खिलाड़ियों पर सेबी की नजर, रिकॉर्डिंग और सोशल मीडिया बनेगा हथियार

मुंबई- शेयर बाजार के माहिर खिलाड़ी नियम तोड़ने के बाद कानून के शिकंजे से बच निकलते हैं, क्योंकि कई बार सेबी के लिए सबूतों के अभाव में उनका गुनाह साबित मुश्किल हो जाता है। उन्हें पकड़ने के लिए मार्केट रेगुलेटर सेबी अब डेटा एनालिटिक्स, कॉल रिकॉर्ड्स, बैंक ट्रांजैक्शन लिंक और सोशल मीडिया कनेक्शन का इस्तेमाल करने लगा है। 

दरअसल, इनसाइडर ट्रेडिंग से जुड़े मामलों की जांच सेबी एक्सचेंजों और मार्केट इंटरमीडियरी की टिप और सूचनाओं के आधार पर करता रहा है। संदेह का आधार ट्रेडिंग पैटर्न को बनाया जाता रहा है, लेकिन अब उसके सपोर्ट में कॉल डेटा रिकॉर्ड, सोशल मीडिया एकाउंट से जुड़े डिटेल लगाए जा रहे हैं। 

जानकारों के मुताबिक, कॉल डिटेल पर केस बनाने में यह देखता है कि कॉल किसने, किसको, कब, कितनी बार और कितने समय के लिए किया। इसके अलावा वह कनेक्शन साबित करने के लिए फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन एकाउंट पर नजर रखने लगा है। सेबी फ्रंट रनिंग या इनसाइडर ट्रेनिंग को लेकर आमतौर पर तब अलर्ट होता है, जब शेयरों की कीमत और वॉल्यूम में असामान्य उतार-चढ़ाव होता है। ऐसे सौदों का पता चलने के बाद मामले में मजबूत केस बनाने के लिए रेगुलेटर दूसरे मेथड्स का इस्तेमाल करता है। 

कंपनियों में खास लोगों के पास खास जानकारी होती है, जो आम लोगों को उपलब्ध नहीं होती है। ऐसी कुछ जानकारी शेयरों की कीमत में फर्क डालने वाली होती हैं। अगर वे मुनाफा कमाने के लिए जानकारी का इस्तेमाल करके कंपनी के शेयरों की खरीद फरोख्त करते हैं तो यह इनसाइडर ट्रेडिंग कहलाती है। हाल के एक मामले में सेबी ने केस बनाने के लिए कॉल रिकॉर्ड, फाइनेंशियल डीलिंग, बैंक स्टेटमेंट और सोशल मीडिया एकाउंट का इस्तेमाल किया था। यह मामला एक बिक रही एनबीएफसी के शेयरों में इनसाइडर ट्रेडिंग से जुड़ा था जिसमें 5-6 लोगों का हाथ साबित हुआ। 

ट्रेडिंग पैटर्न से पता चला कि इनसाइडर ट्रेडिंग में कुछ लोगों का ग्रुप शामिल हो सकता है। केस पक्का करने के लिए सेबी ने एक शख्स के 100 से ज्यादा बैंक स्टेटमेंट चेक किए। सेबी ने पाया कि सेल की अनाउंसमेंट होने से कुछ हफ्तों पहले ग्रुप के दूसरे शख्स के साथ फोन पर 140 से ज्यादा बार बात हुई थी। रेगुलेटरों और वकीलों के मुताबिक फ्रंट रनिंग और इनसाइडर ट्रेडिंग के ज्यादातर मामलों को डायरेक्ट सबूत नहीं मिलने के चलते साबित करना बहुत मुश्किल होता है। सेबी को कनेक्शन ढूंढ निकालने वाले खास तरह के एल्गोरिदम यानी कंप्यूटर एप्लिकेशन से बड़ी मदद मिल रही है। 

इनसाइडर ट्रेडिंग का पता लगाने के लिए सेबी का सिस्टम रोजाना लगभग दो करोड़ ट्रेड और दूसरी डिटेल चेक करता है। इस तरह की जांच के दायरे में संदिग्ध के साथ उसके सहयोगी, परिवार के सदस्य और यहां तक पुराने सहकर्मी आ जाते हैं। सेबी की वित्त वर्ष 2021 की एनुअल रिपोर्ट के मुताबिक अलर्ट से संदिग्धों की लाइब्रेरी तैयार होती है जो नियम बार-बार तोड़ने वालों को पकड़ने में मदद करती है। 2019 में सेबी के चेयरमैन अजय त्यागी ने कहा था कि मार्केट रेगुलेटर अपने सिस्टम पर अगले पांच साल में 500 करोड़ रुपए निवेश करेगा। 

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