टाटा ग्रुप में अब CEO के जरिए चलाया जाएगा कारोबार

मुंबई- टाटा संस लिमिटेड अब एक ऐतिहासिक बदलाव की ओर जा रहा है। भारत का सबसे बड़ा कारोबारी घराना टाटा ग्रुप अपने कॉर्पोरेट गवर्नेंस को बेहतर बनाने में मदद करने के लिए एक प्रमुख कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति करना चाहता है। उधर, टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन के रूप में रतन टाटा की जगह कौन लेगा, इस बारे में कुछ साफ नहीं है। 

83 साल के रतन टाटा अभी टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन हैं। प्रस्तावित प्लान के तहत, नए CEO 153 साल पुराने टाटा के बिजनेस साम्राज्य का मार्गदर्शन करेंगे। जबकि चेयरमैन मॉनिटरिंग अधिकारी की भूमिका में रहेंगे। हालांकि इस फैसले में रतन टाटा की मंजूरी सबसे महत्वपूर्ण है। टाटा संस के मौजूदा चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन का कार्यकाल फरवरी 2022 में खत्म होगा। उन्हें सेवा विस्तार देने पर विचार किया जा रहा है। 

एन चंद्रशेखरन, रतन टाटा के सबसे भरोसेमंद अधिकारियों में से एक हैं। यह मजेदार बात है कि आज जिस ग्रुप के वे चेयरमैन हैं, उसी ग्रुप की कंपनी TCS में वे इंटर्न के रूप में जुड़े थे। 1990 के दशक में वे ग्रुप में मैनेजमेंट लेवल पर पहुंच गए। वे 35 सालों से इस ग्रुप में हैं। 2009 में उन्हें TCS का CEO बनाया गया था।  

टाटा स्टील सहित टाटा समूह की विभिन्न कंपनियों के प्रमुखों का CEO पद के लिए मूल्यांकन भी किया जा रहा है। इस पर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। इस योजना में बदलाव भी हो सकता है। CEO वाला प्रस्ताव साइरस पी मिस्त्री के साथ साल भर की कानूनी लड़ाई जीतने के कई महीने बाद आया है। मिस्त्री ग्रुप के चेयरमैन थे। उन पर ग्रुप में मिस मैनेजमेंट का आरोप लगाया गया। 2016 में उन्हें पद से हटा दिया गया था। इस प्रस्तावित प्लान से ग्रुप के लिए भविष्य का चार्ट तैयार करने में मदद मिल सकती है।  

टाटा ट्रस्ट के पास टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी का 66% मालिकाना हक है। ग्रुप के एक नए CEO को कई चुनौतियों से निपटना होगा। टाटा स्टील 10 अरब डॉलर के कर्ज को कम करने की कोशिश कर रही है। जबकि टाटा मोटर्स लगातार तीन साल से घाटे में है। 

100 से अधिक बिजनेस और दो दर्जन से ज्यादा लिस्टेड कंपनियों वाले टाटा ग्रुप के पास 2020 में 106 बिलियन डॉलर का सालाना रेवेन्यू था। इसके पास 7.5 लाख कर्मचारी हैं। ये कर्मचारी कार-ट्रक बनाने, चाय बेचने, स्टील बनाने, बीमा बेचने, सॉफ्टवेयर बनाने और फोन नेटवर्क लगाने जैसे कई काम करते हैं। 

ग्रुप के लीडरशिप में प्रस्तावित बदलाव, सेबी की योजना के अनुरूप है। रेगुलेटर की इस योजना में कहा गया है कि देश की टॉप 500 लिस्टेड कंपनियों के पास बेहतर गवर्नेंस के लिए अप्रैल 2022 तक चेयरमैन और CEO का पद अलग-अलग होना चाहिए। हालांकि टाटा संस लिस्टेड नहीं है, लेकिन लीडरशिप में यह बदलाव नियम का पालन करने में मदद करेगा।  

होल्डिंग कंपनी के ऊपर एक पेशेवर प्रबंधक नियुक्त करने के प्लान को रतन टाटा की रिटायरमेंट की भूमिका के रूप में देखा जा रहा है। क्योंकि रतन टाटा अब पूरी तरह से रिटायर होने के कगार पर हैं। टाटा अब सक्रिय रूप से व्यापारिक फैसलों में शामिल नहीं होते हैं। पर टाटा ट्रस्ट के जरिए वह ग्रुप के प्रबंधन पर अभी भी काफी प्रभाव डालते हैं।  

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