मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज और मुश्किल में फंसा, चेयरमैन मेहरोत्रा ने दिया इस्तीफा 

मुंबई- मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। इसके चेयरमैन डी. के मेहोरोत्रा ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने 14 मार्च को इस्तीफा दिया है।  

बता दें कि मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज में अनियमितताओं को लेकर सेबी ने पहले ही फॉरेंसिक ऑडिट करने का आदेश दिया था। उसके बाद वित्तराज्यमंत्री ने भी इस मामले में जांच कराने की बात कही थी। पिछले साल अगस्त में मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज (MSE) की फॉरेंसिंक ऑडिट शुरू हुई थी।  

एक्सचेंज की प्रबंध निदेशक (MD) लतिका कुंडू के खिलाफ अनियमितताओं, कुप्रबंधन और कॉर्पोरेट गवर्नेंस के बारे में कई शिकायतें शेयरधारकों ने की थी। जब शिकायतों में दम नजर आया तो भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने हाल ही में फोरेंसिक ऑडिट का आदेश दिया है और इसके लिए अर्नेस्ट एंड यंग की नियुक्ति की गई है। 

अर्नेस्ट एंड यंग को इसी तरह के ऑडिट का आदेश सेबी ने वर्ष 2018 में भी एक्सचेंज के लिए दिया था। 2018 में शेयर मार्केट रेगुलेटर सेबी ने MSE में फ्रॉड और अनियमितता के बारे में जांच की थी। यह जांच तब शुरू की गई, जब दो अज्ञात लोगों ने शिकायत की थी। यह शिकायत गवर्नेंस, मिस मैनेजमेंट और फंड के ट्रांसफर के मामले में थी। इसी संबंध में उस समय वित्त राज्यमंत्री राधाकृष्णन ने लोकसभा में जवाब दिया था। 

राधाकृष्णन ने कहा था कि आरोपों की जांच सेबी द्वारा की जा रही है और इसके लिए MSE के गवर्निंग बोर्ड द्वारा एक पब्लिक इंटरेस्ट डायरेक्टर्स (PID) का गठन होगा जो इन सभी आरोपों की जांच करेगा। इस कमिटी की सलाह पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। शिकायत में अज्ञात लोगों ने एक्सचेंज के उस समय के MD एवं CEO उदय कुमार पर भी आरोप लगाया था। कुमार को उस समय छुट्‌टी पर भेज दिया गया था। 

MSE के मौजूदा शेयरधारकों में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, SBI, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक, इंडियन बैंक, 45000 से अधिक माइनॉरिटी स्टेकहोल्डर्स, हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल (HNI) निवेशक और अन्य संस्थाएं शामिल हैं। लतिका कुंडू को मार्च 2020 में एक्सचेंज का नया MD बनाया गया था। 

मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज की हालत खस्ता हो रही है। इसका नेटवर्थ 103 करोड़ रुपए पर घट कर आ गया है। अगर यही हालत रही तो अगले साल इसका लाइसेंस रिन्यू होना मुश्किल होगा। हाल में एक्सचेंज ने दावा किया था कि उसका नेटवर्थ 143 करोड़ रुपए है। हालांकि सेबी ने कहा कि यह नेटवर्थ 103 करोड़ रुपए है। एक्सचेंज इस नेटवर्थ में 43 करोड़ रुपए जीएसटी क्रेडिट को जोड़ रहा है। कुछ शेयरधारकों ने कहा कि स्टॉक एक्सचेंज की हालत इतनी खस्ता है कि इसके शेयर धारकों में डर है।  

सेबी ने हाल में एक्सचेंज का लाइसेंस एक साल के लिए रिन्यू किया है। जबकि बाकी एक्सचेंजों का लाइसेंस 5-10 साल या 3 साल बाद रिन्यू होता है। लेकिन मेंट्रोपॉलिटन को लेकर सेबी इसका लाइसेंस हर साल रिन्यू करती है। मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज तिमाही आधार पर घाटा पेश कर रहा है। जून 2021 में इसे 8.36 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था। नियमों के मुताबिक, एक्सचेंज की नेटवर्थ 100 करोड़ रुपए होनी चाहिए और मेट्रोपॉलिटन की नेटवर्थ अब इसी सीमा के करीब आ गई है।    

सूत्रों ने बताया कि एक्सचेंज का कैश नेटवर्थ एक खतरनाक जोन में सकता है। एक्सचेंज का फॉरेंसिक ऑडिट अर्नेस्ट एंड यंग को सौंपा गया है। उधर दूसरी ओर, शिवसेना सांसद अरविंद सावंत ने एक्सचेंज की इन सभी कमियों को लेकर वित्तमंत्री को पत्र लिखा है। उन्होंने एक्सचेंज पर कार्रवाई और जांच की मांग की है।    

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