मनरेगा के कामगारों को बीमा के दायरे में लाने की मांग, बढ़ेगा बीमा का दायरा  

मुंबई- गांवों में चल रही सरकारी स्कीम मनरेगा के कामगारों को बीमा के दायरे में लाने की मांग हो रही है। इससे देश के बीमा सेक्टर को अच्छी रफ्तार मिल सकती है। एसबीआई की रिसर्च टीम ने यह सलाह दी है।  

कोरोना महामारी के चलते वित्त वर्ष 2020-21 और 2021-22 के दौरान जीवन बीमा का कारोबार प्रभावित हुआ। एसबीआई की रिसर्च टीम ने महामारी के दौरान इंश्योरेंस इंडस्ट्री को लेकर एक रिपोर्ट तैयार की है जिसके मुताबिक वित्त वर्ष 2020-21 में हर तीन में एक पॉलिसी महिलाओं ने खऱीदी जिसमें से सबसे अधिक पॉलिसी देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी एलआईसी ने बेची।

चालू वित्त वर्ष 2021-22 में फरवरी तक की बात करें तो सालाना आधार पर नई जीवन बीमा पॉलिसी के प्रीमियम में करीब 8.4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और बीमा कंपनियों को 2.54 लाख करोड़ रपये का प्रीमियम प्राप्त हुआ। महामारी के दौरान इंश्योरेंस इंडस्ट्री की स्थिति को लेकर एसबीआई इकोरैप रिपोर्ट में कई खास प्वाइंट्स हैं जो गौर करने लायक है। इसके अलावा इसमें इंश्योरेंस सेक्टर की मजबूती को लेकर सुझाव भी दिए गए हैं जैसे कि मनरेगा कामगारों को यूनिवर्सल बीमा योजनाओं से जोड़ने का सुझाव दिया गया है। 

महामारी के चलते अधिक से अधिक लोग हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी को लेकर जागरुक हुए। इसके अलावा उन्होंने पर्याप्त कवरेज की जरूरत भी महसूस की। इसके चलते बड़ी संख्या में लोगों ने नई पॉलिसी खरीदी या ऐसी बीमा कंपनियों की तरफ शिफ्ट हुए जो अधिक कवेरेज दे और जिनका क्लेम सेटलमेंट बेहतर हो. रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2021 में खुदरा स्वास्थ्य बीमा सालाना आधार पर 28.5 फीसदी की उछाल के साथ 26301 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इस वित्त वर्ष में भी स्थिति बेहतर दिख रही है और वित्त वर्ष 2022 में जनवरी तक रिटेल हेल्थ पॉलिसी में 17.3 फीसदी और ग्रुप पॉलिसी में 30.1 फीसदी की उछाल रही। 

वित्त वर्ष 2021 में जीवन बीमा कंपनियों ने अधिक डेथ क्लेम प्रोसेस किए और यह सालाना आधार पर 40.8 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 41958 करोड़ रुपये रहा. इंडिविजुअल लाइफ इंश्योरेंस बिजनेस में वित्त वर्ष 2021 के दौरान जीवन बीमा कंपनियों ने 46.4 फीसदी अधिक यानी 26422 करोड़ रुपये के 10.84 लाख दावों का निपटारा किया। 

डिजिटाइजेशन के बावजूद ऑनलाइन और वेब एग्रीगेटर्स के जरिए पॉलिसीज की बिक्री प्रीमियम वैल्यू के आधार पर महज 1.9 फीसी और पॉलिसीज की संख्या के आधार पर महज 1.6 फीसदी ही रही. पॉलिसी बेचने के मामले में बीमा कंपनियों के लिए बैंक के साथ साझेदारी बेहतर चैनल रहा यानी बैंकस्योरेंस (Bancassurance). इसके जरिए वित्त वर्ष 2014 में बीमा कंपनियों ने 16.6 फीसदी प्रीमियम वसूला था जो वित्त वर्ष 2021 में बढ़कर 29 फीसदी पर पहुंच गयाय हालांकि निजी बीमा कंपनियों के मामले में यह 55 फीसदी रहा. इसके विपरीत एलआईसी का भरोसा इंडिविजुअल एजेंट्स पर रहा लेकिन इनकी भागीदारी कम होती जा रही है। 

नॉन-लाइफ इंश्योरेंस बिजनेस ब्रोकर्स की भूमिका इंश्योरेंस सेक्टर का कारोबार बढ़ाने में बढ़ी है. कुल प्रीमियम में इनकी हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2014 में 21.9 फीसदी थी जो वित्त वर्ष 2021 में बढ़कर 31.4 फीसदी हो गई। एसबीआई इकोरैप रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2020-21 में महिलाओं ने करीब 93 लाख पॉलिसी खरीदी जो कुल बेची गई पॉलिसी के करीब 33 फीसदी के बराबर है। यानी हर तीन पॉलिसी में एक पॉलिसी महिलाओं ने खरीदी। 

वित्त वर्ष 2019-20 में यह आंकड़ा 32.23 फीसदी था। महिलाओं ने सबसे अधिक भरोसा एलआईसी पर जताया. 35 फीसदी महिलाओं ने एलआईसी से पॉलिसी खरीदी, जबकि निजी जीवन बीमा कंपनियों से 27 फीसदी पॉलिसी खरीदी गई। वित्त वर्ष 2001 से वित्त वर्ष 2009 के बीच भारत में इंश्योरेंस सेक्टर लिबरलाइजेशन के चलते 2.71 फीसदी से बढ़कर 5.20 फीसदी पर पहुंच गया लेकिन इसके बाद यह फिसला और वित्त वर्ष 2014 में 3.30 फीसदी रह गया।  

हालांकि इसके बाद सरकारी सहयोग और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना जैसी यूनिवर्सल बीमा योजनाओं के चलते वित्त वर्ष 2015 बीमा सेक्टर में फिर उछाल आया और वित्त वर्ष 2021 में 4.20 फीसदी पर पहुंच गया। एसबीआई इकोरैप रिपोर्ट में सरकार को तीन सुझाव दिए हैं जिससे यह सेक्टर तेजी से आगे बढ़ सकता है। 

मनरेगा के जरिए. सरकार मनरेगा के कामगारों को अनिवार्य रूप से प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में इनरोल करा सकती है जिसका प्रीमियम सरकार भरेगी. प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना का प्रीमियम 342 रुपये और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना का प्रीमियम 12 रुपये है। बीमा पॉलिसी पर जो 18 फीसदी की जीएसटी है, उस पर एक बार विचार किए जाने की जरूरत है।  

एसबीआई इकोरैप रिपोर्ट में इसे कम करने का सुझाव दिया गया है। विभिन्न सेक्टर्स के लिए सरकार को कुछ स्टैंडर्ड प्रोडक्ट लाने चाहिए ताकि सभी सेग्मेंट में प्रोटेक्शन गैप को बढ़ाया जा सके। इसे ऐसे समझ सकते हैं कि वर्ष 2020 में भारत में बाढ़ के चलते 52,500 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ लेकिन इंश्योरेंस सिर्फ 11 फीसदी का था। अब अगर सरकार ने इंश्योरेंस कराया होता तो 60 हजार करोड़ रुपये के सम एश्योर्ड के लिए प्रीमियम 13000-15000 करोड़ रुपये होता और इस प्रकार सरकार को कम से कम 40 हजार करोड़ रुपये की बचत होती. 

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