अब शुरू होगा IPL, जानिए कैसे BCCI कमाता है 16 हजार करोड़ रुपए

मुंबई- चौकों-छक्कों की बरसात के साथ ही IPL, BCCI से लेकर टीम के मालिकों और खिलाड़ियों तक के लिए पैसे की बारिश करने वाला टूर्नामेंट भी है। अगले हफ्ते से इसकी शुरुआत होगी। मीडिया और स्पोर्ट्स जानकारों का मानना है कि 2023-2028 के लिए आईपीएल मीडिया राइट्स 30 हजार करोड़ रुपए में बिक सकते हैं। 

IPL एक टी20 क्रिकेट लीग है, जिसका आयोजन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी BCCI करता है। इसकी शुरुआत 2008 में 8 टीमों के साथ हुई थीं। इस साल लखनऊ और अहमदाबाद के रूप में दो नई टीमें जुड़ गई हैं। यानी इस बार टीमों की संख्या 10 हो गई है। IPL का पूरा खेल ही एक बिजनेस है। इसके हर हिस्से से BCCI और टीम मालिकों दोनों को जबर्दस्त कमाई होती है।  

इस कमाई का IPL से होने वाली कुल कमाई में करीब 60-70% हिस्सा है। सेंट्रल रेवेन्यू से कमाई का दो अहम जरिया है-(i) मीडिया या ब्रॉडकास्टिंग राइट्स और (ii) टाइटल स्पॉन्सरशिप। इससे होने वाली कमाई का हिस्सा करीब 20-30% होता है। कुल कमाई का करीब 10% इससे आता है। इसमें टिकटों और अन्य चीजों से होने वाली कमाई शामिल होती हैं। 

IPL की शुरुआत से ही कमाई का सबसे अहम जरिया उसके प्रसारण या ब्रॉडकास्टिंग राइट्स से होने वाली कमाई रही है। ब्रॉडकास्टिंग राइट्स का मतलब होता है कि IPL के मैच केवल वही चैनल दिखा पाएगा, जिसके पास इसके राइट्स होंगे। IPL की शुरुआत यानी 2008 से अगले 10 वर्षों यानी 2017 तक इसके ब्रॉडकास्टिंग राइट्स सोनी के पास थे, जिसने इसके लिए BCCI को 8,200 करोड़ रुपए दिए थे। 2018 में ब्रॉडकास्टिंग राइट्स की फिर बोली लगी और इस बार बाजी मारी स्टार स्पोर्ट्स ने। स्टार ने 2018 से 2022 तक, यानी 5 सालों के IPL ब्रॉडकास्टिंग राइट्स को 16,347 करोड़ रुपए में खरीदा। 

शुरू में ब्रॉडकास्टिंग राइट्स से होने वाली कमाई में 20% BCCI रखता था और 80% पैसा टीमों को मिलता था, लेकिन धीरे-धीरे ये बढ़कर 50%-50% हो गया। यानी अब ब्रॉडकास्टिंग राइट्स से मिलने वाले पैसे में BCCI और टीमों को आधा-आधा हिस्सा मिलता है। 

IPL के पहले 10 सीजन में प्रसारण अधिकार से BCCI और टीमों ने 8,200 करोड़ रुपए कमाए थे, यानी हर साल 820 करोड़। 2018 में स्टार स्पोर्ट्स ने 5 सालों के लिए मीडिया राइट्स 16,347 करोड़ रुपए में खरीदे। यानी हर साल करीब 3,270 करोड़ रुपए। 

IPL 2008 से 2012 तक पांच सीजन के लिए देश के सबसे बड़े रियल एस्टेट डेवलेपर्स में शामिल डीएलएफ ने टाइटल स्पॉन्सरशिप राइट्स 200 करोड़ रुपए में खरीदे थे। इसके बाद बाद अगले पांच सीजन के लिए पेप्सी ने 397 करोड़ रुपए खर्च किए। हालांकि, पेप्सी अपना करार पूरा होने से 2 साल पहले ही 2015 में अलग हो गया। 

इसके बाद BCCI ने दो सीजन (2016, 2017) के लिए चीनी स्मार्टफोन कंपनी वीवो को ये राइट्स 200 करोड़ में बेचे। वीवो ने फिर 2018 से 2022 यानी पांच सीजन के लिए ये राइट्स 2199 करोड़ में खरीदे, लेकिन भारत-चीन विवाद की वजह से 2020 में ड्रीम 11 टाइटल स्पॉन्सर बना और इसके लिए 222 करोड़ दिए। 2021 में वीवो ने वापसी की और 439.8 करोड़ में टाइटल स्पॉन्सरशिप खरीदी। 2022 में दो सीजन के लिए टाटा ने टाइटल स्पॉन्सरशिप हासिल कर ली और इसके लिए 600 करोड़ रुपए खर्च किए। 

विज्ञापन और प्रमोशन से टीमों की जमकर कमाई होती है। टीमों की कमाई का अपना बिजनेस मॉडल होता है। इसके तहत वे कई कंपनियों से करार करती हैं। टीमें विज्ञापन और प्रमोशन के तहत खिलाड़ियों और अंपायर की जर्सी, हेलमेट, विकेट, मैदान और बाउंड्री लाइन पर दिखने वाले कंपनियों के नाम और लोगो आदि के लिए भी कंपनियां टीमों को पैसे देती हैं। टीमें खिलाड़ियों से दूसरे ब्रांड के प्रमोशन यानी ऐड भी करवाती हैं। कई टीमें खिलाड़ियों से खुद के ब्रांड के प्रमोशन भी करवाती हैं। जैसे-मुंबई इंडियंस जियो का ऐड, जिसमें रोहित शर्मा समेत मुंबई इंडियंस के कई खिलाड़ी नजर आते हैं। 

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