मोदी राज में विकास की गंगा, पेट्रोल, डीजल, गैस, खाने के तेल और दूध के दाम आसमान पर

मुंबई– विकास के नाम पर चलकर सत्ता में पहुंची मोदी के नेतृत्व में भाजपा गठबंधन सरकार ने जमकर विकास की गंगा पहुंचाई है। नतीजा यह हुआ कि साल 2004 से लेकर अब तक खाने के तेल, पेट्रोल, डीजल, गैस और दूध के दाम आसमान पर पहुंच गए हैं। यह सभी आम लोगों से सीधे जुड़ी हुई चीजें हैं। यह तब हुआ है, जब लोग दुनिया की भयंकर बीमारी कोरोना से अपनी दो जून की रोटी चलाने के लिए मजबूर हैं।  

साल 2004 में जब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकार सत्ता से हटी थी तब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे। उसके बाद मनमोहन सिंह के नेतृत्व में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार आई। 2004 में पेट्रोल की कीमत देश में 36.81 रुपए प्रति लीटर थी। 2014 में जब राजग सरकार की मोदी के नेतृत्व में वापसी हुई तो इसकी कीमत 71 रुपए हो गई। 2021 में यह 106 रुपए हो गई। डीजल की कीमत इसी दौरान 24.16 रुपए से बढ़कर 57 रुपए और फिर 100 रुपए पर अब पहुंच गई है।  

गैस की कीमत 261.50 रुपए प्रति सिलेंडर थी। 2014 में यह 414 रुपए हुई और अब सात साल बाद यह 835 रुपए हो गई है। इसकी कीमत सीधे रसोई में आग लगा रही है। खाने का तेल भी जरूरी चीजों में से है। 2004 में यह 30 रुपए प्रति लीटर था जो 2014 में 52 रुपए हो गया। अब यह 180 रुपए प्रति लीटर हो गया है। दूध हर घर की सुबह पहली चाय की जरूरत है। लेकिन इसने भी जमकर विकास किया।  

साल 2004 में दूध की प्रति लीटर कीमत 16 रुपए थी। 2014 में इसकी कीमत दोगुना होकर 32 रुपए हुई तो आज यह 60 रुपए से ज्यादा भाव पर बिक रहा है। हालांकि तबेले का शुद्ध दूध मुंबई जैसे शहर में 76 रुपए लीटर पर बिक रहा है। अब इन दोनों सरकारों के समय कच्चे तेल की कीमतें भी देख लें। कांग्रेस गठबंधन के समय कच्चे तेल की कीमतों में 222% का इजाफा हुआ लेकिन उसने पेट्रोल की कीमत में 77.5% और डीजल की कीमत में 66% की बढ़ोत्तरी की। भाजपा गठबंधन की सरकार के समय कच्चे तेल की कीमतों में 27.6% की कमी आई, पर इसके राज में पेट्रोल की कीमतें 39.8 और डीजल की कीमतें 56% बढ़ी।  

पेट्रोल और डीजल की कीमतों को बढ़ने का मतलब सरकार की कमाई से है। सरकार ने इस दौरान जमकर कमाई की है। प्रति लीटर की बात करें तो जून 2014 में डीलर्स से सरकार 48.4 रुपए प्रति लीटर पेट्रोल की कीमत लेती थी। इसमें 10.4 रुपए केंद्र सरकार का टैक्स, 12.2 रुपए राज्यों का टैक्स और 2 रुपए डीलर का कमीशन हुआ करता था। 2021 में गणित बदल गई। डीलर्स से भाव तो 39.20 रुपए का लिया गया, लेकिन केंद्र सरकार का टैक्स 32.29 रुपए, राज्य का टैक्स 22.80 रुपए और डीलर का कमीशन 3.8 रुपए हो गया।  

इसका असर यह हुआ कि पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी और वैट के रूप में ग्राहकों को 5.25 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा चुकाने पड़े। पिछले साल तक मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल में (2014-2020) टैक्स के जरिए पेट्रोल और डीजल से 17.80 लाख करोड़ रुपए की कमाई की थी। साल 2014 से कच्चे तेलों की कीमतें 109 डॉलर से घट कर 78 डॉलर प्रति बैरल पर औसत रूप से आ गई हैं। हालांकि पिछले साल तो यह 40 डॉलर के भी नीचे चली गई थी।  

खाने के तेलों की कीमतें 11 साल के अपने ऊपरी स्तर पर पहुंच गया है। दालों की बात करें तो इसकी भी कीमतें इसी तरह से बढ़ी हैं। साल 2006 में दालों की कीमतें 35-45 रुपए किलो थीं। प्याज की कीमत 10-12 रुपए जबकि टमाटर की कीमत 8-10 रुपए थी। आटा की बात करें तो इसकी कीमत 13 रुपए प्रति किलो, चीनी की कीमत 12-13 रुपए प्रति किलो थी।  

साल 2014 में दालों की कीमतें औसत रूप से 60 रुपए प्रति किलो पहुंच गई थीं। इसमें अरहर की दाल 60 रुपए, उड़द की दाल 65 रुपए मूंग दाल 87 रुपए किलो बिक रही थीं। हालांकि 2004 से 2013 के दौरान सभी खाद्य पदार्थों की कीमतें 157 पर्सेंट बढ़ी थीं। इसमें चावल, गेहूं और सभी तरह की दालें शामिल थीं। सब्जियों की कीमतें उस समय 3 गुना से ज्यादा बढ़ी थीं जबकि प्याज की कीमत 5 गुना से ज्यादा बढ़ी थी। 

अभी अरहर की दाल की कीमत 120-140 रुपए प्रति किलो है। उड़द दाल की कीमत 115 रुपए है जबकि मसूर दाल की कीमत 87 रुपए है। प्याज की कीमत 30 रुपए से ज्यादा है तो टमाटर की कीमत 20-25 रुपए किलो है। आटा की कीमत 45 रुपए किलो है। चीनी का भाव आज 40 रुपए के ऊपर है।  

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