अनिल अंबानी की कंपनियों के शेयर 1 महीने में जबरदस्त बढ़े, 1 साल के ऊपरी स्तर पर पहुंचे

मुंबई– भारी-भरकम कर्ज के तले दबे और दिवालिया कंपनियों के मालिक अनिल अंबानी का दिन लगता है वापस आ रहा है। उनकी कंपनियों के शेयरों में जिस तरह से उछाल आ रहा है, उससे तो ऐसा ही कुछ साबित हो रहा है। हालांकि अभी भी उनकी नेटवर्थ जीरो है। पर उनकी लिस्टेड 6 कंपनियों के शेयरों ने शुक्रवार को 1 साल के ऊपरी भाव को टच किया।  

अनिल धीरूभाई अंबानी समूह की कुल 6 कंपनियां शेयर बाजार में लिस्टेड हैं। शुक्रवार को इन सभी कंपनियों में 5% के करीब बढ़त देखी गई और साथ ही अपर सर्किट भी शेयरों में लगा। रिलायंस इंफ्रा का शेयर 1 महीने पहले 49 रुपए था यह अब 88.95 रुपए हो गया है। यानी करीबन 70% की बढ़त दिखी है। इसका मार्केट कैप 2,185 करोड़ रुपए रहा है। रिलायंस कैपिटल का शेयर 1 महीने में 10.85 से बढ़कर 20.53 रुपए पर आ गया है। 95% की बढ़त। मार्केट कैप 518 करोड़ रुपए रहा है।  

रिलायंस नेवल का शेयर 2.80 से बढ़ कर 4.81 रुपए पर आ गया है। मार्केट कैप 354 करोड़ रुपए रहा है। रिलायंस पावर का शेर 6.45 से बढ़ कर 12.74 रुपए पर पहुंच गया है। मार्केट कैप 3,573 करोड़ रुपए रहा है। रिलायंस कम्युनिकेशन का शेयर 1.70 से 100% बढ़ कर 3.64 रुपए हो गया है। मार्केट कैप 1,006 करोड़ रुपए रहा है। रिलायंस होम फाइनेंस का शेयर 2.49 से 4.49 रुपए पर आ गया है। मार्केट कैप 217 करोड़ रुपए रहा है। 

रिलायंस इंफ्रा के बोर्ड ने 550 करोड़ रुपए प्रमोटर अनिल अंबानी से जुटाने के लिए मंजूरी दी है। इसके बाद कंपनी में अनिल की हिस्सेदारी 23% हो जाएगी। इसी तरह रिलायंस पावर बोर्ड की 13 जून को पैसा जुटाने के लिए मीटिंग होनी है। तीसरी घटना देश के सबसे बड़े बैंक SBI ने रिलायंस कम्युनिकेशन और रिलायंस इंफ्राटेल पर से फ्राड टैग को हटाने की मांग की है। इसके लिए NCLAT मुंबई में अप्लीकेशन फाइल किया है। रिलायंस पावर ने साल 2008 में 11,563 करोड़ का आईपीओ लाया थ। उस समय इसका भाव 232.80 रुपए था जो अब 12.74 रुपए पर है। यानी 90% का घाटा 13 सालों में। यह उस समय का सबसे बड़ा IPO था  

इसके अलावा हाल ही में सुप्रीमकोर्ट ने दिवालिया कंपनियों के मालिकों और उनके गारंटर बनने पर जबरदस्त झटका दिया है। कोर्ट ने ऐसे प्रमोटर्स और गारंटर्स के खिलाफ इन्सॉल्वेंसी प्रोसीडिंग शुरू करने वाले लेंडर्स के खिलाफ याचिकाएं खारिज कर दी। मतलब इन लोगों के मामलों को फिर से खोला जा सकता है। ऐसे में अनिल अंबानी अपनी पर्सनल संपत्तियों को बेच कर पैसा चुका सकते हैं जिससे उनकी हिस्सेदारी कंपनियों में बढ़ जाएगी। 

