बढ़ते कोरोना का असर, विदेशी ब्रोकरेज हाउसों ने घटाई भारत की विकास दर

मुंबई– लगातार बढ़ रहे कोरोना के मामले और लॉकडाउन की वजह से देश की विकास दर को लेकर विदेशी ब्रोकरेज हाउसों ने अपने अनुमान घटा दिए हैं। करीबन आधा दर्जन ब्रोकरेज हाउसों ने अपने पहले के अनुमान को घटा दिया है। सभी का अनुमान 10 से 12% के बीच GDP रहने का है।  

देश के सकल घरेलू उत्पादन (GDP) के विकास दर के बारे में गोल्डमैन सैक्श का अनुमान है कि यह 2021 मार्च से 2022 अप्रैल के बीच 11.1% के बीच रह सकता है। जबकि पहले इसका अनुमान 11.7% का था। इसी तरह नोमुरा ने पहले 13.5% की विकास दर का अनुमान जताया था, जो अब घटाकर इसे 12.6% कर दिया है। जेपी मोर्गन ने 13% के अनुमान को घटाकर 11% जबकि यूबीएस ने 11.5% के अनुमान को घटा कर 10% कर दिया है। सिटी ने 12.5% की विकास दर का अनुमान लगाया था। इसने इसे 12% कर दिया है। 

इनके अलावा देश के रिजर्व बैंक (RBI) ने इस चालू वित्त वर्ष में 10.5% की विकास दर की उम्मीद जताई है। जबकि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF ने 12.5% और विश्व बैंक (World bank) ने 10.1% की विकास दर की उम्मीद जताई है। इन सारे अनुमानों से ऐसा लग रहा है कि कोरोना के इस घातक फैलाव के बावजूद देश की विकास दर इस वित्त वर्ष में 10% से ज्यादा ही रह सकती है।  

देश की GDP कोरोना से पहले ही गिरावट में थी। वित्त वर्ष 2016-17 में इसकी विकास दर 8.3% थी जो 2017-2018 में गिर कर 6.8 और 2018-2019 में 6.5% रही थी। 2019-20 में यह 4% रही थी। 2020 अप्रैल से 2021 मार्च के बीच में अर्थव्यवस्था के बारे में अनुमान था कि यह 8% गिर सकती है।  

शहरों के लगातार लॉकडाउन होने की घटना बढ़ रही है। साथ ही कोरोना का असर भी तेजी से हो रहा है। नए मामलों में दुनिया में भारत सबसे बुरी स्थिति में है। करीबन 3.5 लाख नए मामले कोरोना के रोज आ रहे हैं। जबकि 2.25 लाख मौत हो चुकी है। मोदी सरकार राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन को हालांकि अभी तक टाल रही है, पर कोरोना की जो टीम है, उसने पूरी तरह से लॉक डाउन लगाने की वकालत की है।  

मुंबई, दिल्ली, बिहार सहित कई राज्य और शहर पहले से ही लॉकडाउन में हैं। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्य कोरोना के कुल एक्टिव मामलों में 20% का हिस्सा रखते हैं। हालांकि कुछ हफ्ते पहले तक यह 60% तक था। गोल्डमैन सैक्श ने कहा कि हालांकि पिछले साल की तुलना में इस साल अभी भी लॉकडाउन हलका है। इसका असर उतना नहीं है, जितना पिछली बार था। गोल्डमैन ने कहा कि अभी भी मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर कई बड़े शहरों में दबाव में है। क्योंकि मेडिकल ऑक्सीजन, ब्लड प्लाज्मा, दवाइयां और अस्पतालों में बिस्तरों की काफी कमी है।  

सरकार के मेडिकल पैनल ने अनुमान लगाया है कि मई मध्य तक देश में रोजाना 5 लाख कोरोना के मामले आ सकते हैं। वैक्सीन की बात करें तो देश में करीबन 13% आबादी को पहले डोज की वैक्सीन लग चुकी है। जबकि 2.73 करोड़ लोगों को दूसरी डोज भी लग चुकी है। दो हफ्ते पहले तक रोजाना 33 लाख लोगों को वैक्सीन लगती थी जो अब घट कर 23 लाख पर आ गई है। ऐसा इसलिए क्योंकि वैक्सीन के प्रोडक्शन में कच्चे मटेरियल की कमी की वजह से देर हो रही है।  

देश में अप्रैल में कुल 75 लाख लोग बेरोजगार हुए हैं। सीएमआईई के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल में बुरी तरह से रोजगार पर असर हुआ है और मई में भी ऐसा ही कुछ दिख सकता है। नए रोजगार के मामलों में भी गिरावट आ रही है। गोल्डमैन सैक्श ने कहा कि अधिकतर इंडिकेटर्स यही कह रहे हैं कि इस लॉकडाउन और कोरोना का असर देश की GDP पर दिखेगा।  

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