ओयो के IPO को रोकने की कोशिश, दिल्ली हाईकोर्ट में 7 अक्टूबर को होगी सुनवाई

मुंबई- ओयो होटल्स एंड रूम्स और इसकी प्रतिद्वंदी कंपनी जोस्टल (जो रूम) के बीच लड़ाई तेज हो गई है। जोस्टल अब सेबी के पास ओयो के IPO को रोकने की कोशिश करने वाली है। इस मामले में 7 अक्टूबर को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई है।  

हाईकोर्ट में सुनवाई के बाद जोस्टल सेबी के पास जाएगी। ओयो ने सुप्रीमकोर्ट द्वारा नियुक्त ऑर्बिट्रेटर के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। जोस्टल ने अगस्त में ही ओयो के IPO को रोकने के लिए कदम उठाया था। जोयो सेबी को यह बताना चाहती है कि ऑर्बिट्रेशन अवार्ड अभी कोर्ट में लंबित है। ऐसे में शेयर्स की बिक्री सही नहीं है। यह लिस्टिंग रेगुलेशंस के नियमों का उल्लंघन है।  

ओयो ने सितंबर में IPO के लिए सेबी के पास अर्जी दी थी। ओयो IPO के जरिए 8,400 करोड़ रुपए जुटाना चाहती है। हालांकि सूत्र कहते हैं कि जोस्टल ओयो के IPO को रोकना नहीं चाहती है। बल्कि वह कोर्ट से यह कहना चाहती है कि ओयो शेयर्स को एक एस्क्रो अकाउंट में रखा जाए। इसे तब तक रखा जाए जब तक कि ओयो ने जो चुनौती दिल्ली हाईकोर्ट में दी है, उसका फैसला न आए। जोस्टल का ओयो में 7% का हिस्सा है और जोस्टल इसे लेना चाहती है।  

ओयो नए शेयर्स के जरिए 7 हजार करोड़ रुपए जुटाएगी। बाकी का पैसा सेकेंडरी शेयर्स के जरिए या फिर वर्तमान शेयरधारकों द्वारा शेयर बेचकर जुटाया जाएगा। ओयो का वैल्यूएशन 9 अरब डॉलर यानी करीब 67 हजार करोड़ रुपए आंका जा रहा है। यह भारत का तीसरा सबसे ज्यादा वैल्यूएशन वाला स्टार्टअप है। 

आर्बिट्रेटर ने मार्च में कहा कि चूंकि मामला कोर्ट में है, इसलिए जो नॉन बाइंडिंग टर्मशीट है उसे ओयो को मानना होगा। ओयो ने 2015 में जोस्टल का मामूली हिस्सा खरीदी थी। हालांकि यह डील फेल हो गई थी। लेकिन जोस्टल ने कोर्ट में कहा कि अभी भी उसका 7% हिस्सा ओयो की पैरेंट कंपनी ओरावेल स्टे में है।  

हालांकि सेबी IPO को चाहे तो 90 दिनों तक के लिए रोक सकती है। जैसा कि इससे पहले अडाणी, बिड़ला और गो एयर के साथ हुआ है। तीनों IPO में विवाद की वजह से सेबी ने मंजूरी देने में देरी की थी। दूसरा विकल्प यह भी है कि अगर सेबी को इस विवाद में गंभीर मामला दिखा तो सेबी ओयो को ऑफर डाक्यूमेंट यानी अर्जी को फिर से फाइल करने के लिए कह सकती है।  

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