अनिल की बड़ी कंपनियों में रिलायंस कैपिटल पर दिसंबर 2020 तक 20,380 करोड़ रुपए का कर्ज था जबकि रिलायंस होम फाइनेंस पर 13 हजार करोड़ रुपए का कर्ज था। अनिल अंबानी पर 2018 में कर्ज की बात करें तो कुल 6 कंपनियों पर 1.72 लाख करोड़ रुपए था जबकि इसी दौरान मुकेश अंबानी पर कर्ज 3.51 लाख करोड़ रुपए था। आज मुकेश अंबानी का नेट कर्ज जीरो हो गया है जबकि अनिल अभी भी कर्ज के बोझ तले से जूझ रहे हैं। अनिल के ऊपर फरवरी 2020 तक 30.5 करोड़ डॉलर का कर्ज था जबकि उनकी असेट्स केवल 8.2 करोड़ डॉलर थी। सीएनआई के चेयरमैन किशोर ओस्तवाल कहते हैं कि अगर फंड जुटाने में अनिल की कंपनियां सफल होती हैं तो यह बहुत पॉजिटिव होगा। इससे इन कंपनियों का कर्ज चुकाने में मदद मिलेगी।  

इसी महीने में अनिल अंबानी 62 साल के हो गए। साल 2008 में वे 42 अरब डॉलर के साथ विश्व के बिलिनेयर क्लब का हिस्सा थे। 2018 में मुकेश अंबानी का नेटवर्थ 43 अरब डॉलर था जो इस समय 82 अरब डॉलर है।  2019 सितंबर तक 12.40 अरब डॉलर का कर्ज अनिल अंबानी पर था। अनिल अंबानी ने उस समय यूके कोर्ट में कहा था कि उनकी नेटवर्थ जीरो है। 

अपनी किस्मत के भरोसे मुकेश अब सफलता की नई इबारत लिखने लगे हैं। वे दुनिया के 12 वें और एशिया के सबसे अमीर बिजनेसमैन हैं। पहले वो मीडिया और फोटोग्राफरों से हमेशा बचते थे। और कभी कभार ही इंटरव्यू देते थे। परंतु अब वो काफी बदल गए हैं। मीडिया और खुद के इवेंट्स में धडल्ले से अपने बिजनेस को प्रमोट करते नजर आते हैं। यही नहीं, वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम या दावोस जैसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भी नियमित पैनलिस्ट के रूप में भाग लेते हैं। मुंबई की हाई सोसाइटी के बीच मुकेश ही नहीं, उनकी पत्नी नीता अंबानी भी काफी सक्रिय हो गई हैं। कोविड-19 के प्रकोप से पहले तक मुकेश अंबानी की 27 मंजिला आलीशान अंटीलिया में अक्सर कोई न कोई बड़े आयोजन होते रहते थे।

अनिल इसके विपरीत, लगभग पूरी तरह से घिर गए हैं। फिटनेस के शौकीन अनिल शारीरिक रूप से बेहतर हालत में हैं। सुबह-सुबह 10 मील तक दौड़ जाते हैं। जो लोग उन्हें जानते है वह कहते हैं कि अनिल और अधिक धार्मिक हो गए हैं और अपनी मां के साथ हिंदू धार्मिक स्थलों पर मत्था टेक रहे हैं। दोस्तों को बताते हैं कि भौतिक सफलता, आध्यात्मिक उन्नति की तुलना में खोखला है। 

अनिल अभी भी चीजों को ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं। और इसके लिए दिन में 14 घंटे काम कर रहे हैं ताकि कंपनियों को बचाया जा सके और अपनी शेष संपत्ति की रक्षा की जा सके। स्थिति की जानकारी रखने वाले व्यक्ति के मुताबिक अनिल को दिवालिया घोषित करने और नई शुरुआत करने की सलाह दी गई है। लेकिन अनिल ने इससे इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि इससे कमबैक का अवसर हाथ से निकल जायेगा। 

साल 2019 मार्च में मुकेश अंबानी के बेटे आकाश अंबानी की श्लोका मेहता के साथ संपन्न हुई शादी इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा गई। यह एक ऐसी शादी थी, जिसे बड़े-बड़े पंडित हमेशा याद करते रहेंगे। शादी के रस्मों की शुरुआत स्विस एल्प में हुई, जिसमें देश-विदेश के चुनिंदा मेहमान अपने निजी विमान से सेंट मोर्टिज पहुंचे। उन्होंने इस शादी के जोड़े को अपना आशीर्वाद प्रदान कर इसे यादगार बना दिया। इसके बाद सभी मेहमान वापस मुंबई आए और तीन दिनों तक ग्रैंड रिसेप्शन चला। इसमें अंबानी परिवार से संबंधित देश भर के सभी शुभचिंतकों ने शिरकत की और वर वधू को आशीर्वाद दिया। 

