बीपीसीएल को बेचने के लिए एफडीआई के नियमों में होगा बदलाव

मुंबई– केंद्र सरकार कई सरकारी गैस एंड ऑयल कंपनियों के विनिवेश की योजना बना रही है। लेकिन प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) से जुड़े नियम आड़े आ रहे हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए वाणिज्य और इंडस्ट्री मंत्रालय ने सरकारी गैस एंड ऑयल कंपनियों में 100% एफडीआई की मंजूरी देने के लिए प्रस्ताव तैयार किया है। मंत्रालय ने ड्राफ्ट कैबिनेट नोट पर संबंधित मंत्रालयों से सुझाव मांगे हैं। सूत्रों ने यह जानकारी दी है।

यदि इस प्रस्ताव को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिलती है तो भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी बीपीसीएल के निजीकरण में मदद मिलेगी। सरकार बीपीसीएल का निजीकरण करना चाहती है। इसके साथ ही सरकार कंपनी में से अपनी पूरी 52.98% हिस्सेदारी बेचना चाहती है। ड्राफ्ट नोट के हवाले से सूत्रों का कहना है कि पेट्रोलियम और नेचुरल गैस सेक्टर के लिए एफडीआई पॉलिसी में नया क्लॉज जोड़ा जाएगा। प्रस्ताव के मुताबिक, जिन सरकारी कंपनियों के विनिवेश के लिए सरकार ने सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है, उनमें ऑटोमैटिक रूट से 100% तक एफडीआई को मंजूरी होगी।

BPCL को खरीदने के लिए देश-विदेश की तीन कंपनियों ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट यानी EoI जमा की है। इसमें वेदांता ग्रुप और दो विदेशी कंपनियां शामिल हैं। विदेशी कंपनियों में अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट और आई स्क्वायर्ड कैपिटल आर्म शामिल हैं। सभी मंत्रालयों के सुझाव मिलने के बाद वाणिज्य मंत्रालय इस प्रस्ताव को केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी के लिए पेश करेगा।

मौजूदा समय में सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम रिफाइनिंग कंपनियों में ऑटोमैटिक रूट से 49% एफडीआई की अनुमति है। इस नियम के कारण अभी कोई भी विदेशी कंपनी BPCL में 49% से ज्यादा हिस्सेदारी नहीं खरीद सकती है। आपको बता दें कि डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक असेट मैनेजमेंट (DIPAM) ने पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस सेक्टर की केंद्र सरकार की कंपनियों में 100% एफडीआई को मंजूरी देने की सिफारिश की थी। चालू वित्त वर्ष के अंत तक यानी मार्च 2022 तक BPCL का निजीकरण हो सकता है। हालांकि, यह सबकुछ कोविड-19 महामारी पर निर्भर करेगा।

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