आईपीओ में ग्रेडिंग को समझिए आपके काम का है या नहीं

मुंबई- आजकल आईपीओ मार्केट तेजी में है। आईपीओ के इतिहास में इस साल सबसे ज्यादा रकम जुटाई जाएगी। पेटीएम और एलआईसी जैसी बड़ी कंपनियां रिकार्ड बनाएंगी। अब तक करीबन 1 लाख करोड़ रुपए इस माध्यम से कंपनियों ने जुटाया है। जबकि 2017 में 75 हजार करोड़ रुपए की रकम जुटाई गई थी।

  1. आईपीओ ग्रेडिंग क्या होती है?
    प्रारंभिक सार्वजिनक ऑफर (आईपीओ) या पब्लिक इश्यू लाने वाली हर कंपनी को उसकी ग्रेडिंग करानी जरूरी है। यह ग्रेडिंग सेबी में पंजीकृत क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों द्वारा की जाती है। इश्यू की बुनियादी बातों और कंपनी के वित्तीय कामकाज से लेकर प्रबंधन क्षमता का जायजा लेकर ही ग्रेड दिये जाते हैं। ऐसे ग्रेडिंग आमतौर पर पांच–अंकों में से दी जाती है। इस अंक के आधार पर पता चलता है कि अमुक इश्यू कितना मजबूत है। जितने अधिक अंक ग्रेड में मिलते है, उतना ही अधिक मजबूत शेयर माना जाता है। अगर किसी आईपीओ में पांच में चार या पांच अंक मिलते हैं तो उसमें निवेश अच्छा माना जाता है, जबकि एक या दो अंक पानेवाले आईपीओ में निवेश से बचना चाहिए।
  2. कम्पनी को कब तक आईपीओ के लिए ग्रेड प्राप्त कर लेना चाहिए?
    आईपीओ ग्रेडिंग सेबी के पास दस्तावेज प्रारूप फाइल करने से पहले या उसके बाद प्राप्त किया जा सकता है। लेकिन प्रोस्पेक्टस/रेड हैरिंग प्रॉस्पेक्टस में आईपीओ को क्रेडिट रेटिग एजेन्सियों द्वारा दिये गये ग्रेड दिखाने होते हैं। ग्रेडिंग प्रणाली के बारे में अधिक जानकारी क्रेडिट रेटिग एजेन्सियों से प्राप्त की जा सकती है।
  3. आईपीओ ग्रेडिंग प्रक्रिया का खर्च कौन उठाता है?
    आईपीओ ग्रेडिंग प्रक्रिया का व्यय आईपीओ लाने की इच्छुक कम्पनी को ही वहन करना पड़ता है।
  4. क्या कम्पनी आईपीओ ग्रेड अस्वीकार कर सकती है?
    आईपीओ ग्रेड लेने से मना नहीं किया जा सकता है। चाहे इश्यू लाने को उसे दिया गया ग्रेड स्वीकार्य हो या नहीं हो, उसे सेबी आईसीडीआर नियमन 2009 के तहत अपना ग्रेड प्रकट करना ही होता है। हां, कम्पनी के पास किसी दूसरी क्रेडिट रेटिग एजेन्सी से ग्रेड पाने का विकल्प रहता है। ऐसी दशा में आईपीओ के लिए प्राप्त सभी ग्रेड प्रपत्रों, विज्ञापनों, आदि में प्रकट करना जरूरी होता है।
  5. क्या आईपीओ ग्रेडिंग इश्यू प्रक्रिया में देरी करती है?
    आईपीओ ग्रेडिंग पाने की प्रक्रिया सेबी में प्रस्ताव प्रपत्र फाइल करने और उसके बाद आईपीओ की समीक्षा जारी करने के साथ–साथ जारी रहती है। चूंकि सेबी द्वारा समीक्षा जारी करने और ग्रेडिंग पाने की प्रक्रिया, दोनों अलग–अलग एजेन्सियों द्वारा पूरी होती हैं, इसलिए आईपीओ ग्रेडिंग से इश्यू प्रक्रिया में देरी होने की आशंका नहीं रहती है।
  6. वे कौन–से पहलू हैं, जो आईपीओ ग्रेड पाने के लिए जरूरी होते हैं?
    आईपीओ ग्रेडिंग प्रक्रिया में उस उद्योग की सम्भावनाओं पर भी ध्यान दिया जाता है, जिसमें कम्पनी संलग्न है। साथ ही कम्पनी की व्यवसायिक जोखिम का सामना करने और कम्पनी की वित्तीय स्थिति मजबूत करने सम्बन्धी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमताओं और सीमाओं की भी समीक्षा की जाती है। ग्रेडिंग को प्रभावित करने वाले वास्तविक कारक कम्पनी के व्यवसाय, वित्तीय स्थिति जैसी बातों के अनुसार अलग–अलग हो सकते हैं। अलग–अलग कम्पनी के लिए अलग–अलग आईपीओ ग्रेडिंग प्रक्रिया हो सकती है।
  7. क्या आईपीओ ग्रेडिंग प्रक्रिया में इश्यू मूल्य पर भी विचार किया जाता है?
    नहीं, आईपीओ ग्रेडिंग प्रक्रिया में आईपीओ में प्रस्तावित इश्यू मूल्य पर विचार नहीं किया जाता है। चूंकि आईपीओ ग्रेडिंग में इश्यू मूल्य का नजरअंदाज किया जाता है, इसलिए निवेशकों को आईपीओ में निवेश करने से पूर्व इश्यू मूल्य के बारे में स्वयं अपना निर्णय होता है।
  8. क्या बेहतर आईपीओ ग्रेड का अर्थ यह है कि इसमें निवेश सुरक्षित रहेगा?
    आईपीओ ग्रेड किसी भी दशा में निवेशकों को दिया गया सुझाव या संस्तुति नही है। निवेशकों को आईपीओ ग्रेड के साथ–साथ प्रस्तावित इश्यू के मूल्य, जोखिम तत्वों सहित प्रोस्पेक्टस में दिये गये तमाम तथ्यों का अध्ययन अवश्य करना चाहिए।
  9. आईपीओ ग्रेड को कैसे समझें?
    ग्रेड कुल 5 अंक में से दिये जाते हैं। सबसे कम ग्रेड–1 होता है और सबसे अधिक ग्रेड–5 होता है। आईपीओ ग्रेडिंग का उद्देश्य पेशेवर क्रेडिट रेटिग एजेन्सियो द्वारा कम्पनी के व्यवसाय, वित्तीय संभावनाओं, प्रबन्धन क्षमताओं और निगम प्रशासन क्रियाओं आदि के विश्लेशण के बाद निवेशकों के सामने एक सुस्पष्ट और ठोस राय रखना है।

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