आपातकाल से बचने के लिए महिलाओं को फाइनेंशियल सेविंग सीखना चाहिए 

मुंबई- बीमा रेगुलेटर इंश्योरेंस रेगुलेटरी डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) और सेबी के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सिक्योरिटी मार्केट (NISM) में रजिस्टर्ड प्रियंका आचार्य अब तक देशभर में 300 से अधिक फाइनेंशियल अवेयरनेस का कार्यक्रम कर चुकीं हैं। वे बताती हैं कि महिलाएं अगर शुरू से ही फाइनेंशियल सेविंग का हिस्सा बनें तो उनके लिए यह काम आ सकता है।  

उदाहरण के तौर पर कैफे कॉफी डे के मालिक जब नहीं रहे, तब उनकी पत्नी ने पूरी कंपनी को न सिर्फ अच्छे से चलाया, बल्कि उसका कर्ज भी कम कर दिया और आज कंपनी अच्छे से चल रही है। वे जल्द ही IVM पॉडकास्ट पर एक चुस्की फाइनेंस के साथ आ रही हैं। उनका शो 22 मार्च से शुरू हो रहा है।  

महिलाओं को शुरु से ही फाइनेंशियल सेविंग का हिस्सा होना चाहिए। यानी उन्हें जितने भी निवेश के साधन हैं, उनकी जानकारी होनी चाहिए और साथ ही निवेश करना भी चाहिए। यह आपके आपातकाल के समय में बहुत मददगार हो सकता है। वे कहती हैं कि महिलाएं सभी सामान्य और असामान्य क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रही हैं। यह हमारे देश के सामाजिक और वित्तीय विकास के लिए बेहद खुशी की बात है। दुर्भाग्य से, महिलाएं अभी भी ज्यादातर परिवार में फाइनेंशियल चर्चाओं का हिस्सा नहीं हैं।  

यह शो पूरी तरह से महिलाओं पर आधारित होगा। वे बताती हैं कि सबसे पहले महिलाओं को फाइनेंस के साथ डेवलप होने पर ध्यान देना चाहिए। परिवार के फाइनेंशियल मामले में खुद को शामिल करना बुद्धिमानी है। वित्तीय जरूरतों की एक छोटी सी चेकलिस्ट और फिर एक लगातार कोशिश सफल बना सकती है।  

इसलिए, जब आपात स्थिति आती है, तो महिलाओं को बाहर निकलने के लिए मजबूर होना पड़ता है। अगर वह शुरू से ही फाइनेंशियल मामलों में शामिल है, तो वह इन संकटों को समझने और मैनेज करने के लिए बेहतर स्थिति में होगी। कभी भी निवेश के लिए फाइनेँशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें। ऐसा करने पर आपको नुकसान हो सकता है।  

वे कहती हैं कि गृहिणियां कम से कम नियमित भुगतान और ऑनलाइन लेन-देन का ध्यान रखती हैं। यदि हर परिवार की महिलाओं को फाइनेंशियल सलाह मिलती है तो इससे देश का भी विकास होगा। सेविंग, निवेश और बीमा फाइनेंशियल सफलता के तीन प्रमुख हिस्से हैं।  

उनका कहना है कि निवेश से पहले सभी साधनों की एक लिस्ट तैयार करना बुद्धिमानी होगी। इसमें कम, मध्यम और लंबे समय की जरूरतों को पहले ध्यान में रखें। उदाहरण के तौर पर अगर एक दो साल के लिए निवेश करना है तो डिपॉजिट या लिक्विड फंड को ले सकते हैं। 

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