निफ्टी की 10 हजार की बढ़त में रिलायंस का सबसे ज्यादा योगदान, इंफोसिस दूसरे नंबर पर

मुंबई- नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के निफ्टी इंडेक्स ने पिछले साल मार्च से अब तक 10 हजार की बढ़त हासिल किया है। इस 10 हजार की बढ़त में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने सबसे ज्यादा एक हजार पॉइंट का योगदान दिया। जबकि सरकारी कंपनियों ने इस बढ़त में काफी कम योगदान दिया है। 

पिछले हफ्ते निफ्टी ने 17,519 के लेवल को टच किया था। पिछले साल मार्च में 7,511 अंक पर निफ्टी था। यानी इस दौरान निफ्टी में 10 हजार अंकों की बढ़त देखी गई। ऑयल से टेलीकॉम सेक्टर में फैली रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) ने निफ्टी के 10 हजार की बढ़त में 10% यानी एक हजार पॉइंट का योगदान दिया।  

रिलायंस इंडस्ट्रीज देश की सबसे बड़ी कंपनी है। इसका शेयर इस समय पिछले एक साल में हाइएस्ट लेवल पर है। इस समय यह शेयर 2,400 रुपए के करीब कारोबार कर रहा है। जबकि मार्च 2020 में यह शेयर 875 रुपए का निचला स्तर बनाया था। हालांकि उसी साल सितंबर में यह 2,368 रुपए का हाइएस्ट भी बनाया था। अब रिलायंस के शेयर ने उस लेवल को पार कर लिया है।  

टाटा कंसलटेंसी सर्विसेस (TCS) ने निफ्टी के 10 हजार की बढ़त में 532 अंकों का योगदान दिया है। जबकि इसी दौरान दूसरी IT कंपनी इंफोसिस ने 963 अंकों का योगदान दिया है। यानी रिलायंस के बाद इंफोसिस सबसे ज्यादा योगदान निफ्टी की बढ़त में की है। HDFC बैंक ने 611 अंकों का, जबकि HDFC लिमिटेड ने 578 अंकों का योगदान निफ्टी की बढ़त में दिया। TCS और इंफोसिस दोनों के शेयर्स ने अच्छी खासी बढ़त हासिल की है। दोनों के शेयर्स एक साल के ऊपरी स्तर पर हैं। TCS 14 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा मार्केट कैप वाली दूसरी कंपनी बन गई है।  

निजी सेक्टर के बड़े बैंक ICICI बैंक ने निफ्टी की बढ़त में 552 अंकों का योगदान दिया। इंफ्रा सहित कई सेक्टर में शामिल लॉर्सन एंड टूब्रो (L&T) ने 325 अंकों का योगदान दिया। एक्सिस बैंक ने 315, बजाज फाइनेंस ने 304 और कोटक महिंद्रा बैंक ने 260 अंकों का योगदान दिया। इस तरह देखा जाए तो निफ्टी के 10 हजार की बढ़त में बैंकिंग सेक्टर का ज्यादा योगदान रहा। कुल 4 बैंकों ने इस दौरान योगदान दिया।  

पिछले साल मार्च से अब तक बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के सेंसेक्स में 33 हजार पॉइंट या 129% की बढ़त देखी गई। सेंसेक्स पिछले साल 24 मार्च को25,638 अंक पर बंद हुआ था। पिछले डेढ़ साल में बाजार में काफी पैसा आया। बाजार में पैसा आने की मुख्य वजह दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में कटौती थी। इस कारण लोगों ने ज्यादा फायदा कमाने के लिए बैंकों की बजाय शेयर बाजार में पैसा लगाया।  

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