इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने में देरी हुई तो दोगुना जुर्माना लगेगा

मुंबई– सरकार ने इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल नहीं करने वालों के लिए नियम सख्त किया है। इसके तहत अब ITR फाइल नहीं करने पर दोगुना TDS देना होगा। नए नियमों के मुताबिक, जिन लोगों ने ITR फाइल नहीं किया है, उन पर टैक्स कलेक्शन ऐट सोर्स (TCS) भी ज्यादा लगेगा। नए नियमों के मुताबिक 1 जुलाई 2021 से पीनल TDS और TCS दरें 10-20% होंगी जो कि आमतौर पर 5-10% होती हैं। 

नए TDS नियमों के मुताबिक इनकम टैक्स एक्ट 1961 के सेक्शन 206AB के तहत आयकर कानून के मौजूदा प्रावधानों के दोगुना या प्रचलित दर के दोगुने में या फिर 5% में से जो भी ज्यादा होगा उस हिसाब से टीडीएस लग सकता है। TCS के लिए भी मौजूदा प्रावधानों के मुताबिक प्रचलित दर या 5% में से जो भी ज्यादा होगा उसके हिसाब से यह देय होगा। 

आयकर कानून का यह (सेक्शन 206AB) नियम सैलरी, कर्मचारियों के बकाये के भुगतान, क्रॉस वर्ड और लॉटरी में जीती गई रकम, हॉर्स रेस पर जीती गई रकम, सिक्योरिटाइजेशन ट्रस्ट में निवेश से हासिल आय और कैश विड्रॉल पर लागू नहीं होगा। सेक्शन 206AB के तहत भारत में स्थायी प्रतिष्ठान न रखने वाले नॉन रेजिडेंट टैक्सपेयर पर भी यह लागू नहीं होगा। 

अगर दोनों सेक्शन 206AA (पैन न रहने की स्थिति में ज्यादा टीडीएस रेट) और 206AB लागू होता है तो टीडीएस रेट ऊपर बताई दरों से ज्यादा होगी। वहीं सेक्शन 206CC और 206CCA के तहत ज्यादा TCS लागू होगा। 

वित्त वर्ष 2020-21 के इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई से बढ़ाकर 30 सितंबर कर दी गई है। कोरोना संक्रमण के चलते सरकार ने टैक्स फाइल करने से संबंधित तारीखों को बढ़ाने का फैसला लिया है। 

अगर किसी की कोई आय होती है तो उस आय से टैक्स काटकर अगर व्यक्ति को बाकी रकम दी जाए तो टैक्स के रूप में काटी गई रकम को टीडीएस कहते हैं। सरकार टीडीएस के जरिए टैक्स जुटाती है। यह अलग-अलग तरह के आय स्रोतों पर काटा जाता है जैसे सैलरी, किसी निवेश पर मिले ब्याज या कमीशन आदि पर। कोई भी संस्थान (जो टीडीएस के दायरे में आता है) जो भुगतान कर रहा है, वह एक निश्चित रकम टीडीएस के रूप में काटता है। 

TCS टैक्स कलेक्टेड ऐट सोर्स होता है। इसका मतलब स्रोत पर एकत्रित टैक्स (इनकम से इकट्ठा किया गया टैक्स) होता है। TCS का भुगतान सेलर, डीलर, वेंडर, दुकानदार की तरफ से किया जाता है। हालांकि, वह कोई भी सामान बेचते हुए खरीदार या ग्राहक से वो वसूलता है। वसूलने के बाद इसे जमा करने का काम सेलर या दुकानदार का ही होता है। कुछ खास तरह की वस्‍तुओं के विक्रेता ही इसे कलेक्‍ट करते हैं।  

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