कोकटेल थेरेपी के दावे को खारिज न करें बीमा कंपनियां

मुंबई- भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (इरडा) ने बीमा कंपनियों को निर्देश दिया है कि कोरोना के इलाज में कॉकटेल थेरेपी को प्रयोगात्मक कहकर खारिज न करें। इरडा को इस संबंध में मिली शिकायतों के बाद सभी नॉन-लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस बीमा कंपनियों को सर्कुलर जारी किया गया है।  

गौरतलब है कि मई 2021 में सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन ने एंटीबॉडी कॉकटेल थेरेपी के आपातकालीन उपयोग की मंजूरी दी थी। बीमा कंपनियां तीसरी लहर में उन इलाज के दावों को खारिज कर रही हैं या भुगतान में कटौती कर रही हैं, जहां अस्पतालों ने महंगी नई एंटीवायरल दवाओं का इस्तेमाल किया है। बीमा नियामक ने हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों को पॉलिसी की शर्तों के मुताबिक पॉलिसीधारक को उचित भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। 

कोरोना के इलाज में एंटीबॉडी कॉकटेल थैरेपी, दो मोनोक्लोनल एंटीबॉडी का कॉकटेल या मिश्रण है। मोनोक्लोनल एंटीबॉडी को प्रयोगशाला में तैयार किया जाता है। इस एंटीबॉडी कॉकटेल में दो दवा होती हैं। दो एंटीबॉडी के इस्तेमाल से कोरोना के खिलाफ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ोतरी होती है। 

बता दें कि कोरोना वायरस के लिए अभी तक कोई सटीक दवा या इलाज विकसित नहीं होने के कारण डॉक्टर कई मरीजों को एंटीबॉडी कॉकटेल थेरेपी दे रहे हैं। एंटीबॉडी कॉकटेल थेरेपी की लागत काफी अधिक हो सकती है।  

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