68 साल बाद फिर से टाटा ग्रुप के पास जा सकती है एयर इंडिया

मुंबई- करीबन 68 साल बाद एयर इंडिया एक बार फिर से घर वापसी कर सकती है। खबर है कि टाटा ग्रुप ने एयर इंडिया को खरीदने के लिए बोली लगाई है। बोली लगाने की कल अंतिम तारीख थी। एयर इंडिया पहले टाटा ग्रुप के पास ही थी। 

एअर इंडिया को 1932 में टाटा ग्रुप ने ही शुरू किया था। टाटा समूह के जे.आर.डी. टाटा इसके फाउंडर थे। वे खुद पायलट थे। तब इसका नाम टाटा एअर सर्विस रखा गया। 1938 तक कंपनी ने अपनी घरेलू उड़ानें शुरू कर दी थीं। दूसरे विश्व युद्ध के बाद इसे सरकारी कंपनी बना दिया गया। आजादी के बाद सरकार ने इसमें 49 पर्सेंट हिस्सेदारी खरीदी। 

इस डील के तहत एअर इंडिया का मुंबई में स्थित हेड ऑफिस और दिल्ली का एयरलाइंस हाउस भी शामिल है। मुंबई के ऑफिस की मार्केट वैल्यू 1,500 करोड़ रुपए से ज्यादा है। मौजूदा समय में एअर इंडिया देश में 4400 और विदेशों में 1800 लैंडिंग और पार्किंग स्लॉट को कंट्रोल करती है। 

भारी-भरकम कर्ज से दबी एयर इंडिया को कई सालों से बेचने की योजना में सरकार फेल रही। हाल में विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था कि 15 सितंबर के बाद बोली लगाने की तारीख नहीं बढ़ाई जाएगी। उधर भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यन स्वामी ने इसे हफ्ते सोशल मीडिया पर कहा था कि एयर इंडिया की नीलामी की प्रक्रिया में धांधली हो रही है। इसके खिलाफ उन्होंने कोर्ट जाने की बात कही थी।  

स्वामी ने नीलामी की प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की थी। उनका कहना था कि स्पाइसजेट खुद फाइनेंशियल समस्याओं से घिरी हुई कंपनी है और ऐसे में वह बोली लगाने की अधिकारी नहीं है। उन्होंने टाटा को भी अयोग्य बताया। कहा कि एयर एशिया के मामले में टाटा संकट में है और कोर्ट में मामला भी उस पर है।  

एयर इंडिया 2007 में इंडियन एयरलाइंस में विलय के बाद से कभी नेट प्रॉफिट में नहीं रही है। कंपनी को मार्च 2021 में खत्म तिमाही में ₹9,500- ₹10,000 करोड़ का घाटा होने का अनुमान लगाया गया था। एयर इंडिया पर 31 मार्च 2019 तक कुल 60 हजार 74 करोड़ रुपए का कर्ज था। जो भी एयर इंडिया को खरीदेगा, उसे इसमें से 23,286.5 करोड़ रुपए का कर्ज भी लेना होगा।  

एयर इंडिया की नॉन कोर असेट्स से जो पैसा आएगा, उसका उपयोग एयर इंडिया का कर्ज चुकाने के लिए किया जाएगा। एयर इंडिया इन सभी संपत्तियों को बेचने की तैयारी कर रही है। एयर इंडिया की प्रॉपर्टी का रिजर्व प्राइस इसकी ओवरसाइट कमिटी द्वारा तय किया गया है। इसमें तीन वैल्यूअर्स से प्रपोजल मिला है। 

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