कच्चे तेल के महंगे होने पर रिलायंस ने डीलर्स को सप्लाई आधी की 

मुंबई- कच्चे तेलों की कीमतों के आसमान छूने से अब इसकी सप्लाई भी रुक रही है। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने अपने फ्यूल डीलर्स को डीजल सप्लाई में 50% कटौती के लिए कहा है। कंपनी को इसकी बिक्री पर 10-12 रुपए प्रति लीटर का घाटा हो रहा है।  

रिलायंस इंडस्ट्रीज़ जियो-बीपी ब्रांड नाम के तहत फ्यूल ऑयल आउटलेट चलाती है। यह बीपी – रिलायंस बीपी मोबिलिटी लिमिटेड (RBML) के साथ जॉइन्ट वेंचर का हिस्सा है। ऑयल जॉइन्ट वेंचर की स्थापना 2020 में की गई थी। उस समय बीपी ने रिलायंस इंडस्ट्रीज़ को वेंचर में अपनी 49% हिस्सेदारी के लिए 7,000 करोड़ रुपए का पेमेंट किया था।  

कंपनी ने गुरुवार से डीजल की सप्लाई को आधा करने का निर्णय बुधवार की रात एक बैठक में लिया। जियो-बीपी के एक डीलर ने बताया कि एरिया मैनेजर ने कहा था कि रिलायंस इंडस्ट्रीज़ दिसंबर 2021 में मेरे द्वारा बेचे गए डीजल वोल्यूम में से केवल आधे की सप्लाई करेगी। वे दिसंबर को बेंचमार्क मानकर चल रहे हैं।  

ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को पेट्रोल और डीजल दोनों की बिक्री पर औसतन 25 रुपए प्रति लीटर तक का घाटा हो रहा है। भारतीय ईंधन रिटेल विक्रेताओं ने 4 नवंबर से अब तक इसकी कीमतों में कोई वृद्धि नहीं की है। उस समय कच्चे तेल की कीमतें 83 डॉलर प्रति बैरल थीं, जो अब 100 डॉलर के पार हैं। हालांकि 7 मार्च को यह 125 डॉलर तक चला गया था।  

RBML ने 3,000 करोड़ रुपए के निवेश से फ्यूल ऑयल आउटलेट्स को वर्तमान में लगभग 1,400 से बढ़ाकर 5,500 से अधिक करने की योजना बनाई है। एक अन्य डीलर ने कहा कि उसके डीजल ट्रक गुरुवार को फ्यूल डिस्ट्रीब्यूशन स्टेशन से खाली कर दिए गए। उसने बताया कि हमारे एरिया मैनेजर द्वारा किसी भी ग्राहक को थोक में डीजल की सप्लाई नहीं करने के लिए कहा गया है, क्योंकि हमारी सप्लाई में कटौती की जा रही है। 

जिओ-बीपी के साथ कई डीलरशिप के मालिक ने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब रिलायंस इंडस्ट्रीज़ ऐसा कर रही है। जब 2006, 2009, 2012 और 2014 में भी इसी तरह की सप्लाई संकट था, तब भी ऐसा किया जा चुका है। हालांकि इंडस्ट्री के अधिकारियों ने कहा कि रिलायंस इंडस्ट्रीज़ से यूरोपीय देशों को डीजल के निर्यात में तेजी आने की उम्मीद है। 


निर्यात रिलायंस इंडस्ट्रीज़ का मुख्य बिजनेस रहा है। इसके प्रमुख ग्राहक यूरोप और पूर्वी अमेरिका हैं, जहां बाजारों ने उनके लिए बड़ी संभावनाएं खड़ी की हैं। भले ही घरेलू ईंधन की कीमतों में बढ़त हो जाए, पर इससे इसका एक्सपोर्ट मार्जिन नहीं प्रभावित होगा।

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