बाद में इस शानदार शादी की चर्चाएं अखबारों की सुर्खियां बनीं। रिसेप्शन के दौरान विशेष रूप से कारीगर द्वारा डिजाइन की गई मोर की मूर्ति लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रही। इन सबके अलावा कन्वेंशन सेंटर के बीचों बीच भगवान कृष्ण की विशालकाय मूर्ति मानो सभी को अपने वश में कर लिया था। 

शादी इतनी महंगी थी कि इसका खर्च अरबों डॉलर में था। मुकेश अंबानी जैसे समृद्ध शख्सियत के लिए यह पॉकेट खर्च जैसा था। बता दें कि मुकेश अंबानी रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन हैं, जो ऑयल रिफाइनरी, केमिकल प्लांट, सुपर मार्केट, और एशिया के सबसे बड़े मोबाइल नेटवर्क जियो को कंट्रोल करते हैं। ब्लूमबर्ग की अरबपतियों के इंडेक्स के अनुसार मुकेश अंबानी की कुल व्यक्तिगत संपत्ति 82 अरब डॉलर है, जो उन्हें एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति होने का गौरव प्रदान करती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद शायद उन्हें भारत का सबसे पावरफुल नागरिक होने का टैग भी लग जाता है। 

जैसे ही शादी की शुरुआत हुई, मुकेश के छोटे भाई अनिल अंबानी भी मेहमानों की आवभगत के लिए शादी समारोह में पधारे। पूरे आत्मविश्वास के साथ छोटे भाई ने पारिवारिक कर्तव्यों को पूरा किया। इससे उपस्थित मेहमान भी संतुष्ट नजर आए। अनिल अंबानी ने आकाश को कुछ टिप्स भी दिए कि शादी और अन्य समारोह के दौरान उन्हें कैसे पेश आना है। यह शादी उस समय हो रही थी, जब दस दिन बाद अनिल अंबानी को अदालत में मुकदमा हारने के बाद 80 मिलियन डॉलर का कर्ज चुकाने का आदेश दिया गया था। यह भी तय था कि अगर वह तय समय पर ऐसा करने में असफल रहते हैं तो उन्हें जेल भी हो सकती है। 

यह किसी भी भारतीय बिजनेस समुदाय के खिलाफ सबसे बड़ा जुर्माना माना जा रहा था। इसी दौरान काफी हफ्तों तक मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी की आपस में चर्चा चल रही थी कि इससे कैसे निपटा जाए। अंत में दोनों की माता कोकिलाबेन ने दखल दिया और बड़े भाई से बोला कि इसका कोई ऐसा अंतिम हल निकाल लिया जाए जिससे दोनों भाइयों और अंबानी परिवार की साख पर कोई आंच न आए। परंतु मुकेश अपने कर्जदार भाई को जेल से बचाने के मूड में नहीं दिख रहे थे। क्योंकि इसके बदले में अनिल ने कोई कोलैटरल नहीं दी थी। 

दोनों भाइयों के बीच में हुई अंतिम क्षण की बातचीत भारतीय बिजनेस की दुनिया के इतिहास में एक परिवार से बिखराव और उससे बचने के तौर पर याद किया जाएगा। अंबानी भाइयों ने अपने कैरियर की शुरुआत आपस में एक दूसरे का सहयोगी बनकर की थी। जिसे कभी अनिल अंबानी ने एक विचार और दो शरीर का नाम दिया था। लेकिन धीरूभाई अंबानी की मौत के बाद दोनों भाइयों के बीच में दरार बढ़ती गई। 

पहले तो इन दोनों ने अपने-अपने बिजनेस साम्राज्य को अलग कर लिया और बाद में एक दूसरे के व्यापारिक दुश्मन भी बन गए। तब से इन दोनों भाइयों के बीच दुश्मनी भारत की अर्थव्यवस्था के इतिहास में कभी न भूलनेवाला अध्याय बन चुका है। 

हिंदू राष्ट्रवाद के नेता के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2014 में देश की बागडोर संभालने के बाद मुकेश अंबानी के फारच्यून में अचानक वृद्धि होने लगी। जबकि अन्य उद्योगपतियों जिसमें अनिल अंबानी भी शामिल थे, उनकी परिसंपत्तियों और व्यवसायों में गिरावट आने लगी।  

