DHFL में निवेशकों की दिलचस्पी, 1 हफ्ते में 30% बढ़ा शेयर, बेचने वाले कोई नहीं

मुंबई– दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (DHFL) के शेयरों में अचानक खरीदारी बढ़ गई है। 1 हफ्ते में इसके शेयर में 30% की तेजी देखी गई है। आज यह 9.86% बढ़कर अपर सर्किट के साथ 22.85 रुपए पर कारोबार कर रहा है। जबकि कंपनी का अभी मूल्य जीरो है। अपर सर्किट का मतलब एक दिन में उससे ज्यादा शेयर की कीमत नहीं बढ़ेगी। 

दरअसल पीरामल इंटरप्राइजेज ने DHFL को खरीदा है। कर्ज से दबी इस कंपनी को रिजोल्यूशन प्लान के तहत मंजूरी भी मिल गई है। यही कारण है कि अचानक निवेशकों ने इसमें खरीदारी शुरू कर दी है। यह ठीक उसी तरह है जिस तरह से जेट एयरवेज का शेयर 14 रुपए से 163 रुपए तक पहुंच गया था। हालांकि जेट एयरवेज में अभी कोई फैसला नहीं हो पाया है, पर DHFL को पीरामल के खरीदने पर फैसला हो चुका है।  

1 महीने में DHFL का शेयर 55% से ज्यादा बढ़ चुका है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT)  के मंजूर रिजोल्यूशन प्लान के मुताबिक, पीरामल कैपिटल DHFL के शेयरों को स्टॉक एक्सचेंज से डिलिस्ट कर सकती है। क्योंकि इंडियन बैंकरप्सी कोड और सेबी के डिलिस्टिंग नियमों के तहत उसे ऐसा करना होगा। हालांकि जानकारों का कहना है कि इस कंपनी में निवेश पर निवेशकों को घाटा ही हो सकता है।  

जब भी रिजोल्यूशन प्लान लागू होगा, कंपनी को DHFL को मर्ज करना होगा। साथ ही उसे रेगुलेटर से पूरी मंजूरी लेनी होगी। रिजर्व बैंक और प्रतिस्पर्धा आयोग ने पहले ही हालांकि इस रिजोल्यूशन प्लान को मंजूरी दे दी है। बाजार के जानकार कहते हैं कि आगे चलकर इस शेयर की कीमत जीरो हो जाएगी। क्योंकि जब कंपनी इंसॉल्वेंट बन जाएगी तो अभी की जो पूंजी है वह रिटेन ऑफ यानी जीरो हो जाएगी।  

ऐसे में अभी के शेयर धारक जो हैं, उनका पैसा इसमें फंस सकता है। उन्हें कुछ भी नहीं मिलेगा। इस तरह के पहले के तमाम मामलों में भी निवेशकों ने हाथ जलाए हैं। हालांकि कुछ मामलों में निवेशकों को अच्छा खासा लाभ भी हुआ है। नया मैनेजमेंट इस तरह के मामलों में यह सोच सकता है कि वह अभी के निवेशकों को कुछ दे भी दे। पर यह उसके ऊपर है। चूंकि फाइनेंशियल कंपनियों के पास कोई बहुत ज्यादा फिजिकल संपत्तियां नहीं होती हैं, इसलिए ऐसे मामलों में बहुत ज्यादा संभावना नहीं होती है।  

DHFL एक फाइनेंशियल कंपनी है और यह दिवालिया हो चुकी थी। इसके प्रमोटर वधावन परिवार ने नियमों से अलग जाकर लोन बांटा और कंपनी फंस गई। पीरामल ग्रुप ने इसे 37,250 करोड़ रुपए में खरीदा था। इसके उधार देने वालों में यूनियन बैंक ने इसी साल जनवरी में पीरामल कैपिटल को मंजूरी दे दी थी। यूनियन बैंक लीड बैंक था।   

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