कंपनियों ने वैक्सीन सप्लाई के खूब वादे किए, पर वादे नहीं हुए पूरे

मुंबई– दुनिया भर में बांग्लादेश से लेकर नेपाल, रवांडा तक कोरोना के हॉटस्पॉट बन चुके हैं। अब दिक्कत यह है कि वहां टीकाकरण के कार्यक्रम रुक गए हैं। क्योंकि उनको वैक्सीन की आपूर्ति ही नहीं हो पा रही है। इसके पीछे देखें तो 10 सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा सप्लाई की जाने वाली वैक्सीन में भारी कमी आई है। कंपनी ने दावा तो बहुत बड़ा-बड़ा किया, पर दावा खोखला साबित हो गया है। 

दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन बनाने वाली कंपनी सीरम को पिछले साल विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने को-वैक्सीन के टॉप सप्लायर के रूप में घोषित किया था। WHO ने कहा था कि यह विश्व के कई देशों में सीरम वैक्सीन की आपूर्ति करेगी। परंतु जिस तरह से इस भारतीय कंपनी को घर में ही झटका लगा है, उससे सप्लाई ठप हो गई है। इसकी फैक्ट्री में आग लगी फिर बाद में इसके एक्सपोर्ट को प्रतिबंधित कर दिया गया। इससे विश्व के अन्य देशों में हो रही वैक्सीन की आपूर्ति को बड़ा झटका लगा है।  

टीके का उत्पादन करने वाली इस कंपनी ने कुल 92 देशों को टीका सप्लाई करने का वादा किया था। लेकिन अभी तक 20 करोड़ डोज में सिर्फ तीन करोड़ डोज की ही सप्लाई सीरम कर सकी है। सीरम की ओर से यह विफलता यह दर्शाती है कि सिर्फ एक वैक्सीन निर्माता पर निर्भरता से गरीब देशों का टीकाकरण कार्यक्रम किस तरह से बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।  

वैक्सीन की सप्लाई की दिक्कत ऐसे समय में सामने आई है जब वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन तथा दुनिया भर के पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि गरीब देशों में टीकाकरण की धीमी गति से कोरोना के अलग और खतरनाक वेरिएंट सामने आ सकते हैं। इससे वैश्विक महामारी और लंबी खिंच सकती है।  

हालांकि वैक्सीन की सप्लाई में विफलता सिर्फ सीरम की तरफ से ही नहीं, बल्कि अन्य वैक्सीन मैन्युफैक्चरर्स की तरफ से भी आ रही है। पर जिस तरह गरीब देश प्रभावित हैं और सीरम ने काफी देशों को वैक्सीन सप्लाई का वादा किया था उससे टीकाकरण की लड़ाई कमजोर पड़ती दिख रही है 

जो जानकारी सामने आई है उससे पता चल रहा है कि अप्रैल महीने के बाद से सीरम ने कोई भी टीका विदेशों में नहीं भेजा है। क्योंकि भारत सरकार ने इसके टीकों के एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध लगा दिया। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत में दूसरी लहर काफी भयानक हो चली थी। इसके अलावा सीरम की कुछ और दिक्कतें हैं जो काफी पहले से ही चली आ रही थी।  

पिछले साल सीरम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अदार पूनावाला ने वादा किया था कि उनकी कंपनी साल 2020 के अंत तक एस्ट्राजेनेका के 40 करोड़ डोज गरीब देशों को सप्लाई करेगी। फिर साल 2021 की शुरुआत में इस कंपनी ने कहा कि इसने अब तक सिर्फ 7 करोड़ डोज ही बनाए हैं। क्योंकि कंपनी को यह नहीं बताया गया था कि भारत में इसे लाइसेंस कब मिलेगा। इसके अलावा कंपनी ने यह भी कहा कि इसके पास पर्याप्त वेयरहाउस की जगह नहीं थी।  

सीरम से कुछ देशों ने डायरेक्ट सप्लाई का एग्रीमेंट भी किया था पर अब वह नए सप्लायर ढूंढने में लग गए हैं। नेपाल जैसा देश जो करुणा के कहर से दबा पड़ा है और यहां तक कि माउंट एवरेस्ट पर भी यह संक्रमण फैल चुका है, इसे भी सीरम वैक्सीन की सप्लाई नहीं कर पाया। नेपाल ने कहा है कि उसे अब तक 20 लाख डोज में से सिर्फ 10 लाख डोज ही मिले हैं जब की पूरी 20 लाख डोज की सप्लाई मार्च तक की जानी थी।  

नेपाल के हेल्थ मिनिस्ट्री में वेल्फेयर डिवीजन के डायरेक्टर तारा नाथ पोखरेल ने कहा कि हम वैक्सीन की कमी की समस्या से जूझ रहे हैं। कुल 2.8 करोड़ की आबादी वाले नेपाल ने कहा है कि इसे अब तक महज 24 लाख डोज ही मिल सके हैं, इसमें से 10 लाख सीरम ने डायरेक्ट सप्लाई किया है जबकि 10 लाख डोज भारत सरकार से कोवैक्स की तरफ से ग्रांट में मिला है।  

हाल ही में सीरम ने कहा था कि साल 2021 के पहले वैक्सीन को निर्यात किए जाने की संभावनाएं बहुत कम है क्योंकि इसकी पहली प्राथमिकता भारत को टीके की आपूर्ति करना है। परंतु जहां तक विश्व के अन्य गरीब देशों की बात है वह अभी भी वैक्सीन के लिए छटपटा रहे हैं। बांग्लादेश ने तो वैक्सीन का पहला डोज देने का अभियान ही बंद कर दिया है क्योंकि सीरम की तरफ से सप्लाई रूक गई है।  

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