29 हजार करोड़ रुपए के IPO की तैयारी, अडाणी एयरपोर्ट होगी लिस्ट

मुंबई– एशिया के दूसरे और विश्व के 14 वें सबसे अमीर बिजनेसमैन गौतम अडाणी एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार उनकी बड़ी योजना है। खबर है कि वे अपनी ग्रुप कंपनी अडाणी एयरपोर्ट को शेयर बाजार में लिस्ट कराएंगे। इसके जरिए वे 25 से 29 हजार करोड़ रुपए की भारी-भरकम रकम जुटाएंगे।

फिलहाल अडाणी ग्रुप की कुल 6 कंपनियां लिस्ट हैं। इनका मार्केट कैपिटलाइजेशन 8.50 लाख करोड़ रुपए है। मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से अडाणी ग्रीन एनर्जी है। इसका मार्केट कैप 1.93 लाख करोड़ रुपए है। पिछले हफ्ते यह 2 लाख करोड़ रुपए था। कंपनी की योजना अडाणी एयरपोर्ट होल्डिंग को ग्रुप की अलग एयरपोर्ट बिजनेस वाली होल्डिंग कंपनी बनाना है। 

दरअसल अडाणी भारत का इंफ्रा किंग बनना चाहते हैं। उनकी ज्यादातर कंपनियां इसी सेक्टर में काम करती हैं। कोयले के बिजनेस से लेकर खनन, पोर्ट और पावर प्लांट में उनकी कंपनियां अच्छा खासा बिजनेस कर रही हैं। अब नए बिजनेस उनकी नजर में एयरपोर्ट के अलावा रक्षा और डाटा सेंटर पर है।  

साल 2019 में अडाणी एयरपोर्ट ने एयरपोर्ट बिजनेस में प्रवेश किया था। इसे देश में कुल 6 एयरपोर्ट 50 सालों के लिए अलॉट हुए थे। इसमें लखनऊ, मंगलुरू, जयपुर, गोवाहाटी, तिरुअनंतपुरम और उनके खुद के राज्य गुजरात का अहमदाबाद एयरपोर्ट था। इसके अलावा उनकी मुंबई एयरपोर्ट में भी हिस्सेदारी है। मुंबई एयरपोर्ट देश का दूसरा सबसे व्यस्ततम एयरपोर्ट है। इसमें 74% उनकी हिस्सेदारी है। इससे नई मुंबई में बनने वाले नए एयरपोर्ट में भी उनकी हिस्सेदारी तय हो चुकी है। बहुत ही कम समय में अडाणी ग्रुप ने एयरपोर्ट बिजनेस में देश में अपनी पैठ बना ली है। भारत के एयर ट्रैवेल के यात्रियों के मामले में उनकी करीबन 10% हिस्सेदारी है।  

हाल में अडाणी ने अपनी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर टॉप वैश्विक निवेशकों से अच्छी खासी रकम जुटाई है। इसमें अडाणी ग्रीन एनर्जी, अडाणी पावर ट्रांसमिशन, अडाणी टोटल गैस आदि हैं। टोटल कंपनी फ्रांस की है जो गैस बिजनेस में अडाणी के साथ है।  

अडाणी के फोकस में एयरपोर्ट नया बिजनेस नहीं है। वे ग्रुप के रिनूएबल एनर्जी पर भी फोकस कर रहे हैं। उनका लक्ष्य साल 2025 तक इसमें 8 गुना इजाफा करने का है। ऐसा इसलिए क्योंकि मोदी सरकार इस समय इसी सेक्टर पर फोकस कर रही है। अडाणी ग्रुप में जो बढ़त दिखी है, वह इसलिए क्योंकि ग्रुप पूरी तरह से मोदी की योजनाओं पर काम कर रहा है। मोदी और अडाणी एक ही राज्य से आते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नजदीकियों के कारण अडाणी हमेशा विपक्ष के निशाने पर भी रहे हैं। अदाणी की नेटवर्थ बढ़ाने में ग्रुप के एनर्जी सेक्टर और उसमें भी रिन्युएबल कंपनी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। बिजनेस के नजरिए से सरकार की कई पॉलिसी अदाणी ग्रुप के अनुकूल रही हैं। 

1980 में कमोडिटी का बिजनेस शुरू करने वाले गौतम अडाणी दुनिया में तब चर्चा में आए, जब वे ऑस्ट्रेलिया में 2010 में कोयला प्रोजेक्ट को जीतने में कामयाब रहे। हालांकि यह प्रोजेक्ट पर्यावरणवादियों के निशाने पर है। देश का सबसे बड़ा बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) अभी तक इसे लोन देने से कतरा रहा है। यही कारण है कि यह प्रोजेक्ट अभी भी फंसा हुआ है। ऑस्ट्रेलिया के कोयला प्लांट के लिए अडाणी 86 कंपनियों के टेंडर में से एक चुने गए थे।  

अडाणी समूह पर कुल 1.47 लाख करोड़ रुपए का बैंकों का और अन्य कंपनियों का कर्ज है। इस चालू वर्ष यानी अप्रैल से मार्च 2022 तक कंपनी 12 हजार करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखी है और इसे एयरपोर्ट बिजनेस में खर्च करेगी। अगले 3-5 सालों में कंपनी 30 हजार करोड़ रुपए एयरपोर्ट बिजनेस पर निवेश करेगी। इससे उसके ऊपर कर्ज बढ़ कर 21 हजार करोड़ रुपए हो जाएगा। 

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