राजस्थान के मुख्यमंत्री, डीजीपी के खिलाफ मामला दर्ज करने का अदालती आदेश

मुंबई- आजादी के बाद या राजस्थान बनने के बाद पहली बार वर्तमान मुख्यमंत्री के खिलाफ अदालत से एफआईआर दर्ज करने का आदेश जारी किया है। 31 मार्च 2022 को अदालत ने तीन पेज में कहा कि पुलिस तुरंत एफआईआर दर्ज करे।

वकील गोवर्धन सिंह ने बताया कि इसमें मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और ऑफिसर आन स्पेशल ड्यूटी देवाराम सैनी, पुलिस महानिदेशक भूपेंद्र यादव और आईपीएस अधिकारी संजय छोत्रिय के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश है। इसके अलावा भी कई अधिकारियों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया जाएगा।

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दरअसल, मामला कुछ यूं है। कुछ महीने पहले यानी जनवरी 2022 में गैंगरेप और डकैती करनेवाले लोगों को मुख्यमंत्री और डीजीपी ने बचाया था। रात के दो बजे इन लोगों ने एक परिवार के साथ अन्याय किया था। राजस्थान की सीआईडी ने इसकी जांच की और माना कि रात के 2 बजे डकैती और गैंगरेप की घटनाओं की पुलिस कॉल रिकार्ड मिली। यानी पुलिस और आरोपियों के बीच बात होती रही।

घटना करने वाले आरोपी को पुलिस खुद तलाश लेकर आई थी। सीआईडी ने इसमें 29 मुलजिम को पकड़ा और उनके पास से डकैती का सामान बरामद किया। इनकी गिरफ्तारी के लिए फाइल भी भेजा। वीडियो के लिए जब सीआईडी ने आरोपियों का बयान कैमरा के सामने लिया तो उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने इसको अंजाम दिया। इन आरोपियों ने बताया कि कैसे शराब पीकर उन्होंने कैसे अपहरण किया और कैसे गैंगरेप किया और डकैती किया। सीआईडी के सामने इन लोगों ने पूरा कबूल किया।

बताया जा रहा है कि महादेव सिंह खंडेला निर्दलीय विधायक हैं और उन्होंने अशोक गहलोत पर दबाव बनाया। उन्होंने इनको बरी करने की अपील की और सरकार संकट में थी। इसलिए खंडेला ने ब्लैकमेल कर अपना काम करा लिया और उसके बाद उन्होंने गहलोत को सपोर्ट दे दिया। पुलिस महानिदेशक भूपेंद्र यादव ने जांच करने वाले अधिकारी को धमकाया और कहा कि मामला बंद कर दो।

कहा जा रहा है कि जिन अधिकारियों ने इसमें मदद नहीं की उन अधिकारियों को अपराध शाखा से हटा दिया और दूसरे अधिकारियों के जरिए इस खेल को पूरा किया गया। हाईकोर्ट में मामला जब गया तो जज ने कहा कि हम लोग मूकदर्शक नहीं बने रह सकते हैं। हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिया कि इस पूरी फाइल में किसी भी कागज को नष्ट नहीं किया जाना चाहिए। सभी कागजात हाईकोर्ट में पेश किया जाए।

इस मामले में सरकारी वकील और अटार्नी जनरल भी आ गए। गैंगरेप और डकैती वाले आरोपियों के मामले में हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला क्यों नहीं सीबीआई को भेजा जाए। वकील गोवर्धन सिंह का कहना है कि इस मामले में आरोपियों से ज्यादा दोषी तो पुलिस अधिकारी और नेता भी हैं। कोर्ट ने आदेश जारी किया और पूछा कि क्यों न उस पुलिस अधिकारी के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए, जिसने मामला दर्ज नहीं किया। अदालत ने सभी के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया है।

इस सरकार में इस आदेश के बाद सबकी हवाइयां उड़ चुकी हैं। गजब है कि पीड़ित परिवार जब पुलिस स्टेशन पहुंचा तो किसी ने उनकी नहीं सुनी और न ही मामला दर्ज किया। यहां तक कि स्पीड पोस्ट के पत्र को भी इन अधिकारियों ने लेने से इनकार कर दिया। अदालती आदेश के बाद भी अभी तक मामला दर्ज नहीं हुआ है। न ही इसकी जांच हुई है। गहलोत 13 सालों से यहां पर कमान संभाले हैं, और इस तरह की घटनाएं आम होती रही हैं।

अदालत ने 15 दिन तक 6 तारीख दी और अंतिम आदेश एफआईआर का दिया जो 3 पेज का है। गहलोत का कार्यकाल डेढ़ साल का है। हालांकि संभावना यह है कि जिस मजिस्ट्रेट ने यह आदेश दिया है, उसका तबादला भी हो सकता है।

जयपुर महानगर फर्स्ट सेशन जज के सामने पिछले दिनों इस मामले में एक रिवीजन पेश किया गया। वह फाइल सेसन जज के पास गई और वहां से अतिरिक्त जज को आधे घंटे बाद बुलाया गया। गोवर्धन सिंह ने बताया कि हमने उस समय जज से कहा कि हमारा भी पक्ष सुन लो। आदेश कोर्ट ने दिया और इसका रिवीजन सरकार करने जा रही है। रिवीजन के अनुसार, कोर्ट ने गहलोत को भी मुलजिम बना दिया है।

गोवर्धन सिंह ने कहा कि रिवीजन में आरोपी को माननीय मुख्यमंत्री और माननीय पुलिस अधिकारी लिखा जबकि आरोपियों के साथ माननीय नहीं लग सकता है क्योंकि मामला अशोक गहलोत के खिलाफ है, सरकार के खिलाफ सरकार का नहीं है। सरकार को पीड़ितों के साथ खड़ा होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। रिवीजन में लिखा गया है कि एफआईआर दर्ज नहीं होना चाहिए।

एक अप्रैल 2022 को कुछ लोगों ने चैनलों और अखबारों को धमकाया की खबरें नहीं चलनी चाहिए। राजस्थान के किसी भी टीवी चैनल या अखबार ने इस खबर को पूरी तरह से दबा दिया। गोवर्धन सिंह ने कहा कि इसी तरह से जोधपुर में सूर्यप्रकाश भंडारी ने एक बच्ची के साथ बलात्कार किया और उसके खिलाफ भी मामला दर्ज नहीं हुआ। उसमें भी अदालत ने मामला दर्ज करने का आदेश दिया और उसमें भी मामला दर्ज नहीं हुआ।

गोवर्धन सिंह कहते हैं सरकार अपने ताकत के आधार पर इस तरह के मामलों की जांच नहीं करने दी। वे कहते हैं कि लोकतंत्र की दुहाई देनेवाले लोगों को इस तरह की घटनाएं नहीं दिखती हैं।

गोवर्धन सिंह ने कहा कि एक जमाने में उनका फर्जी मुठभेड़ करने की भी योजना बनाई गई थी। वे खुलेआम चुनौती देते हैं कि गहलोत चाहें तो वे कोई मामला हमारे खिलाफ दर्ज कर सकते हैं। वे कहते हैं कि सीबीआई के पास यह मामला जाना चाहिए। गार्ड फाइल पर हस्ताक्षर करनेवालों के खिलाफ मामला दर्ज करना चाहिए।

वे कहते हैं कि सूर्यप्रकाश भंडारी के खिलाफ वीडियो भी है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना है कि इन आरोपियों की आने वाली पीढ़ियां जरूर इन मामलों में पूछताछ करेंगी कि क्या उन्होंने ऐसा ही काम किया है?

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