मेदांता अस्पताल भी आईपीओ की तैयारी में, 61 करोड़ रुपए है फायदा

मुंबई- देशभर में मेदांता ब्रांड से अस्पताल चलाने और मैनेज करने वाली कंपनी ग्लोबल हेल्थ प्राइवेट लिमिटेड IPO लाने की तैयारी में है। कंपनी फिलहाल लॉ फर्म्स और इनवेस्टमेंट बैकर्स से बातचीत कर रही है। इश्यू लाने के लिए जिन इनवेस्टमेंट बैंकर्स से बातचीत कर रही है उनमें जेएम फाइनेंशियल और कोटक सिक्योरिटीज भी शामिल है।  

मेदांता की शुरुआत 2004 में हुई थी। डॉक्टर त्रेहान देश के जानेमाने कार्डिक सर्जन हैं। मेदांता का फ्लैगशिप हॉस्पिटल मेडिसिटी गुरुग्राम में है। यहां 1300 बेड हैं जिसमें 246 क्रिटिकल केयर बेड्स हैं। प्राइवेट सेक्टर के अस्पतालों की बात करें तो यह देश का सबसे बड़ा हॉस्पिटल है जहां एक लोकेशन पर इतनी बड़ी संख्या में बेड हैं। इस हॉस्पिटल चेन की ऑपरेशनल कैपेसिटी फिलहाल 2000 बेड्स की है। गुरुग्राम, लखनऊ, इंदौर और रांची में मेदांता मल्टी-सुपर स्पेशियालिटी हॉस्पिटल है।  

पटना में 2020 में आउटपेंशेट सर्विस शुरू की गई है। इसके अलावा दिल्ली एयरपोर्ट, साउथ दिल्ली और DLF साइबरसिटी में भी मेदांता अस्पताल के तीन क्लीनिक हैं। फिस्कल ईयर 2020 में अस्पताल चेन की कुल आमदनी 1478 करोड़ रुपए रही जबकि शुद्ध लाभ 61 करोड़ रुपए रहा। 

प्राइवेट इक्विटी इनवेस्टर्स कार्लाइल ग्रुप (Carlyle Group) और टेमटेस की कंपनी में मेजॉरिटी स्टेक है। कार्लाइल ग्रुप के पास जहां 27 फीसदी स्टेक है वहीं टेमसेक के पास 18 फीसदी स्टेक है। 2013 में कार्लाइल कंपनी के बोर्ड में शामिल हुई थी। जबकि टेमसेक ने 2015 में पैसा लगाना शुरू किया था।  इस कंपनी पर डॉक्टर नरेश त्रेहान, उनके परिवार और मेदांत का को-फाउंडर सुनील सचदेवा का अधिकार है। 

PE इनवेस्टर्स लंबे समय से कंपनी से निकलने की कोशिश कर रहे हैं। 2019 में PE इनवेस्टर्स ने मेदांता में अपनी हिस्सेदारी मणिपाल हॉस्पिटल्स को बेचने की कोशिश की थी लेकिन तब बात नहीं बन पाई थी। तब मेदांता की मर्चेंडाइज वैल्यू 5800-6000 करोड़ रुपए था। मणिपाल हॉस्पिटल ने बाद में कोलंबिया एशिया हॉस्पिटल्स में हिस्सेदारी ली थी। 

पेटीएम ने आईपीओ के लिए फाइल किया मसौदा, 16,600 करोड़ जुटाएगी 

फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी कंपनी पेटीएम की पेरेंट वन97 कम्युनिकेशंस ने शेयर बाजार से 16,600 करोड़ रुपए की रकम जुटाने के लिए सेबी के पास DRHP (एप्लिकेशन) दी है। कंपनी इस इश्यू के जरिए नए शेयर बेचकर 8,300 करोड़ रुपए जुटाएगी, जबकि उसके मौजूदा निवेशक अपने 8,300 करोड़ रुपए के शेयर बेच सकेंगे। 

यह देश का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू होगा, जिसका रिकॉर्ड फिलहाल कोल इंडिया के पास है। एक दशक पहले यह सरकारी कंपनी 15,000 करोड़ रुपए का IPO लाई थी। गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2020-21 में कंपनी की आमदनी 3,186 करोड़ रुपए थी, जबकि इसने उससे पिछले साल 3,540 करोड़ रुपए कमाए थे। पिछले वित्त वर्ष कंपनी का लॉस घटकर 1,701 करोड़ रुपए रह गया था जो उससे एक साल पहले 2,942 करोड़ रुपए था। 

पिछले कुछ समय से इंटरनेट कंपनियों के बीच शेयर बाजार से पैसे जुटाने की होड़ मची है। डिजिटल पेमेंट कंपनी मोबिक्विक सेबी को अपने इश्यू का DRHP दे चुकी है। बाजार के पॉजिटिव सेंटीमेंट का फायदा उठाने के लिए इंश्योरेंस एग्रीगेटर पॉलिसीबाजार और लाइफस्टाइल रिटेलर नायका भी IPO ला सकती हैं। 

पेटीएम के शेयरधारकों ने नए शेयर बेचकर 12,000 करोड़ रुपए जुटाने के प्रस्ताव को हालिया बैठक (EGM) में मंजूरी दी थी। कंपनी के IPO में सेकेंडरी ऑफर भी होगा जिसमें मौजूदा निवेशक अपने शेयर बेच सकेंगे, जिससे इश्यू का टोटल साइज 16,600 करोड़ रुपए हो जाएगा। पेटीएम के फाउंडर और CEO विजय शेखर शर्मा के पास कंपनी में 20% से कम स्टेक है, इसलिए शेयरधारकों ने उन्हें प्रमोटर कैटेगरी से हटाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी थी। फिलहाल, पेटीएम में 14.61% हिस्सेदारी रखने वाले शर्मा कंपनी के चेयरमैन, मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) और चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) बने रहेंगे। 

IPO से पहले एंट ग्रुप के जिंग शियानदोंग वन97 के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर से हट गए थे। उनकी जगह अमेरिका में एंट ग्रुप के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट डगलस लीमैन फेजिन ने ली है। शेयरधारकों ने बोर्ड में बदलाव करने के साथ ही पूर्व और मौजूदा कर्मचारियों को ईसॉप के तौर पर 5,44,870 इक्विटी शेयर अलॉट करने के प्रपोजल को भी मंजूरी दी थी। 

वन97 को विजय शेखर शर्मा ने 2000 में शुरू किया था। कंपनी ने इससे पहले 2010 में लिस्टिंग का प्लान बनाया था। तब वह सिर्फ 120 करोड़ रुपए जुटाने के बारे में सोच रही थी। उस समय के एक्सचेंज रेट के हिसाब से यह रकम 2.8 करोड़ डॉलर होती है। बाजार में मचे उतार चढ़ाव को देखते हुए कंपनी कंपनी ने वह इरादा बदल दिया था। 

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