जानिए कैसे जियो ने 10 कंपनियों को खत्म किया, तीन सालों में 1 लाख करोड़ का रेवेन्यू कमा सकती है

मुंबई- देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज की टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो महज 5 साल पहले शुरू हुई थी। इस समय 69 हजार करोड़ का रेवेन्यू यह कंपनी कमाती है जबकि अगले तीन साल में यह 1 लाख करोड़ का रेवेन्यू कमाने लगेगी।  

विश्व में दूसरे नंबर की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी इस समय बन गई है। जियो की शुरुआत 5 सितंबर 2016 को हुई थी और जियो वेलकम ऑफर से इसे लॉन्च किया गया था। रेवेन्यू के मामले में इसका हिस्सा 39% है। 

पूरी दुनिया के लिहाज से देखें तो जियो दूसरी सबसे बड़ी ऑपरेटर दुनिया में है। पहले नंबर पर चाइना मोबाइल है। चाइना मोबाइल के पास 94.6 करोड़ ग्राहक हैं। जियो के पास 43.7 करोड़ ग्राहक हैं। चाइना टेलीकॉम के पास 36.2 और एयरटेल के पास 35.2 करोड़ ग्राहक हैं। रिलायंस जियो को 2016 में लॉन्च किया गया था। यह इस समय भारत में 43 करोड़ ग्राहकों के साथ 37% बाजार के हिस्से पर काबिज है। रिलायंस जियो इंफोकॉम के नाम से रिलायंस इस टेलीकॉम कंपनी को चलाती है। जियो की लॉन्चिंग के समय जापान में एक GB डेटा के लिए 30 डॉलर लगता था। कोरिया में 18 डॉलर का चार्ज लगता था। यूके, चीन और जर्मनी में 15-15 डॉलर चार्ज लगता था। अमेरिका में 10 और भारत में 4 डॉलर का चार्ज लगता था। पर जियो ने इसे एक डॉलर के चार्ज में लॉन्च किया।  

1 दिसंबर 2016 को कंपनी ने हैप्पी न्यू ऑफर लॉन्च किया। एक अप्रैल 2017 को कंपनी ने फ्री ऑफर को बंद कर दिया और 149 व 4,999 रुपए का मासिक प्लान लॉन्च किया। इस दौरान जियो प्राइम के ग्राहकों की संख्या 7 करोड़ को पार कर गई। 6 अप्रैल 2017 को कंपनी को टेलीकॉम रेगुलेटर ट्राई ने तीन महीने वाले फ्री बेनेफिट्स को बंद करने का आदेश दिया। इस ऑफर के तहत 4 जी सेवाएं ग्राहकों को पहले 3 महीने तक मुफ्त में दी गईं फिर इसे मार्च 2017 तक बढ़ा दिया गया। इस दौरान कंपनी पहले महीने में 1.6 करोड़ ग्राहक जोड़ी। 83 दिनों में 5 करोड़ ग्राहक बने और 170 दिनों (21 फरवरी 2017तक) में 10 करोड़ ग्राहक बने।  

अप्रैल 2011 तक देश में टेलीकॉम की कुल 15 कंपनियां थीं। जबकि अब केवल 5 कंपनियां हैं। इस दौरान कुछ छोटी कंपनियां बंद हो गई तो कुछ कंपनियां दूसरी कंपनियों में मिल गईं। हालांकि एयरटेल ने इसका फायदा उठाया और उसने वीडियोकॉन, टाटा टेली, टाटा टेलीनॉर के ग्राहकों को खींच लिया और उनका स्पेक्ट्रम भी ले लिया। वोडाफोन इंडिया आइडिया सेल्युलर इसी दौरान एक में मिल गई। 15 कंपनियों में एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया, आरकॉम, टाटा टेली, एयरसेल, यूनिटेक, MTS, वीडियोकॉन, लूप, HFCL, Sटेली, MTNL, BSNL और एटिसलाट  थीं।  

30 मार्च 2018 को कंपनी के जियो प्राइम ग्राहकों की संख्या 17.5 करोड़ हुई और इस मेंबरशिप को बढ़ाकर 31 मार्च 2019 तक कर दिया गया। 10 मई 2018 को इसने जियो पोस्टपेड सेवा को 199 रुपए मासिक के साथ शुरू की। 17 अक्टूबर 2018 को इसने डाटाकॉम, डेन नेटवर्क और हैथवे केबल में निवेश की घोषणा की। 11 अप्रैल 2017 को जियो ने धन धना धन प्लान लॉन्च किया जो 309 रुपए महीना था। 28 दिसंबर 2017 को रिलायंस कम्युनिकेशन की वायरलेस इंफ्रा असेट्स को कंपनी ने ले लिया। रिलायंस कम्युनिकेशन अनिल अंबानी की कंपनी थी। 25 जनवरी 2018 को जियो फोन प्लान लॉन्च हुआ जो 49 रुपए महीना का था।  

