15 रुपए के शेयर की 90 हजार रुपए बोली लगी, बेचने वाला कोई नहीं

मुंबई– एक 15 रुपए के शेयर के लिए 90 हजार रुपए की बोली लगा दी गई है। फिर भी शेयर को बेचने वाला कोई नहीं है। हालांकि इस तरह के शेयरों में जोखिम भी जमकर होते हैं। हम बात कर रहे हैं एलसिड स्टॉक की। इस शेयर में कभी-कभार ही कारोबार होता है क्योंकि कोई शेयर नहीं बेचता है।  

इसकी कीमत 15.47 रुपए बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर है। पहले ही घंटे में इसके लिए BSE पर 15.18 लाख शेयरों के ऑर्डर खरीदी के आए हैं। इन लोगों ने इसके लिए 16 रुपए से ऊपर का ऑर्डर डाला हुआ है जबकि शेयर की कीमत अभी 15.47 रुपए है। बेचने वालों में कोई नहीं है। सब लोग खरीदी के लिए इंतजार कर रहे हैं।  

इसका एक साल का सबसे ज्यादा भाव 15.47 रुपए है जो आज है। जबकि सबसे कम भाव 9.09 रुपए है। यह 15 जून 2020 को था। मार्केट कैप महज 31 लाख रुपए है जबकि इसका अपर और लोअर सर्किट 4.95% का है। यानी एक दिन में यह शेयर न तो इससे ज्यादा गिर सकता है न बढ़ सकता है। एलसिड इंवेस्टमेंट्स एक अत्यधिक लिक्विड स्टॉक है जिसमें शायद ही कोई ट्रेड होता है। एक्सचेंज पर इसमें जुलाई 2011 के बाद से केवल 31 बार खरीदा और बेचा गया है। दरअसल इस शेयर की भविष्य में कीमतें इतनी ज्यादा बताई जा रही है कि कोई इसे बेचने को तैयार नहीं है। 

अंग्रेजी के एक बिजनेस अखबार में आज एक विज्ञापन आया है। इसमें अजय शाह नामक निवेशक ने कहा है कि वह इस 15 रुपए के शेयर को 90 हजार रुपए प्रति शेयर के हिसाब से कीमत देंगे। जिसके पास शेयर हो वो उनसे संपर्क कर सकता है। जानकार कहते हैं कि इस शेयर में सालों में एकाध बार एकाध शेयर बिकता है। इसमें डिलिवरी ही नहीं है। हालांकि इसके शेयरों की इतना मांग की जो वजह है वह कुछ और है।  

दरअसल इस कंपनी की एशियन पेंट्स में 2.95% की होल्डिंग है। यानी इसके पास एशियन पेंट्स के 2.83 करोड़ शेयर हैं। इसका वैल्यूएशन 7 हजार करोड़ रुपए से ऊपर है। पर इसी के आधार पर शेयर चलेगा, इसकी भी गारंटी नहीं है। पर ग्रे मार्केट और अनिस्टेड मार्केट में इस शेयर की जबरदस्त मांग है। पिछले 4 सालों में एकाध बार कारोबार इसमें हुआ है।  

इसकी वेबसाइट पर देखें तो पता चलता है कि यह एक गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी यानी NBFC है जो रिजर्व बैंक में रजिस्टर्ड है। यह मुंबई की कंपनी है। इसके कारोबार की बात करें मार्च 2019 में इसका फायदा 18 लाख रुपए का था। मार्च 2020 में 16 लाख रुपए का घाटा था। मार्च 2021 में इसे 18.47 लाख रुपए का फायदा हुआ था। इसमें मालिकों की हिस्सेदारी 74.98% है। आम जनता के पास 25.02% शेयर हैं। शेयरों की संख्या भी बहुत कम है।  

अक्टूबर 2016 के बाद से केवल 33 बार इसके शेयर में बदलाव हुआ है। 2021 में, इसमें आखिरी बार 28 जनवरी को कारोबार किया गया था। उस दिन महज एक शेयर का कारोबार हुआ था। इस कंपनी को 1981 में शुरू किया गया था। इसका मुख्य बिजनेस म्यूचुअल फंड, शेयरों और डिबेंचरों में निवेश करने का है। इसकी दो और कंपनियां हैं जो ट्रेडिंग और निवेश का काम करती हैं।  

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