बहरहाल अदालत की तारीख आते-आते तक दोनों भाइयों के बीच में कोई सुलह नहीं हो पाई थी। हालांकि अंबानी परिवार को नजदीक से जानने वाले लोग यही कहते रहे कि दोनों भाइयों के बीच बातचीत स्वच्छ वातावरण में हो रही है, परंतु उद्योग जगत के नजदीकी सूत्रों की माने तो ऐसा कुछ नहीं था। बाद में अनिल अंबानी को मुकेश अंबानी के समक्ष मदद मांगनी पड़ी। 

बिजनेस वर्ल्ड में धीरूभाई या धीरजलाल को शुरुआत में सिर्फ एक फैक्टरी के ऑपरेटर के तौर पर जाना जाता था। 1990 के पहले तक भारत की कंपनियों में तथा कथित लाइसेंस राज का खौंफ छाया हुआ था। इसके अतिरिक्त इंपोर्ट में कोटा, परमिट की जरूरतें और कीमत नियंत्रण जैसे फैक्टर अर्थव्यवस्था को अपनी गिरफ्त में लेकर बैठे हुए थे। धीरूभाई में सबसे खास बात यह थी कि वह लोगों से हमेशा एक कदम आगे की सोचते थे। 

रिलायंस में शुरुआती दिनों में काम कर चुके लोगों के अनुसार धीरूभाई ने दिल्ली के बाहर ऑफिस बिल्डिंग बनाई जिसमें उ्न्होंने रिटायर हो चुके ब्यूरोक्रेट को काम पर रखा। उन्होंने बड़े बड़े अधिकारियों के बच्चों को ट्रेस किया, ताकि उन्हें रिलायंस द्वारा फंड की गई स्कॉलरशिप देकर उन्हें विदेशों में पढ़ाई के लिए भेजा जा सके। 

रिलायंस के एक पूर्व कर्मचारी ने बताया कि दिवाली के समय चुनिंदा मंत्रालयों के बाबुओं को मिठाई के डिब्बे और उसके साथ सोने और चांदी के सिक्के भेजने की प्रथा की शुरुआत तभी से हुई थी। इससे वे लोगों को ऑबलाइज कर यह जान लेते थे कि उनके वरिष्ठ बाबू किस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। या उनके मन में क्या चल रहा है। मुकेश अंबानी 1957 में और अनिल अंबानी 1959 में पैदा हुए थे। और उनकी परवरिश करने में धीरूभाई ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी और बचपन से ही उनमें व्यापार की दुनिया में सफल रहने का बीजमंत्र बोया। 

अनिल अंबानी ने बताया था कि हफ्ते के अंतिम दिनों में उनके पापा दोनों भाइयों को कहीं बाहर ले जा कर ऐसा काम करने को बोलते थे जिसे करने पर कुछ न कुछ इंसेंटिव मिलता रहता था। 

शुरुआत से ही किसी को भी शक नहीं था कि यही दोनों भाई आगे चलकर रिलायंस का फैमिली बिजनेस संभालेंगे। और यही हुआ भी। 25 साल की उम्र के आस पास ही दोनों भाइयों ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं संभाल लीं। मुकेश को रिलायंस की फैसिलिटीज में मैनेजर की जिम्मेदारी दी गई। जबकि अनिल अंबानी को सरकारी अधिकारियों निवेशकों और प्रेस से डील करन का जिम्मा दिया गया। दोनों की भूमिकाएं उनके व्यक्तित्व के मुताबिक थीं। मुकेश हमेशा से बिना इन किए हुए शर्ट पहनते थे और उनकी शादी भी 27 साल की उम्र में उनके पिता द्वारा चुनी हुई पुत्रबहु से कर दी गई। 

शुरुआत के दिनों में वे ज्यादातर शाम को घर पर पुराने हिंदी सिनेमा देखते थे। जबकि अनिल अंबानी बन ठन कर अच्छे खासे शूट में और अच्छी हेयर स्टाइल में रहते थे। जो कि किसी भी बंबई के भीड़ का आसानी से हिस्सा बन जाते थे। और साथ ही साथ उनकी दोस्ती बालीवुड के दिग्गजों से भी होने लगी। वे कभी-कभी अपने कॉरपोरेट जेट में लिफ्ट दे दिया करते थे। अनिल अंबानी ने जब 31 साल की उम्र मे अपनी शादी टीना से की तो उनके माता पिता ने सार्वजनिक रूप से इस शादी पर नाराजगी जता दी थी। 

