जोमैटो ने मर्चेंट बैंकर्स को सबसे ज्यादा 229 करोड़ रुपए फीस दिया

मुंबई- जोमैटो के IPO ने भारतीय कैपिटल मार्केट में एक और इतिहास कायम किया है। मर्चेंट बैंकर्स को फीस देने में यह अव्वल रहा है। इसने 229 करोड़ रुपए की फीस IPO के लिए मर्चेंट बैंकर्स को दिया है।  

दरअसल किसी भी IPO को पार लगाने में मर्चेंट बैंकर्स की प्रमुख भूमिका होती है और बिना इनके IPO लाया भी नहीं जा सकता है। ये बैंकर्स ही IPO की कीमत और अन्य चीजें तय करते हैं। यही बड़े निवेशकों को भी कंपनी में लाते हैं। मर्चेंट बैकर्स को दी गई फीस को रुपए के टर्म में देखें तो जोमैटो अव्वल रहा है। पर्सेंट के मामले में यह थोड़ा पीछे रह गया है। 

इन कंपनियों द्वारा सेबी के पास जमा कराए गए मसौदे से जो जानकारी मिली है, उसमें यह बताया गया है। जोमैटो ने 9,375 करोड़ रुपए के इश्यू के लिए 229 करोड़ रुपए की फीस दिया। यानी पर्सेंट में यह 2.44% हुआ। इससे पहले सबसे ज्यादा फीस केयर्न एनर्जी ने दिया था। इसने कुल इश्यू का 2.53% फीस मर्चेंट बैंकर्स को दिया था। इसने 2007 में 5,261 करोड़ रुपए का इश्यू लाया था और 133 करोड़ रुपए फीस के रूप में दिया था।  

ग्लैंड फार्मा ने पिछले साल 6,436 करोड़ रुपए बाजार से जुटाया था। इसने 97 करोड़ रुपए मर्चेंट बैंकर्स को दिया। यानी 1.51% इसने फीस दिया। सबसे कम फीस SBI लाइफ ने दिया है। इसने 2017 में IPO लाया था। इसके जरिए 8,386 करोड़ रुपए जुटाया और केवल 18 करोड रुपए फीस दिया था। यह कुल इश्यू का 0.21% रहा। HDFC लाइफ ने भी 2017 में 8,695 करोड़ रुपए का इश्यू लाया था। इसने मर्चेंट बैंकर्स को 36 करोड़ रुपए दिया। यह कुल इश्यू का 0.41% रहा।  

बड़े इश्यू की बात करें तो रिलायंस पावर ने 2008 में IPO के जरिए 11,700 करोड़ रुपए जुटाया था। इसने उस समय 54 करोड़ रुपए मर्चेंट बैंकर्स को दिए थे। यह कुल इश्यू का 0.43% था। SBI कार्ड ने पिछले साल 10,341 करोड़ रुपए का IPO लाया था। इसने 48 करोड़ रुपए मर्चेंट बैंकर्स को फीस दिया। यह कुल इश्यू का 0.47% रहा था। 2017 में कुल 3 इंश्योरेंस कंपनियों ने इश्यू लाया था। ICICI लोंबार्ड इंश्योरेंस ने भी 2017 में इश्यू लाया था। इसने 5,701 करोड़ रुपए जुटाया और 54 करोड़ रुपए फीस मर्चेंट बैंकर्स को दिया। यानी कुल इश्यू का करीबन 0.95% इसने फीस दिया।  

इस साल जो भी बड़े IPO आए हैं, उसमें सोना कामस्टार और मैक्रोटेक डेलवपर्स को छोड़ दें तो सभी कंपनियों ने कुल ऑफर खर्च का औसतन 50% मर्चेंट बैंकर्स को फीस के रूप में पेमेंट किया है। जबकि जोमैटो ने 81% पेमेंट किया है। दरअसल मर्चेंट बैंकर्स की फीस कोई तय नहीं होती है। यह हर कंपनी के आधार पर तय होती है। सरकारी कंपनियां बहुत ही कम फीस देती हैं। या फिर वे कंपनियां जो मजबूत हैं या फिर फायदे में हैं और बेहतरीन हैं।  

उदाहरण के तौर पर SBI, HDFC और ICICI ग्रुप की तीनों बीमा कंपनियों ने काफी कम फीस दिया है। ऐसा इसलिए क्योंकि निवेशक इन कंपनियों को जानते हैं और यह फायदा कमाने वाली कंपनियां हैँ। इनके लिए ज्यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं होती है और आसानी से शेयर बिक जाते हैं। जबकि जोमैटो जैसे मामले में जो लगातार घाटा देने वाली कंपनी है, उनके शेयर बेचने में काफी मेहनत मर्चेंट बैंकर्स को करनी होती है। जोमैटो भारतीय बाजार में चौथा सबसे बड़ा इश्यू रहा है। इसे 2.13 लाख करोड़ रुपए की डिमांड मिली थी।  

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