किराए पर मकान दिए हैं तो जबरदस्ती किराया नहीं वसूल सकते, न ही केस कर सकते-कोर्ट

मुंबई- अगर आप किराए के मकान में रहते हैं या आपने अपना मकान किराए पर दिया है, तो एक फैसला आपके लिए आया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर किराएदार किसी मजबूरी के चलते किराया नहीं चुका पाता, तो इसे अपराध नहीं माना जा सकता। इसके लिए कानून में कोई सजा मुकर्रर नहीं है। लिहाजा, उसके खिलाफ इंडियन पैनल कोड (IPC) के तहत केस भी दर्ज नहीं किया जा सकता। 

यह मामला नीतू सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य की याचिका से जुड़ा है, जिसमें जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की बेंच ने सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी एक मकान मालिक की तरफ से किराएदार के खिलाफ किए गए केस की सुनवाई करते हुए की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किराएदार को अपराधी मानकर उसके खिलाफ मामला नहीं चलाया जा सकता। इसके साथ ही कोर्ट ने केस खारिज कर दिया। 

बेंच ने कहा कि हमारा मानना है कि ये कोई अपराध नहीं है, भले ही शिकायत में दिए फैक्ट्स सही हैं। किराया न चुका पाने पर कानूनी कार्यवाई हो सकती है लेकिन IPC के तहत केस दर्ज नहीं होगा। कोर्ट ने मामले से जुड़ी FIR रद्द कर दी है। दलील सुनने के बाद बेंच ने कहा कि किराएदार ने संपत्ति को खाली कर दिया है, तो इस मामले को सिविल रेमेडीज के तहत सुलझाया जा सकता है। इसके लिए कोर्ट इजाजत देता है। 

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