अचानक आई बीमारी से घर-बार सब बिक सकता है, हेल्थ बीमा सबसे जरूरी

मुंबई- आपको ऐसे कुछ केस बताते हैं, जिसने कोरोना के समय में लोगों के घर-बार को बेचने पर मजबूर कर दिया। 36 वर्षीय अनुराधा मिस्त्री 26 अप्रैल कोअस्पताल में भर्ती हुईं। 14 मई से वे इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) मे थीं और 23 अगस्त को उनको छुट्‌टी मिली। उनका अस्पताल का बिल 86 लाख रुपए हुआ। इस बिल को चुकाने के लिए उनके पति ने अपनी सभी बचत का उपयोग किया। साथ ही रिश्तेदारों से कर्ज भी लिया और प्रॉपर्टी भी बेची।  

दूसरे केस में, मुंबई के 40 वर्षीय जतिन मेहता 14 मई से ICU में हैं। उनका अस्पताल का बिल 1 करोड़ रुपए है। उन्होंने अपना 3 बेडरूम वाला फ्लैट बेच दिया है और अब 1 बेडरूम में आ गए हैं। तीसरे केस में कटक की 36 साल की दीपशिखा 14 जून से ICU में हैं। उनका अस्पताल का बिल 1 करोड़ रुपए है। अभी तक उन्होंने रिश्तेदारों और परिवार के सदस्यों से पैसा जुटाया है। आगे की जरूरत के लिए उनको कोई दूसरा रास्ता सोचना होगा।  

इन तीनों केस में देखा जाए तो तीनों की उम्र 40 साल से नीचे है। यानी वे अभी युवा हैं और उनकी उम्र के आधार पर उनको कोई बीमारी नहीं होनी चाहिए। पर बीमारी अचानक ही आती है और जब आती है तो इस तरह की दिक्कतें खड़ी कर देती है।  

हेल्थ इंश्योरेंस यानी स्वास्थ्य बीमा बहुत महंगा नहीं है। अगर आप 40 साल की उम्र के हैं और 4 लोगों का फैमिली पैक लेते हैं तो आपको 25 लाख रुपए के कवर के लिए साल का 30-35 हजार रुपए का प्रीमियम देना होता है। इस 30-35 हजार के प्रीमियम से आपकी जिंदगी भर की बचत और प्रॉपर्टी सब कुछ सुरक्षित हो जाती है। अब अगर इन लोगों ने एक अच्छी कंपनी से अच्छा हेल्थ इंश्योरेंस लिया होता तो इस तरह की आर्थिक दिक्कतों से वे पार पा सकते थे।  

आज के माहौल में खाने से पहले जरूरी हेल्थ इंश्योरेंस है। खासकर कोरोना जैसे समय में तो लोगों को हेल्थ इंश्योरेंस का कवर दोगुना या तीन गुना कर लेना चाहिए। कोरोना को छोड़ भी दें तो अन्य बीमारियां कभी भी आ सकती हैं। ऐसे में आपके पास उधारी लेने या अपना घर बार बेचने के सिवा कोई रास्ता नहीं होता है।  

कभी-कभार तो ऐसा भी होता है कि आपको उधारी ऐसे समय में मिलना भी मुश्किल हो जाए। ऐसे में हेल्थ इंश्योरेंस आपके लिए एक भगवान की तरह होता है। भारतीय लोगों को आने वाले समय में 15 हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च हेल्थ पर करना होगा। कोशिश करनी चाहिए कि आप जब भी हेल्थ इंश्योरेंस लें तो वह आपके परिवार के पूरे सदस्य को कवर करे।  

अगर आप किसी कंपनी में काम करते हैं तो उसका ग्रुप इंश्योरेंस आपके लिए पर्याप्त नहीं होता है। क्योंकि ग्रुप कवर भी एक सीमित दायरे में ही कवर करता है। ऐसी स्थितियों में भी आपको अलग से हेल्थ इंश्योरेंस कवर लेना चाहिए। इससे आप इस तरह की अचानक आई खर्च की स्थिति से बच सकते हैं।  

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