60% सीएमओ के पास 2021 में इनफ्लुएंसर मार्केटिंग के लिए निर्धारित बजट

मुंबई: ब्रांड्स के साथ जुड़ने के लिए डिजिटल प्लेटफार्मों पर उपभोक्ताओं के बीच बढ़ते चलन को देखते हुए भारत में इनफ्लुएंसर गतिविधियों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। 2020 में ब्रांड्स ने कोविड-19 के प्रकोप के कारण अपनी ऑनलाइन उपस्थिति को मजबूत किया और इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग प्लानिंग का हिस्सा बने।

इनफ्लुएंसर मार्केटिंग के क्षेत्र में देश के अग्रणी रिसर्च में क्लैनकनेक्ट.एआई ने एफएमसीजी, इन्फ्रास्ट्रक्चर, फैशन, और टेक्सटाइल, मीडिया और मनोरंजन, बीएफएसआई, फार्मास्यूटिकल्स के क्षेत्र में अग्रणी ब्रांड्स के सीएमओ की अंतर्दृष्टि को जानने की कोशिश की। आंकड़ों के अनुसार 2020 में मार्केटिंग लीडरों में से 78% ने इनफ्लुएंसर मार्केटिंग का फायदा उठाया, वहीं, उनमें से 13% ने 2020 में पहली बार इनफ्लुएंसर गतिविधियां शुरू की। दिलचस्प बात यह है कि 52% ब्रांड्स ने 2020 में 10 से अधिक इनफ्लुएंसर्स को अपने कैम्पेन में शामिल किया, जो पिछले साल इस क्षेत्र में हुई वृद्धि से मेल खाता है।

क्लैनकनेक्ट.एआई ने पाया कि मार्केटिंग के खर्चों में इनफ्लुएंसर मार्केटिंग के लिए आवंटित बजट 2019 की तुलना में 2020 में काफी बढ़ गया है। अब, जब इनफ्लुएंसर मार्केटिंग को मुख्यधारा में जगह मिल गई है, 58.70% सीएमओ अपनी 2021 की मार्केटिंग योजनाओं में इनफ्लुएंसर एक्टिविटी के लिए अलग से बजट आवंटित कर रहे हैं। इसके साथ ही 52.17% ने 2020 की तुलना में 2021 में खर्च बढ़ाने का फैसला किया है। यह आश्चर्य की बात नहीं है कि लगभग 90% सीएमओ अपने पूरे मार्केटिंग बजट के 25% को चालू वर्ष में इनफ्लुएंसर गतिविधियों की ओर ले जाने पर विचार कर रहे हैं।

क्लैनकनेक्ट.एआई के सह-संस्थापक और सीओओ कुणाल किशोर सिन्हाने कहा कि इनफ्लुएंसर मार्केटिंग कई गुना वृद्धि हो रही है। यह मार्केटिंग का भविष्य है, यह एक ऐसा तथ्य है जो इस तरह की पहली सर्वेक्षण रिपोर्ट से स्पष्ट है। क्लैनकनेक्ट.एआई में हम इस तरह के तेजी से बढ़ते क्षेत्र में सबसे आगे होने के लिए उत्साहित हैं और आने वाले महीनों में और अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए तैयार हैं।

सोशल मीडिया चैनलों की कोई कमी नहीं है और ब्रांड आज उनके इनफ्लुएंसर कैम्पेन का लाभ उठा सकते हैं। 50% सीएमओ इंस्टाग्राम को इन अभियानों के लिए सबसे प्रभावी मंच मानते हैं, 23.91% लिंक्डइन को पसंद करते हैं, और 15.22% यूट्यूब को उनके गो-टू प्लेटफॉर्म के रूप में पहचानते हैं।

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