5 साल में सबसे कम पैसा जुटाने का सरकार का लक्ष्य

मुंबई- सरकार ने इस बजट में पिछले पांच सालों में सबसे कम पैसा जुटाने का लक्ष्य रखा है। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि सरकार अपनी कंपनियों में कम हिस्सेदारी बेचेगी। चालू वित्तवर्ष यानी अप्रैल 2022 से मार्च 2023 के बीच सरकार केवल 65 हजार करोड़ रुपए जुटाएगी।

इससे पहले 2021-22 में सरकार ने 1.75 लाख करोड़ रुपए का लक्ष्य रखा था। हालांकि जनवरी तक केवल 9329 करोड़ रुपए ही सरकार जुटा पाई थी। मार्च तक इसे उम्मीद है कि एलआईसी का आईपीओ आएगा तो इसका कुल लक्ष्य पूरा तो नहीं होगा, फिर भी एक लाख करोड़ रुपए के आस पास जुटा लेगी। हालांकि सरकार ने इस लक्ष्य को कम करके 78 हजार करोड़ रुपए कर दिया है। इसका मतलब यह हुआ कि सरकार अब एलआईसी में केवल 5 पर्सेंट ही हिस्सेदारी बेच सकती है। एअर इंडिया को इसने जनवरी महीने में बेचने का काम पूरा किया है। इस आधार पर यह एलआईसी से केवल 50 हजार करोड़ रुपए ही जुटाने का लक्ष्य रखी है जो पहले एक लाख करोड़ रुपए था।

इससे पहले 2020-21 में इसने 2.10 लाख करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा था। पर बाद में इसे कम करके 32 हजार करोड़ रुपए का लक्ष्य रखा गया। 2019-20 में सरकार ने कंपनियों की हिस्सेदारी बेचकर 1.05 लाख करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा पर इसका लक्ष्य बाद में सुधार कर 65 हजार करोड़ कर दिया गया। जबकि उसके पहले के साल में इसका लक्ष्य 80 हजार करोड़ रुपए था जिसमें कोई सुधार नहीं किया गया।

2017-18 में सरकार ने 72,500 करोड़ रुपए का लक्ष्य रखा था बाद में इसे बढ़ाकर 100045 करोड़ रुपए कर दिया गया। उसके पहले के साल में 56,500 करोड़ का लक्ष्य था जिसे घटाकर 45,500 करोड़ रुपए किया गया और 2015-16 में सरकार का लक्ष्य जुटाने का 25,312 करोड़ रुपए हो गया। यानी हर साल सरकार को लक्ष्य घटाना पड़ा। इसका कारण था कि सरकार अपने लक्ष्य को पूरा करने में सफल नहीं रही।

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