मार्केट कैप यूके को पीछे छोड़ सकता है भारत, अब छठें नंबर पर

मुंबई- मार्केट कैप के मामले में भारतीय बाजार को छठें नंबर पर आ गया है। इसने गुरुवार को फ्रांस को पीछे छोड़ दिया। जबकि यूके को पीछे छोड़ने के करीब है। 

भारत का मार्केट कैप 260.80 लाख करोड़ रुपए है। डॉलर में यह 3.54 ट्रिलियन डॉलर है। एक ट्रिलियन डॉलर मतलब 73.19 लाख करोड़ रुपए। फ्रांस के बाजार का मार्केट कैप 3.39 ट्रिलियन डॉलर है। दुनिया के टॉप बाजारों में अमेरिकी बाजार पहले नंबर पर है। इसका मार्केट कैप 50.99 ट्रिलियन डॉलर है। जबकि चीन का बाजार 12.41 ट्रिलियन डॉलर के साथ दूसरे नंबर पर है।  

जापान का मार्केट कैप 7.37 ट्रिलियन डॉलर जबकि चौथे नंबर पर हांगकांग का बाजार है। इसका मार्केट कैप 6.41 ट्रिलियन डॉलर है। UK पांचवें नंबर पर है। इसका मार्केट कैप 3.66 ट्रिलियन डॉलर है। अनुमान है कि दीवाली तक या दिसंबर तक BSE सेंसेक्स 61 हजार के आंकड़े को पार कर जाएगा, ऐसे में मार्केट कैप के मामले में यह UK को भी पीछे छोड़ देगा।  

देश का सबसे बड़ा IPO LIC का इसी साल आएगा। इसके आने से मार्केट कैप में 10-12 लाख करोड़ रुपए की बढ़ोत्तरी हो सकती है। इस तरह से बाजार की बढ़त के अलावा ढेर सारे नए IPO से भी भारत UK को पीछे छोड़ सकता है। पिछले दो महीने में भारत में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 23 लाख करोड़ रुपए बढ़ा है। इसमें शेयरों की बढ़त का योगदान तो है ही, साथ ही नई लिस्टेड कंपनियां भी योगदान कर रही हैं।  

पूरी दुनिया में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 119.06 ट्रिलियन डॉलर है। इसमें से करीबन 44% हिस्सा अकेले अमेरिकी बाजार के पास है। बाकी 56% में पूरी दुनिया के बाजार हैं। दुनिया के मार्केट कैप में भारतीय बाजार का योगदान 2.89% है। फ्रांस का योगदान 2.84% है। कनाडा का योगदान 2.65% है। चीन का योगदान 10.43% जबकि जापान का 6.19 और हांगकांग का 5.39% योगदान है।  

रिटर्न की बात करें तो दुनिया में सबसे ज्यादा रिटर्न भारतीय बाजार ने दिया है। सेंसेक्स ने इस साल में 12.46% का रिटर्न दिया है। जबकि जापान के बाजार ने 11.14, फिलीपिंस के बाजार ने 11.14, चीन के बाजार ने 6.17 और अमेरिका के बाजार ने 3.33% का रिटर्न निवेशकों को दिया है। हालांकि सबसे महंगे बाजारों में भारत का बाजार दूसरे नंबर पर है।  

अमेरिका का बाजार एक वर्ष के फारवर्ड PE के आधार पर 33 के PR पर कारोबार कर रहा है। जबकि भारत का बाजार 25.53 के PE पर कारोबार कर रहा है। जापान का बाजार 18.2, चीन का बाजार 12.2 के PE पर कारोबार कर रहा है। PE का मतलब प्राइस टु अर्निंग से है। यानी कि हम किसी कंपनी के शेयर के एक रुपए की कमाई पर कितना पैसा दे रहे हैं। सीधे तौर पर जितना कम PE होता है, बाजार उतना सस्ता होता है। भारत के मामले में 25.53 का PE का मतलब हम एक रुपए की कमाई पर 25.53 रुपए के वैल्यूएशन पर निवेश कर रहे हैं।  

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