मैटरनिटी बीमा कवर के लिए किन-किन बातों का रखें ध्यान, यहां जानिए

मुंबई- किसी बच्चे का माता-पिता (Parenthood) बनना वाकई एक अद्भुत चीज है और ऐसा होने पर खुशी और संतुष्टि का जो एहसास होता है, उसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है। नन्हें बच्चे का आगमन हमारे जीवन में अपार खुशियां और उमंग लाता है। हालाँकि मां-बाप अपने पीछे बहुत बड़ी जिम्मेदारी लेकर आता है और यात्रा ठीक उसी समय से शुरू होती है जब माता गर्भ धारण करती हैं। हेल्थ केयर की बढ़ती लागत और गर्भावस्था से संबंधित जटिलताओं में वृद्धि के साथ डिलीवरी काफी महंगी होती जा रही है।

आज के दौर में किसी बच्चे का माता-पिता बनने से पहले एक अच्छा फाइनेंशियल प्लानिंग होना काफी महत्वपूर्ण हो गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आप पैसे की चिंता किए बिना माता-पिता बनने की खुशी का आनंद उठा सकें। इसके लिए एक अच्छा सा मातृत्व बीमा (maternity insurance) कवर होना चाहिए जो आपको बच्चे के जन्म के समय पैसे के बोझ को कम करने में मदद करेगा. आइए हम कुछ मिनट का समय निकालकर मैटरनिटी इंश्योरेंस के बारे में समझते हैं।

मैटरनिटी कवर बेस हेल्थ इंश्योरेंस पैकेज का हिस्सा है और अभी तक भारत में यह एक स्टैंडअलोन इंश्योरेंस प्लान नहीं है। आपको ध्यान देना चाहिए कि सभी हेल्थ प्लान्स मैटरनिटी बेनिफिट्स प्रदान नहीं करती हैं, इसलिए आपको अपने नियमों और शर्तों पर ध्यान देना चाहिए कि आपके प्लान में मैटरनिटी कवर उपलब्ध है या नहीं। रिटेल पॉलिसी के अलावा, कई ग्रुप मेडिकल पॉलिसी भी मैटरनिटी बेनिफिट प्रदान करती हैं।

 कवरेज
मोटे तौर पर कहा जाये तो, मैटरनिटी इंश्योरेंस बच्चे के जन्म से संबंधित सभी खर्चों को कवर करता है जैसे अस्पताल में भर्ती, चिकित्सा उपचार, डिलीवरी से पहले और बाद में बीमित महिला सदस्य के लिए किए गए खर्च को कवर किया जाता है। रूम रेंट चार्जेज, एम्बुलेंस चार्ज और सर्जन फीस जैसी लागतें भी कवर की जाती हैं। इसके अतिरिक्त, प्रसव के बाद 90 दिनों के भीतर उत्पन्न होने वाली किसी भी बीमारी या जटिलता को भी कवर किया जाता है। यह कवर सामान्य और सिजेरियन डिलीवरी दोनों के लिए मान्य होता है। यह चिकित्सकीय रूप से अनुशंसित गर्भ को गिराने से संबंधित खर्चों को भी कवर करता है।

इसके अलावा, एक ‘न्यू बोर्न बेबी कवर’ भी उपलब्ध है जो यह नवजात शिशु के चिकित्सा उपचार से संबंधित खर्चों को कवर करता है। अगर बच्चे को जन्म के बाद की किसी जटिलता के कारण अस्पताल में भर्ती कराया जाता है तो यह नवजात के अस्पताल में भर्ती होने के खर्च का भी ख्याल रखता है। कवर जन्म से 90 दिनों के लिए उपलब्ध है और यह अवधि अलग अलग बीमाकर्ता के लिए अलग हो सकती है।

कुछ प्लान 90 दिनों तक के बच्चे के अनिवार्य टीकाकरण के लिए भी कवर प्रदान करती हैं। जैसा कि भारतीय बाल चिकित्सा संघ द्वारा अनुशंसित किया गया है, यह कवर टिटनेस, हेपेटाइटिस, खसरा, टाइफाइड आदि के टीकाकरण के लिए उपलब्ध है और इसे मैटरनिटी एक्सपेंस कवर के तहत कवर किया जाता है। हालांकि, यह कवर कुछ लिमिट के साथ आता है जिसे आपको अपनी पॉलिसी के तहत प्रदान किए गए लाभ की पूरी सीमा को समझने के लिए जरूर जानना चाहिए।

सब-लिमिट
ध्यान देने वाली पहली महत्वपूर्ण बात यह है कि आमतौर पर मैटरनिटी कवर की एक उप-सीमा (sub-limit) होती है। उदाहरण के लिए, यदि आपकी मूल स्वास्थ्य योजना की बीमा राशि 5 लाख रुपये है तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपके पास मातृत्व संबंधी खर्चों के लिए पूरा 5 लाख ही मिलेगा। आपके पॉलिसी दस्तावेज़ में मैटरनिटी सब-लिमिट स्पष्ट रूप से बताई जाएगी।

प्रतीक्षा अवधि
एक महत्वपूर्ण जानकारी यह है कि मैटरनिटी कवर में वेटिंग पीरियड क्लॉज़ होता है जिसका अर्थ होता है कि आप पॉलिसी लेने की एक निश्चित अवधि के बाद मैटरनिटी से संबंधित खर्चों के लिए क्लेम फाइल कर सकते हैं। प्रतीक्षा की यह अवधि बीमा कंपनियों और प्रोडक्ट में भिन्न-भिन्न होती है. आमतौर पर यह अवधि 9 महीने से 8 साल तक होती है।

ग्रुप मेडिकल पॉलिसी पहले दिन से ही मैटरनिटी को भी कवर कर सकती है जिसमें कोई वेटिंग पीरियड नहीं होता है क्योंकि इसे आवश्यकताओं के अनुसार तैयार किया जाता है।

डिलीवरी और टर्मिनेशन की संख्या:
अधिकांश स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों में डिलीवरी और टर्मिनेशन की संख्या का भी उल्लेख होता है जो पॉलिसी के तहत कवर की जाती हैं जिन पर पॉलिसी खरीदते समय गौर फरमाना चाहिए। हालांकि मैटरनिटी पॉलिसी एक बेहतरीन कवर है, पर इसके ओवरआल बेनिफिट्स के लिए अच्छी तरह से डिजाइन किए गए हेल्थ इंश्योरेंस खरीदना चाहिए, न कि सिर्फ मैटरनिटी कवर पर ध्यान दिया जाये। 

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