारोबार शुरू करने के लिए छोटी रकम का लोन दिया जाता है। इस योजना के तहत अधिकतम लोन राशि 10 लाख रुपये है। जरूरतमंदों को लोन देने की दर की बात करें, तो वित्त वर्ष 2022 में यह 97.54 फीसदी थी। जबकि वित्त वर्ष 2021 में यह 96.89%, वित्त वर्ष 2020 में 97.69% और वित्त वर्ष 2019 में यह दर 96.91 फीसदी थी। 

हालांकि चार साल में सबसे कम लोन देने के बावजूद बैंकों ने सरकार द्वारा तय लक्ष्य को हासिल कर लिया है। सरकार ने लेंडिंग इंस्टीट्यूशन्स को इस योजना के तहत वित्त वर्ष 2021-22 में 3 लाख करोड़ रुपये का लोन देने का लक्ष्य दिया था। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस का कहना है, “बहुत से MSME बॉरोअर्स ने लोन के लिए ECLGS स्कीम का रूख किया।  

हालांकि, हमें मुद्रा लोन में और गिरावट नहीं दिखनी चाहिए, क्योंकि ECLGS उन लोगों के लिए लगभग समाप्त हो गया है जो इस योजना के लिए योग्य थे। इस योजना का लेटेस्ट वर्ज़न अन्य डेडिकेटेड सेक्टर्स के लिए हैं। सरकार ने हॉस्पिटैलिटी, ट्रैवल और टूरिज्म व स्पोर्टिंग जैसे सेक्टर्स के लिए पिछले साल मार्च में ECLGS 3.0 स्कीम को लॉन्च किया था।  

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