अलीबाबा के मार्केट कैप में 334 अरब डॉलर की गिरावट, चीन सरकार से दुश्मनी लेने का असर

मुंबई- चीन की बड़ी कंपनियों में से एक अलीबाबा के मार्केट कैप में एक साल में 344 अरब डॉलर की कमी आई है। वैश्विक स्तर पर शेयरधारकों को अब तक का सबसे बड़ा नुकसान हुआ है।  

दरअसल पिछले साल अक्टूबर में अलीबाबा के संस्थापक जैक मा ने चीन की वित्तीय प्रणाली की आलोचना की थी। उस समय कई लोगों ने भविष्यवाणी की थी कि अलीबाबा समूह होल्डिंग का पतन निश्चित है। अब एक साल बाद यह भविष्यवाणी सही हो गई है। अलीबाबा को 344 अरब डॉलर का घाटा हुआ है और भारतीय बाजार का कुल मार्केट कैप इससे मामूली ज्यादा है।  

चीन के फाइनेंशियल सिस्टम की आलोचना के कुछ ही समय बाद बीजिंग ने उसकी फिनटेक सहायक अंट समूह के आईपीओ को रोक दिया था। फिर एक-एक करके इस सेक्टर से जुड़ी कई कंपनियों पर सख्ती बरतनी शुरू कर दी गई। इससे जैकमा की कंपनियों के शेयर्स को काफी नुकसान हुआ।  

अलीबाबा के शेयरों में गिरावट से जैक मा की नेटवर्थ में भी गिरावट आई है। एक वक्त वह भारत के रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुकेश अंबानी को पछाड़कर एशिया के सबसे बड़े रईस बन गए थे। लेकिन आज वह दुनिया के अमीरों की लिस्ट में 30 वें स्थान पर खिसक गए हैं। उनकी नेटवर्थ 45.9 अरब डॉलर है। दूसरी ओर अंबानी 98.2 अरब डॉलर की नेटवर्थ के साथ एशिया में पहले और दुनिया में 11वें नंबर पर हैं। 

पिछले साल अक्टूबर में कंपनी का शेयर ऑल टाइम हाई पर था लेकिन 3 हफ्ते पहले हॉन्ग कॉन्ग में यह रेकॉर्ड लो पर पहुंच गया। चीन सरकार ने कंपनी के खिलाफ जांच तेज कर दी है और साथ ही उसे फिनटेक बिजनेस को रिस्ट्रक्चर करने को कहा गया है। 5 अक्टूबर के बाद से इसमें 30 पर्सेंट की रिकवरी हुई है लेकिन अब भी यह पिछले साल अक्टूबर के लेवल से 43 पर्सेंट कम है। अलीबाबा 5 नवंबर को अपने वित्तीय नतीजों की घोषणा करेगी। 

चीन की जीरो-कोविड पॉलिसी के चलते ई-कॉमर्स कंपनियों के एक्टिव यूजर्स ने आम सहमति के अनुमानों को नकार दिया है। जैकमा की कंपनी अलीबाबा की तुलना जेफ बेजोस की अमेजन से होती थी। जानकार उन्हें चीन का अघोषित दूत कहते थे। कहा जाता था कि वे दुनिया में चीन की छवि को बदल देंगे। 35 की उम्र तक साधारण अंग्रेजी टीचर रहने से लेकर चीन की सबसे बड़ी कंपनी का मालिक बनने तक जैक की कहानी लाखों लोगों को प्रेरणा देती थी।  

दरअसल, जैकमा की उल्टी गिनती पिछले साल शुरू हुई थी। चीन के फाइनेंशियल सिस्टम की खामियों की खुलेआम आलोचना करना जैक मा को महंगा पड़ गया। 2013 में ही कम्युनिस्ट पार्टी के आधिकारिक मुखपत्र पीपुल्स डेली को दिए इंटरव्यू में जैक मा ने बिजनेस में चीनी सरकार के दखल की आलोचना की थी। उन्होंने सरकार के फाइनेंशियल सिस्टम को सिर्फ 20% लोगों के लिए फायदेमंद बताया था। 

इसके बाद चीन की सरकार जैक मा की कंपनी एंट ग्रुप में गड़बड़ियों की जांच शुरू कर दी। वे करीबन 3 महीने तक गायब भी रहे। अचानक 3 महीने बाद वे टीवी पर इस साल जनवरी में सामने आए थे। जैक मा के ई-कॉमर्स और फिनटेक बिजनेस तय करते थे कि चीन के लोग किस तरह शॉपिंग करेंगे, कैसे खर्च करेंगे और कैसे बचत करेंगे। चीनी टेक्नोलॉजी के चेहरे और चीन के अघोषित दूत के तौर पर जैक मा दुनियाभर में मशहूर थे। जैक मा की अंग्रेजी पर पकड़ और सबसे मेलजोल रखने वाली शख्सियत ने उन्हें अलग पहचान दिलाई।  

जैक मा 24 अक्टूबर 2020 को एक मीटिंग के दौरान निशाने पर आए। इस मीटिंग में चीनी राजनीति और अर्थव्यवस्था के सबसे बड़े अधिकारी पहुंचे हुए थे। इसमें जैक मा ने चीनी बैकों की आलोचना की। वे बोले, ‘बैंक, फंडिंग के लिए कुछ गिरवी रखने की मांग करते हैं। इससे नई तकनीकों को फंड नहीं मिल पाता और नए प्रयोग रुकते हैं।’ उन्होंने चीनी नियमों को भी राह में रोड़ा अटकाने वाला बताया। वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, जैक मा की कही बातों के बारे में जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को जानकारी मिली तो वे बहुत गुस्सा हुए और उन्होंने जैक मा को सीन से गायब करने का आदेश दे दिया। 

पहले चीन ने अक्टूबर 2020 में जैक मा के एंट ग्रुप के 2.7 लाख करोड़ के IPO को रोक दिया। फिर कुछ दिनों बाद ही चीन ने ‘एंटी ट्रस्ट नियम’ बना दिए। इनके तहत अलीबाबा के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई। इससे अलीबाबा के मार्केट कैप में उस समय 10 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की गिरावट आ गई थी। जैक मा को सबक सिखाने के लिए चीन इस हद तक गया कि उसकी सेंट्रल बैंक ने एंट ग्रुप के अफसरों से अपने पूरे बिजनेस को नए नियमों के हिसाब से रजिस्टर करने को कह दिया।  

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