मोदी की सुरक्षा में हर दिन 1.62 करोड़ होता है खर्च

मुंबई- पंजाब में फिरोजपुर जिले के मुदकी के पास नेशनल हाईवे पर कुछ प्रदर्शनकारी किसानों ने PM मोदी का रास्ता रोक लिया। इसके बाद एक फ्लाई ओवर पर बारिश के बीच प्रधानमंत्री का काफिला 20 मिनट तक रुका रहा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा पर रोजाना एक करोड़ 62 लाख रुपए खर्च होते हैं। यह जानकारी 2020 में संसद में दिए एक प्रश्न के लिखित जवाब में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने दी थी। उन्होंने लोकसभा में बताया कि स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप, यानी SPG सिर्फ प्रधानमंत्री को ही सुरक्षा देता है। साल 1981 से पहले भारत के प्रधानमंत्री के आवास की सुरक्षा की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस के उपायुक्त की होती थी। इसके बाद सुरक्षा के लिए STF का गठन किया गया।

1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद एक कमेटी बनी और 1985 में एक खास स्पेशल प्रोटेक्शन यूनिट बनाई गई। तब से इसी के पास प्रधानमंत्री की सुरक्षा का जिम्मा है। देश के प्रधानमंत्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप, यानी SPG की होती है। प्रधानमंत्री के चारों ओर पहला सुरक्षा घेरा SPG जवानों का ही होता है। PM की सुरक्षा में लगे इन जवानों को अमेरिका की सीक्रेट सर्विस की गाइडलाइंस के मुताबिक ट्रेनिंग दी जाती है। इनके पास MNF-2000 असॉल्ट राइफल, ऑटोमेटिक गन और 17 एम रिवॉल्वर जैसे मॉडर्न हथियार होते हैं।

किसी राज्य में PM के दौरे के समय 4 एजेंसियां सुरक्षा व्यवस्था देखती हैं- SPG, ASL, राज्य पुलिस और स्थानीय प्रशासन। एडवांस सिक्योरिटी संपर्क टीम (ASL) प्रधानमंत्री के दौरे से जुड़ी हर जानकारी से अपडेट होती है। ASL टीम केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी के संपर्क में होती है। केंद्रीय एजेंसियों के अधिकारी ASL की मदद प्रधानमंत्री के दौरे की निगरानी रखते हैं।

स्थानीय पुलिस PM के दौरे के समय रूट से लेकर कार्यक्रम स्थल की सुरक्षा संबंधी नियम तय करती है। आखिरकार पुलिस के निर्णय की निगरानी SPG अधिकारी ही करते हैं। केंद्रीय एजेंसी ASL प्रधानमंत्री के कार्यक्रम स्थल और रूट की सुरक्षा जांच करता है। इसके साथ ही SPG PM के करीब आने वाले लोगों की तलाशी और प्रधानमंत्री के आसपास की सुरक्षा को देखता है। स्थानीय प्रशासन पुलिस के साथ मिलकर काम करते हैं।

PM को सुरक्षा देने की पहली जिम्मेदारी भले ही SPG की हो, लेकिन किसी राज्य के दौरे के समय स्थानीय पुलिस और सिविल प्रशासन भी सुरक्षा के लिए जिम्मेदार होता है। प्रधानमंत्री के रूट को तय कर उसकी जांच और उस रूट पर सुरक्षा देने का काम स्थानीय पुलिस और प्रशासन का ही होता है।

प्रधानमंत्री के काफिले का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी उस राज्य के DGP की भी होती है। उनके नहीं मौजूद होने की स्थिति में दूसरे सबसे सीनियर अधिकारी प्रधानमंत्री के काफिले के साथ चलते हैं। प्रधानमंत्री किसी कार्यक्रम में हेलिकॉप्टर के जरिए जा रहे हैं तो किसी खास परिस्थिति के लिए कम से कम एक वैकल्पिक सड़क मार्ग तैयार रखने का नियम होता है।

इस रास्ते पर सुरक्षा व्यवस्था की जांच सीनियर पुलिस अधिकारी PM के दौरे से पहले करते हैं। इस रास्ते पर सुरक्षा जांच रिहर्सल के समय SPG, स्थानीय पुलिस, खुफिया ब्यूरो और ASL टीम के अधिकारी सभी शामिल होते हैं। एक जैमर वाली गाड़ी भी काफिले के साथ चलती है। ये सड़क के दोनों ओर 100 मीटर दूरी तक किसी भी रेडियो कंट्रोल या रिमोट कंट्रोल डिवाइस के को जाम कर देते हैं, इससे रिमोट से चलने वाले बम या IED में विस्फोट नहीं होने देता।

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