लॉकडाउन नहीं, टीकाकरण सबसे ज्यादा कारगर, ऑक्सीजन वाले टैंकरों को एंबूलेंस का टैग देना चाहिए

मुंबई– बीमारियों की दूसरी लहर पहली लहर की तुलना में ज्यादा खतरनाक होती है। कोरोना की इस दूसरी लहर में टीकाकरण ही सबसे ज्यादा कारगर उपाय होगा। लॉकडाउन से कोरोना की लहर रोकना मुश्किल है। यह जानकारी एसबीआई की रिपोर्ट में दी गई है।  

एसबीआई की रिपोर्ट कहती है कि 1918 में आए स्पेनिश फ्लू में पता चला कि बाद की उसकी लहरों में ज्यादा मौतें हुईं। इसलिए टीकाकरण बड़ी संख्या में होने वाली मौतों को रोकने के लिए जरूरी है। संक्रमण और इंजेक्शन अनुपात से पता चलता है कि भारत ने इस साल तेजी से सुधार किया लेकिन यह अभी भी इजराइल, चिली और ब्रिटेन से नीचे है।  

आंकड़े बताते हैं कि पूरी दुनिया में लगभग 90 करोड़ लोगों को वैक्सीन की एक खुराक प्राप्त हो चुकी है। हालांकि, कुल टीकाकरण का 84% हिस्सा टॉप 15 देशों में है। इससे टीकाकरण में भारी असमानता दिख रही है। दुनिया में अब तक केवल 2.6% आबादी को पूरी तरह से टीका लगाया गया है। भारत में अब तक केवल 1.2% आबादी को पूरी तरह से टीका लगाया गया है। 

रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, मध्य प्रदेश जैसे कुछ राज्यों में 45 वर्ष से अधिक आयु की जनसंख्या का पर्सेंट कम है। ये राज्य पहले ही 45 वर्ष से अधिक की जनसंख्या को वैक्सीन शॉट्स दे चुके हैं। हालांकि, तमिलनाडु, पंजाब, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल में 45 वर्ष से अधिक जनसंख्या का प्रतिशत अधिक है और उन्होंने 45 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को कम टीका लगाया है।  

रिपोर्ट कहती है कि टीकाकरण के मामले में राज्यवार प्रदर्शन भी काफी असमान रहा है। पता चलता है कि सभी उत्तर पूर्व राज्यों और गोवा, झारखंड, असम, दिल्ली, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में टीके के प्रति लोगों की हिचकिचाहट देखने को मिली है। सीरम इंस्टिट्यूट को जुलाई 21 तक उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 11 करोड़ खुराक प्रति माह करने की उम्मीद है, जबकि भारत बायोटेक को जुलाई तक अपनी उत्पादन क्षमता को 1.2 करोड़ खुराक प्रति माह तक बढ़ाने की उम्मीद है।  

इसी तरह मई के बाद से स्पुतनिक वैक्सीन का आयात किया जाएगा। इन को ध्यान में रखते हुए रिपोर्ट का मानना है कि दिसंबर 21 तक कुल 113.2 करोड़ खुराकें दी जा सकती हैं। इसमें 15% आबादी को पूरी तरह से टीका लगाया जा सकता है और 84% अपना पहला शॉट प्राप्त कर सकते हैं। अन्य देशों के अनुभव से पता चलता है कि जनसंख्या के 15% को दूसरी खुराक प्राप्त होने के बाद संक्रमण में रुकावट आ जाती है।  

रिपोर्ट कहती है कि देशों में रिकवरी का रेट अलग-अलग आए पीक में सुधर रहा है। लेकिन भारत में 21 फरवरी के मध्य तक रिकवरी रेट बढ़कर 97.3 हो गया था। इसके बाद इसमें गिरावट शुरू हो गई है और हाल ही में 85 हो गई है। रिपोर्ट कहती है कि अगर हम यह मान लें कि दूसरी लहर पीक पर है और तब रिकवरी रेट 78%-79% के आस-पास है तो इससे यह पता चलता है कि अभी इसका पीक मई तक रह सकता है।  

रिपोर्ट कहती है कि अनुमानित पीक समय 15 फ़रवरी से शुरू होकर 96 दिन तक चल सकता है, जिसके हिसाब से मई के तीसरे हफ्ते में यह पीक पर होगा। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में पहली लहर का पीक जल्दी आ गया था। अब महाराष्ट्र में नए मामले स्थिर होने लगे हैं लेकिन मौजूदा दूसरी लहर में विभिन्न अन्य राज्यों (छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, गुजरात) में नए मामलों का हिस्सा बढ़ा है।  

रिपोर्ट के अनुसार, पहली लहर को नियंत्रित करने में देश ने उल्लेखनीय रूप से अच्छा काम किया, लेकिन जैसा कि बाकी अन्य देशों ने दूसरी लहर का मुकाबला काफी डंटकर किया, भारत थोड़ा इसमें पिछड़ता दिख रहा है। 21 जनवरी के बाद 31 लाख मामलों में अकेले महाराष्ट्र ने 52% और 5 राज्यों ने 75% योगदान दिया।  

मौजूदा दूसरी लहर में महाराष्ट्र, गोवा, छत्तीसगढ़, दिल्ली, हरियाणा में किये जाने वाले टेस्ट में ज्यादा लोग पॉजिटिव पाए जा रहे हैं। नए संक्रमण के मामलों में टॉप 15 जिलों में गिरावट आई है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में यह संख्या बढ़ी है। सबसे ज्यादा प्रभावित टॉप 15 जिलों में 6 महाराष्ट्र से हैं। यदि हम सबसे ज्यादा प्रभावित ग्रामीण जिलों को देखें तो 9 महाराष्ट्र से हैं और इनमें 3 छत्तीसगढ़ से हैं। इसके अलावा, अगर हम विभिन्न जिलों को देखें जहां कुंभ, चुनाव और किसान विरोधी आंदोलन आयोजित किए गए थे, यहां नए मामलों में इजाफा देखा जा रहा है। 

रिपोर्ट ने सुझाया है कि सभी राज्यों को अब टैंकरों को एम्बुलेंस का दर्जा दे देना चाहिए ताकि वे तेजी से आगे बढ़ सकें। जिससे वे एक शहर से दूसरे स्थान या अस्पतालों तक पहुंच सकेंगे। भारत सरकार को ऑक्सीजन के उत्पादन और सप्लाई पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। टॉप 15 देशों ने 75.8 करोड़ वैक्सीन का डोज दिया, पूरी दुनिया में 2.6% आबादी को टीका लगा है।13 राज्यों पर कुल 1.66 लाख करोड़ रुपए का खर्च आएगा। इनमें 66 करोड़ आबादी 18 साल से ऊपर की है। 

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