सेंट्रल बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक हो सकते हैं प्राइवेट, शेयरों में 12% का उछाल

मुंबई– दो सरकारी बैंक प्राइवेट बैंक बन सकते हैँ। इसमें सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन ओवरसीज का नाम शामिल है। इस खबर से इन बैंको दे शेयरों में आज जबरदस्त उछाल दिखा है। दोनों के शेयरों में 6 से 12% की तेजी दिखी है।  

दरअसल इस साल के बजट में सरकार ने दो सरकारी बैंकों को प्राइवेट बनाने की घोषणा की थी। इस संबंध में हालांकि कुछ दिन पहले 4 बैंकों के नाम आए थे। इसमें बैंक ऑफ महाराष्ट्र, सेंट्रल बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक और बैंक ऑफ इंडिया का नाम था। उस समय इन बैंकों के शेयरों में तीन दिन तक 10-20% तक की तेजी दिखी थी। इसमें से दो बैंकों के नाम आज फिर सामने आए हैं।  

सूत्रों के मुताबिक सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग ने इन दोनों बैंकों के नाम को चुना है। हालांकि बैंक ऑफ इंडिया अभी भी संभावित नामों की सूची में है। नीति आयोग ने इन दोनों सरकारी बैंकों और एक जनरल बीमा कंपनी का नाम विनिवेश की कमिटी के सचिवालय को भेज दिया है। इन सभी को इसी वित्तवर्ष के अंत तक प्राइवेट किया जाएगा।  

केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष में सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेच कर 1.75 लाख करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही एयर इंडिया, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया को भी प्राइवेट करने का लक्ष्य रखा गया है। पर अभी तक इसमें सफलता नहीं मिल पाई है। एयर इंडिया जहां भारी-भरकम कर्ज और घाटे वाली कंपनी है, वहीं शिपिंग कॉर्पोरेशन और भारत पेट्रोलियम लगातार मुनाफा देने वाली कंपनियां हैं।  

सेंट्रल बैंक का शेयर आज BSE पर 12% बढ़ कर 23.70 रुपए पर पहुंच गया जबकि इंडियन ओवरसीज बैंक का शेयर 6% उछलकर 20.35 रुपए पर पहुंच गया। बैंक ऑफ महाराष्ट्र का शेयर 4% ऊपर कारोबार कर रहा था।  

अकाउंट होल्डर्स का जो भी पैसा इन 4 बैंकों में जमा है, उस पर कोई खतरा नहीं है। खाता रखने वालों को फायदा ये होगा कि प्राइवेटाइजेशन के बाद उन्हें डिपॉजिट्स, लोन जैसी बैंकिंग सर्विसेज पहले के मुकाबले बेहतर तरीके से मिल सकेंगीं। एक जोखिम यह रहेगा कि कुछ मामलों में उन्हें ज्यादा चार्ज देना होगा। उदाहरण के लिए सरकारी बैंकों के बचत खातों में अभी एक हजार रुपए का मिनिमम बैलेंस रखना होता है। कुछ प्राइवेट बैंकों में मिनिमम बैलेंस की जरूरी रकम बढ़कर 10 हजार रुपए हो जाती है। 

सत्ता में आने वाले राजनीतिक दल सरकारी बैंकों को निजी बैंक बनाने से बचते रहे हैं, क्योंकि इससे लाखों कर्मचारियों की नौकरियों पर भी खतरा रहता है। हालांकि, मौजूदा सरकार पहले ही कह चुकी है कि बैंकों को मर्ज करने या प्राइवेटाइजेशन की स्थिति में कर्मचारियों की नौकरी नहीं जाएगी। बैंक ऑफ इंडिया के पास 50 हजार कर्मचारी हैं, जबकि सेंट्रल बैंक में 33 हजार कर्मचारी हैं। इंडियन ओवरसीज बैंक में 26 हजार और बैंक ऑफ महाराष्ट्र में 13 हजार कर्मचारी हैं। इस तरह कुल मिलाकर एक लाख से ज्यादा कर्मचारी इन चारों सरकारी बैंकों में हैं।  

सेंट्रल बैंक 1911 में बना था। इसकी कुल 4,969 शाखाएं हैं। इंडियन ओवरसीज बैंक की स्थापना 10 फरवरी 1937 को हुई थी। इसकी कुल 3800 शाखाएं हैं। अभी कुल 12 सरकारी बैंक हैं। इनमें से 4 के प्राइवेट हो जाने के बाद 8 सरकारी बैंक बचेंगे। 1. बैंक ऑफ बड़ौदा 2. बैंक ऑफ इंडिया 3. बैंक ऑफ महाराष्ट्र 4. केनरा बैंक 5. सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया 6. इंडियन बैंक 7. इंडियन ओवरसीज बैंक 8. पंजाब नेशनल बैंक 9. पंजाब एंड सिंध बैंक 10. यूनियन बैंक ऑफ इंडिया 11. यूको बैंक 12. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया 

बैंक ऑफ महाराष्ट्र, सेंट्रल बैंक में शेयर 51% पर लाने पर मिलेंगे 6,400 करोड़ 

फिलहाल यह तय नहीं है कि क्या सरकार BOI और IOB दोनों में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचेगी। केयर के एनालिसिस के मुताबिक अगर सरकार दोनों बैंकों में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 51% पर ले आती है तो इससे उसके खजाने में 12,800 करोड़ रुपए आएंगे। अगर सरकार बैंक ऑफ महाराष्ट्र (BOM) और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (CBI) में भी अपनी हिस्सेदारी घटाकर 51% पर ले आती है तो दोनों से लगभग 6,400 करोड़ रुपए मिलेंगे। IOB में सरकार की हिस्सेदारी 95.8%, BOM में 92.5%, CBI में 92.4% और BOI में 89.1% है। 

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