5 सितंबर 2019 को कंपनी ने जियो फाइबर की शुरुआत की और 8,499 तथा 699 रुपए महीना का प्लान लॉन्च किया। 25 अक्टूबर 2019 को इसने जियो प्लेटफॉर्म को सेटअप किया। 19 जून 2020 में कंपनी ने कहा कि उसे वैश्विक निवेशकों से 115,693 करोड़ रुपए निवेश के तौर पर मिले हैं। इसने मार्च 2021 में 57,123 करोड रुपए का स्पेक्ट्रम भी खरीदा।  

जियो के 2016 में आने के बाद आरकॉम ने अक्टूबर 2017 में दिवालिया के लिए आवेदन फाइल किया। वोडाफोन अगस्त 2018 में आइडिया में मिल गई। जून 2012 के आंकड़ों के अनुसार जियो के पास 37% बाजार हिस्सेदारी थी जो मार्च 2017 में 9% थी। जबकि एयरटेल के पास 29.8% हिस्सेदारी है जो 2017 मार्च में 31.9% थी। वोडाफोन आइडिया के पास 23% हिस्सेदारी है जो 34.6% उस समय थी। जियो की लॉन्चिंग के बाद से भारती एयरटेल ने 5.5% और वोडाफोन ने 13% बाजार हिस्सेदारी गंवाई। दो अन्य ऑपरेटर्स ने 16.8% बाजार हिस्सेदारी गंवाया।  

जियो की इस कामयाबी में पहला तो ये कि डिस्काउंट टैरिफ की दोहरी रणनीति और सब्सिडी वाला फोन था। फिर स्पेक्ट्रम और फाइबर पर भारी निवेश कंपनी ने किया। यह ऑन लाइन एजुकेशन और मेडिकल फील्ड के लिए मददगार बना। जियो से पहले देश के ग्राहक 250 रुपए हर महीने 1 GB डेटा के लिए देते थे। 65 से 70 पैसा कॉल का चार्ज हुआ करता था। जियो ने फ्री लॉन्च किया तो ग्राहकों की लॉटरी लग गई। साथ ही जियो की जब टैरिफ शुरू हुई तो यह दूसरी कंपनियों की तुलना में 15-20% कम थी।  

जियो की लॉन्चिंग के समय जापान में एक गीगाबाइट GB के लिए 30 डॉलर लगता था जबकि कोरिया में 18 डॉलर, यूके, चीन और जर्मनी में 15-15 डॉलर, अमेरिका में 10 डॉलर और भारत में 4 डॉलर का चार्ज लगता था। पर जियो ने इसे एक डॉलर के चार्ज में लॉन्च किया। जियो ऑफर के दौरान ग्राहकों को जियो सिनेमा, जियो टीवी, जियो म्युजिक, माई जियो, जियो नेट, जियो सिक्योरिटी, जियो 4 जी वॉइस जैसे फीचर मिले। इसमें हजारों फिल्मों, गानों, 350 लाइव टीवी चैनल, वीडियोज आदि दिए गए। कंपनी ने जियो को नंबर वन बनाने के लिए पिछले पांच सालों में करीबन 1.50 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया है।  

इसी तरह हर ग्राहकों से इसकी कमाई 2023 में 172 रुपए हो सकती है जो कि अभी 143 रुपए है। इसी दौरान इसके ग्राहकों की संख्या बढ़कर 48 करोड़ हो सकती है। यह अभी 42.6 करोड़ है। इसके फायदे की बात करें तो 2023 में सालाना फायदा 17,231 करोड़ रुपए हो सकता है। अभी का फायदा 12,015 करोड़ रुपए है। इसकी ग्रोथ अगले तीन सालों में 19.8% CAGR (सालाना औसत) रह सकती है। ICICI डायरेक्ट ने कहा है कि रिलायंस के डिजिटल सेगमेंट का एंटरप्राइज वैल्यू 6.84 लाख करोड़ रुपए हो सकता है जो अभी 5.16 लाख करोड़ रुपए है।  

जियो के लिए अगला प्रमुख पड़ाव दीवाली है। क्योंकि इसी दौरान जियो गूगल के साथ मिलकर सस्ते स्मार्टफोन की लॉन्चिंग करेगी। हालांकि इसे सितंबर में लॉन्च करने की योजना थी, पर योजना को टाल दिया गया। ICICI डायरेक्ट ने अपनी रिपोर्ट में अनुमान लगाया है कि जियो का रेवेन्यू वित्त वर्ष 2023 में 96,199 करोड़ रुपए हो सकता है। यह 2021 के वित्तवर्ष में 69 हजार करोड़ रुपए था। इस हिसाब से 2024 के वित्तवर्ष तक कंपनी 1 लाख करोड़ रेवेन्यू हासिल कर सकती है।  

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