ये है 37 करोड़ रुपए का इनामी गृहमंत्री, जानिए कौन है ये और क्या करता है

मुंबई- 20 साल बाद अमेरिकी सेना ने अफगानिस्तान छोड़ा। एक बार फिर तालिबान ने हुकूमत का औपचारिक ऐलान कर दिया। तालिबान घोषित आतंकी संगठन है। इस सरकार में एक नाम और उसका ओहदा या कहें पोर्टफोलियो, अमेरिका और दुनिया को चौंका रहा है। ये नाम है सिराजुद्दीन हक्कानी। अमेरिका ने उस पर 37 करोड़ रुपए का इनाम घोषित कर रखा है। 

सिराजुद्दीन और उसके पिता ने 2008 में काबुल के भारतीय दूतावास पर भी हमला कराया था। इसमें 58 लोग मारे गए थे। 2011 में अमेरिका के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ रहे जनरल माइक मुलेन ने हक्कानी नेटवर्क को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का दायां हाथ और एजेंट बताया था। 

अफगानिस्तान में फिदायीन या आत्मघाती हमले शुरू करने वाला हक्कानी नेटवर्क और खास तौर पर यही सिराजुद्दीन हक्कानी माना जाता है। सिराजुद्दीन ने अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई की हत्या की साजिश भी इन्हीं हमलों के तहत रची थी। कहा जाता है कि सिराजुद्दीन का बाप और हक्कानी नेटवर्क की स्थापना करने वाला जलालुद्दीन हक्कानी 2013 या 2015 के बीच मारा गया, लेकिन सिराजुद्दीन 2001 के बाद से ही हक्कानी नेटवर्क का सरगना बना हुआ है। सिराजुद्दीन पाकिस्तान के वजीरिस्तान में ही रहता है। 

1980 के आसपास सोवियत सेना ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया। पाकिस्तान के साथ मिलकर स्थानीय कबीलों को हथियार और पैसा दिया। इनमें हक्कानी नेटवर्क भी शामिल था। इसके बाद तालिबान बना और अमेरिका ने इन गुटों से दूरी बनानी शुरू कर दी, लेकिन पाकिस्तान इन्हें पालता-पोसता रहा। ISI ने हक्कानी नेटवर्क का इस्तेमाल अफगानिस्तान और अमेरिका दोनों के खिलाफ किया। ये एजेंसी पैसे भी लेती और हमले भी कराती। अमेरिका की ये नाकामी ही कही जाएगी कि वो पाकिस्तान पर दबाव डालकर हक्कानी नेटवर्क को खत्म नहीं करा सका। 

शायद कम लोगों को पता होगा कि तालिबान किसी एक संगठन का नाम नहीं है। इसमें कई गुट, कई कबीले और कई धड़े हैं। हक्कानी नेटवर्क को आप इनमें से एक मान सकते हैं। अफगान तालिबान अलग है और पाकिस्तान तालिबान अलग।  

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