BSNL के चेयरमैन को हटाने की मांग, यूनियन 26 अक्टूबर को करेंगी प्रदर्शन

मुंबई- सरकारी टेलीकॉम कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) के कर्मचारी यूनियनों ने चेयरमैन पी.के. पुरवार को हटाने की मांग की है। यूनियन ने कहा है कि कंपनी को फिर से जिंदा करने में पुरवार विफल रहे हैं।  

BSNL के चेयरमैन पी के पुरवार को हटाने के लिए BSNL की सभी यूनियन 26 अक्टूबर को काला झंडा लेकर प्रदर्शन करेंगी। यूनियन 6 अक्टूबर से सोशल मीडिया पर पुरवार को पद से हटाने की मांग को लेकर अभियान शुरू करेगी। यूनियन ने कहा है कि 2019 में घोषित किये गए रिवाइवल पैकेज की मंजूरी के बाद भी अब तक इसके बारे में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इसके अलावा कर्मचारियों के मामलों के सेटलमेंट के लिए भी कोई कदम नहीं उठाया गया है।  

यूनियन ने अपने सर्कुलर में कहा कि पी के पुरवार ही कंपनी की चौतरफा विफलता के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं। गौरतलब है कि सरकार ने अक्टूबर 2019 में BSNL और महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (MTNL) को लगभग 69,000 करोड़ रुपए के संयुक्त रिवाइवल पैकेज की पेशकश की थी। इससे दोनों कंपनियों को अपने घाटे को कम करने में मदद मिली है। 

BSNL का घाटा 2020-21 में घटकर 7,441 करोड़ रुपए था। 2019-20 में 15,500 करोड़ रुपए का घाटा था। हालांकि BSNL पर करीब 30,000 करोड़ रुपए का कर्ज है। यूनियन AUAB ने आरोप लगाया कि पीके पुरवार BSNL के सुधार के लिए कुछ नहीं कर सके। उल्टा MTNL अब खत्म होने के कगार पर है। इसलिए पुरवार की लीडरशिप में BSNL के पुनरुद्धार की कोई संभावना नहीं है। 

पिछले साढ़े सात वर्षों में पुरवार ने MTNL को पांच वर्षों से अधिक समय तक लीड किया है। ज्यादातर समय उन्होंने कर्ज में डूबी MTNL के CMD के रूप में अतिरिक्त प्रभार संभाला है। वह BSNL के पूर्णकालिक CMD के रूप में कार्य करते हुए इस पद पर बने हुए हैं। AUAB ने आरोप लगाया कि CMD चाहते तो केवल 49,300 मोबाइल टॉवर्स को अपग्रेड करके अप्रैल 2020 से पहले 4G सेवाएं शुरू कर सकते थे। पहले का मैनेजमेंट पहले से ही 4G टेक्नोलॉजी सेट अप कर चुका था। 

यूनियन का कहना है कि पी के पुरवार ने 4G सेवाओं को लॉन्च करने के लिए एक के बाद एक तारीख दिया। पहले उन्होंने 1 जनवरी, 2020 फिर 1 मार्च, 2020 और फिर 1 अप्रैल, 2020 की तारीख दी।   

AUAB ने आरोप लगाया कि स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (VRS) के तहत 80,000 कर्मचारियों ने कंपनी छोड़ दिया। फिर भी सैलरी समय पर नहीं मिलती है। यूनियन ने कहा कि पीके पुरवार ने अब यह बता दिया है कि कर्मचारियों को सैलरी देना उनकी पहली प्राथमिकता नहीं है। 

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