शेयर बाजारों से कर रहे हैं कमाई तो जानिए कैसे लगेगा आप पर टैक्स

मुंबई– शेयरों की खरीद-बिक्री और इससे होने वाले लाभ पर टैक्स लगता है। शेयरों की बिक्री से होने वाली आय या घाटा ‘कैपिटल गेन्स’ के तहत कवर होता है। यह ठीक उसी तरह होता है जैसे सैलरी और अन्य कमाई पर टैक्स लगता है। अगर शेयर मार्केट में लिस्टेड शेयरों को खरीदने से 12 महीने के बाद बेचने पर लाभ होता है तो लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स कहते है। शेयरों की बिक्री करने वाले को इस कमाई पर उसे टैक्स देना पड़ता है।  

2018 के बजट में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स को फिर से शुरू किया गया था। इससे पहले इक्विटी शेयरों या इक्विटी म्यूचुअल फंड की यूनिटों की बिक्री से होने वाले लाभ पर टैक्स नहीं लगता था। इनकम टैक्स रूल्स के सेक्शन 10 (38) के तहत इस पर टैक्स से छूट मिली हुई थी। लेकिन 2018 के बजट में शामिल किए गए प्रावधान में कहा गया कि अगर एक साल के बाद बेचे गए शेयरों और इक्विटी म्यूचुअल फंड की यूनिटों की बिक्री पर एक लाख रुपये से ज्यादा का कैपिटेल गेन हुआ है तो इस पर 10 फीसदी टैक्स लगेगा। 

अगर शेयर मार्केट में लिस्टेड शेयरों को खरीदने के 12 महीनों के अंदर बेच दिया जाता है तो 15 फीसदी की दर से टैक्स लगता है। चाहे आप इनकम टैक्स देनदारी के 10 फीसदी के स्लैब में आते हों या 20 या 30 फीसदी के स्लैब के तहत, आपने शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन किया है तो इस पर 15 फीसदी का ही टैक्स लगेगा। अगर आपकी कर योग्य आय ढाई लाख रुपये से कम है तो शेयर बेचने से हासिल लाभ को इससे एडजस्ट किया जाएगा और फिर टैक्स कैलकुलेट होगा। इस पर 15 फीसदी टैक्स के साथ 4 फीसदी सेस लगेगा। 

स्टॉक एक्सचेंज में बेचे और खरीदे जाने वाले शेयरों पर सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स यानी STT लगता है। जब भी शेयर बाजार में शेयरों की खरीद-फरोख्त होती है , इस पर यह टैक्स देना पड़ता है। शेयरों की बिक्री पर सेलर को 0.025 फीसदी टैक्स देना पड़ता है। यह टैक्स शेयरों के बिक्री मूल्य पर देना पड़ता है। डिलीवरी बेस्ड शेयरों या इक्विटी म्यूचुअल फंड की यूनिट्स की बिक्री पर 0.001 फीसदी की दर से टैक्स लगता है। 

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