हिंदू और मुस्लिम में कैसे तय होती है वसीयत और कौन हो सकता है संपत्ति का वारिस, जानिए क्या है नियम

मुंबई– वसीयत न होने से पूरा परिवार संपत्ति के बंटवारे को लेकर कानूनी पचड़ों में फंस जाता है। वसीयत न होने से संपत्ति का बंटवारा कानूनी आधार पर होता है। विल या वसीयत नहीं है तो संपत्ति का बंटवारा उसके धर्म के अनुसार लागू उत्तराधिकार संबंधी कानूनों के तहत होता है। हम आपको बता रहे हैं कि विल न होने पर संपत्ति पर किसका अधिकार रहता है। 

हिंदू, बौद्ध, जैन और सिखों के लिए हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 और हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2005 लागू हैं। अगर किसी हिंदू पुरुष की बिना वसीयत के मृत्यु हो जाती है, तो उसकी प्रॉपर्टी पर सबसे पहला हक क्लास 1 उत्तराधिकारियों का होगा। अगर वे नहीं हैं तो क्लास 2 उत्तराधिकारियों में प्रॉपर्टी बंटेगी। 

अगर कोई क्लास 1 या 2 उत्तराधिकारी नहीं है तो दूर का कोई रिश्तेदार, जिसका मृतक से खून का संबंध (ब्लड रिलेशनशिप) हो, इसका उत्तराधिकारी बनेगा। अगर यह भी नहीं है तो मृतक की प्रॉपर्टी सरकारी संपत्ति बन जाएगी। 

अगर हिंदू महिला की मौत बिना वसीयत के होती है तो उसकी संपत्ति पर सबसे पहला हक उसके बेटे, बेटियों और पति का होता। दूसरा पति के वारिसों का, तीसरा माता या पिता का, चौथा पिता के वारिसों का और इसके न होने पर माता के उत्तराधिकारी संपत्ति पर अपना हक जता सकते हैं। 

यदि किसी मुस्लिम व्यक्ति का निधन वसीयत के बिना हो जाता है तो उसके उत्तराधिकारियों का फैसला मुस्लिम पर्सनल लॉ के आधार पर होगा। यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह मुस्लिम धर्म के किस वर्ग से संबंधित हैं।  

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