आसान नहीं होगा वित्तमंत्री के लिए बजट, होंगी चुनौतियां

मुंबई- वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण अपना चौथा बजट एक फरवरी को पेश करेंगी। इस दौरान उनके समक्ष काफी चुनौतियां होंगी। खासकर कोरोना की तीसरी लहर को लेकर उन्हें अपना बजट बनाना होगा।

अर्थव्यवस्था में जैसे ही रिकवरी की उम्मीद जगी, वैसे ही तीसरी लहर ने इसे चपेट में लेना शुरू कर दिया है। सरकार का भौतिक घाटा (फिस्कल डेफिसिट) पहले से ही काफी ज्यादा है। महंगाई की ऊंची दर और चालू खाता घाटा भी सरकार के लिए चुनौती वाला है। यह देखना होगा कि वित्तमंत्री इन चुनौतियों से कैसे पार पाएंगी और इसके लिए क्या रणनीति अपनाएंगी।

दरअसल त्यौहारी सीजन के बाद से रिकवरी तो दिख रही है, पर इसमें धीमापन है। कोरोना की तीसरी लहर से लग रहे प्रतिबंध का इस पर असर दिखना शुरू हो गया है। अगर राज्यों ने और ज्यादा कड़ाई की तो फिर मामला और बिगड़ेगा।

पहले एडवांस अनुमान के आधार पर देखें तो देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की ग्रोथ वित्तवर्ष 2019 में 6.5 पर्सेंट रही। 2020 में यह 4 पर्सेंट रही जबकि 2021 में यह 7.4 पर्सेंट घर गई। 2022 में 9.5 पर्सेंट का अनुमान है। 2022 की पहली छमाही में 13.7 और दूसरी छमाही में 5.6 पर्सेंट का अनुमान लगाया गया है।

रिजर्व बैंक रेट्स में बढ़ोत्तरी करने की योजना बना रहा है। महंगाई के मुद्दे पर देखें तो होलसेल प्राइस इंडेक्स (डब्ल्यूपीआई) मार्च में 7.89 पर्सेंट रहा। मई में यह 13.11 पर्सेंट तक बढ़ा तो जुलाई में घटकर 11.16 पर्सेंट पर आ गया। सितंबर में यह 11.8 पर्सेंट रहा तो नवंबर में फिर बढ़कर 14.23 पर्सेंट रह गया। इसी तरह कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (सीपीआई) भी बढ़ता गया।

मार्च में यह 5.52 पर्सेंट रहा और मई में यह 6.3 पर्सेंट हो गया। जुलाई में 5.59 पर्सेंट रहा तो सितंबर में 4.35 पर्सेंट रहा। नवंबर में यह बढ़कर 4.91 पर्सेंट हो गया। फिस्कल डेफिसिट वित्तवर्ष 2018 में 3.5 पर्सेंट रहा जबकि 2020 में यह 4.6 पर्सेंट रहा। 2021 में बजट अनुमान में 9.5 और 2022 में 6.8 पर्सेंट लगाया गया है।

फिस्कल डेफिसिट का मतलब यह है कि सरकार जितना खर्च करती है, उसकी कमाई उससे कम हो जाती है। सरकार हालांकि लगातार पब्लिक सुविधाओं पर खर्च करने की योजना जारी रखेगी। वित्तवर्ष 2020 में इसने कुल बजट की तुलना में पब्लिक कैपेक्स (निवेश) 3.35 लाख करोड़ रुपए खर्च किया था। 2021 में अनुमान है कि यह 4.39 लाख करोड़ रुपए होगा और 2022 में 5.54 लाख करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है।

सरकार बजट में लोगों के हाथ में ज्यादा पैसा देने की योजना बना सकती है। इसके लिए टैक्स में छूट ज्यादा दी जा सकती है। इनकम टैक्स स्लैब और रेट्स को ज्यादा कमाने वालों के लिए बढ़ाया जा सकता है। इसी तरह से हेल्थ सेक्टर के लिए सरकार अतिरिक्त फंड का आवंटन कर सकती है। बूस्टर डोज सभी के लिए शुरू किए जाने की उम्मीद है। हेल्थ इंफ्रा को अपग्रेड करना सरकार की प्राथमिकता होगी।

निजी निवेश के लिए सरकार इंफ्रा प्रोजेक्ट पर फोकस कर सकती है। इसके अलावा सरकारी कंपनियों की हिस्सेदारी बेचकर पैसा जुटाने की योजना होगी। सभी नए निवेश पर शुरुआती दौर में टैक्स की सीमा 15% की जा सकती है। स्पेशल इकोनॉमिक जोन को नए सिरे से शुरू किया जा सकता है। होम लोन पर टैक्स में राहत मिलने की उम्मीद है।

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