एक तरफ मुकेश अंबानी जहां सार्वजनिक कार्यक्रम में बहुत ही कम देखे जाते थे, वहीं दूसरी ओर अनिल अंबानी लगभग हर साल रिलायंस के हेडक्वार्टर में पत्रकारों के साथ जुटे रहते थे। या अपनी कंपनी के दशा और दिशा की चर्चा किसी चौराहे पर कोई चाट खाते हुए बातचीत करते हुए तय करते थे। 

2001 आते-आते रिलायंस सभी मायने में कॉर्पोरेट जगत की एक बड़ी हस्ती बन चुकी थी और इसका फैलाव फाइनेंशियल सर्विसेस, इलेक्ट्रिसिटी जनरेशन और टेलीकम्युनिकेशन के साथ साथ ऑयल रिफाइनिंग के ऑपरेशन में इतना ज्यादा हो चुका था कि इसका सीधा असर नेशनल ट्रेड डेफिसिट पर पड़ने लगा। दोनों अंबानी बंधुओं के बीच तनानती या मनमुटाव की खबरें उनके पिता के जीवित रहने तक दबी रही। परंतु साल 2002 में 69 साल की उम्र में धीरूभाई की अचानक मौत ने आनेवाले दिनों की आहट दे दी थी। क्योंकि वे अपना उत्तराधिकारी किसे चुनेंगे, इस पर कोई फैसला नहीं किया था। लोगों को भी नहीं पता था कि धीरूभाई के दिल में क्या था। 

दोनों बंधुओं ने उम्र को मानक बनाया और इसके हिसाब से मुकेश रिलायंस का चेयरमैन और अनिल वाइस चेयरमैन बने। धीरे-धीरे इन दोनों में दरार बढ़ती गई। हर एक दूसरे को ऐसा लगा कि दोनों अपने अपने स्तर पर स्वतंत्र फैसले ले रहे हैं। मुकेश को सबसे ज्यादा गुस्सा तब आया था, जब अनिल अंबानी ने बिना उनसे सलाह मशविरा किए पावर जनरेशन प्रोजेक्ट की घोषणा कर दी। अनिल अंबनी को तब गुस्सा आया था जब मुकेश अंबानी बिना कुछ बताए रिलायंस के शेयरों में परिवार की हिस्सेदारी और उसके प्रबंधन में रीस्ट्रक्चरिंग कर दी। मुकेश अपने आप को एक निर्विवाद बॉश मानने लगे थे। जबकि अनिल खुद को किसी से कम नहीं समझते थे। 

दोनों भाइयों में दरार धीरूभाई की मौत के दो साल बाद सार्वजनिक हुई जब रिलायंस के बोर्ड ने एक मोशंस पास किया। इसमें कहा गया था कि अनिल अंबानी अब सारा कामकाज चेयरमैन की अथॉरिटी के अंतर्गत करेंगे। अनिल से जुडे व्यवसायिक दोस्तों के अनुसार अनिल को यह बात अखर गई। उन्होंने इसे अपना अपमान समझा। इससे एक तरह का अंबानी परिवार में सिविल वार शुरू हो गया। 

एक बार तो अनिल अंबानी ने रिलायंस के फाइनेंशियल स्टेटमेंट पर यह कहकर दस्तखत करने से मना कर दिया कि इसमें सारे खुलासे आधे-अधूरे हैं। एक समय तो ऐसा आया कि भारत के वित्तमंत्री को यह अपील करनी पड़ी कि दोनों भाई आपस के मतभेद सुलझा लें। जब बात हद से गुजर गई तो परिवार की मुखिया कोकिलाबेन बीच बचाव को उतरी। 2005 में एक स्टेटमेंट जारी कर उन्होंने कहा कि दोनों भाइयों ने आपसी सहमति से पारिवारिक और व्यवसायिक दायित्वों की पूर्ति के लिए मामला सुलझा लिया है। 

फोर्ब्स इडिया की 2007 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार अनिल का नेटवर्थ तीन गुना बढ़कर 45 बिलियन अरब डॉलर हो गया जिससे वे देश के तीसरे अमीर नागरिक बन गए। जबकि उसी समय उनके भाई मुकेश का नेटवर्थ 49 बिलियन डॉलर था। अपने हाथ में इतना पैसा आया देख अनिल ने फिल्म प्रोडक्शन में भी हाथ आजमाया, जिसमें उन्होंने स्टीवन स्पीलबबर्ग को सपोर्ट किया।  

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