7 सालों में 2,783 विदेशी कंपनियों ने भारत से कारोबार समेटा

मुंबई- 2014 से नवंबर 2021 तक 10,756 विदेशी कंपनियों ने भारत में अपना रजिस्ट्रेशन कराया है। इसी दौरान 2,783 कंपनियों ने अपना कारोबार समेट लिया है। यह जानकारी सरकार ने लोकसभा में दी। कॉमर्स और इंडस्ट्री मंत्री अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि नए विदेशी कंपनियों ने संपर्क, ब्रांच ऑफिस, प्रोजेक्ट ऑफिस और उनकी सहायक कंपनियों के साथ रजिस्ट्रेशन किया है। जिन कंपनियों ने अपने कारोबार बंद किए, उसके कई कारण हैं। इसमें प्रोजेक्ट के पूरा होने, रिस्ट्रक्चरिंग या मर्जर होना मुख्य वजह रहा है। साथ ही कई कंपनियों ने मैनेजमेंट के फैसलों कारणों से भारत में अपना ऑपरेशन बंद कर दिया।  

ठाकुर ने बताया कि देश में 30 नवंबर तक विदेशी कंपनियों की 12,458 सहायक (subsidiaries) कंपनियां हैं। उन्होंने कहा कि 9 महीने से कम समय के लिए 14.9 लाख करोड़ रुपए के निर्यात चालान (export invoice) की रकम बकाया है। 13.5 लाख करोड़ रुपए 9 महीने से अधिक समय से बकाया है। यह आंकड़े भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हवाले से दिए गए हैं।  

वित्त वर्ष 2021 में कोविड अवधि के दौरान, वित्त वर्ष 2020 की तुलना में मेडिकल उपकरणों और फार्मास्यूटिकल्स के निर्यात में क्रमशः 10% और 18.19% की वृद्धि दर्ज की गई। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण, सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट्स जैसे मेडिकल सामानों का निर्यात वित्त वर्ष 2021 में 253 करोड़ डॉलर था। आयुष और जड़ी-बूटियों, बल्क ड्रग्स, ड्रग फॉर्म्युलेशन और बायोलॉजिकल, सर्जिकल सहित 24.4 बिलियन डॉलर का निर्यात पिछले वित्त वर्ष में किया गया था। 

सरकार ने बताया कि 2 दिसंबर तक 9.9 लाख करोड़ रुपए 15 महीने से अधिक समय से बकाया निर्यात चालान के रूप में हैं। इसके अलावा 79.53 करोड़ रुपए का सेटलमेंट एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (ECGC) द्वारा बैंकों को विभिन्न डिफ़ॉल्ट पेमेंट पर एक्सपोर्ट क्रेडिट इंश्योरेंस कवर के तहत तय किया गया है।

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