कोरोना से बचिए, वरना लाशें भी नहीं जलाने वाला कोई मिलेगा, लाशों को जलाने के लिए 24 घंटे का इंतजार, एक के ऊपर एक जल रही हैं लाशें

इससे बुरा इस देश का और क्या हो सकता है? देश के हर जिलों में कोरोना से मौतों के बाद लाशों का अंबार लगा हुआ है। हालात यह है कि लाशों को जलाने के लिए स्मशान कम पड़ रहे हैं। कई जिलों में तो अब थोक भाव में स्मशान बनाई जा रही है। रांची जैसे शहरों में खुलेआम सड़कों पर एक साथ शवों को जलाया जा रहा है। लखनऊ में हालात यह है कि एक साथ सभी शवों को जलाया जा रहा है। देश में अस्पताल खाली नहीं हैं। वेंटिलेटर नहीं हैं। कुर्सियों पर या सड़कों पर आक्सीजन लगाए जा रहे हैं। शवों के ऊपर शव को रखा जा रहा है। अस्पतालों में मरीजों के नीचे शव रखे जा रहे हैं।  

हमारी सरकार चुनावों में व्यस्त है। पश्चिम बंगाल से लेकर पांच राज्यों में चुनाव में इस समय हर मशीनरी व्यस्त है। उनको इस बात से लेना देना नहीं है कि देश में लोगों को जलाने के लिए स्मशान कम पड़ गए हैं। किसी देश का इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या हो सकता है कि लाशों को जलाने वाले नहीं हैं। लोग मरे जा रहे हैं। अस्पतालों में जगह नहीं है। अहमदाबाद के सिविल अस्पताल और रांची के अस्पतालों में लाशों को ऐसे रखा गया है जैसे कीड़े मकोड़ों का झाला है।  

अहमदाबाद में सिविल अस्पताल के पास इतनी अंबूलेंस खड़ी हैं कि अब जगह नहीं है। हालात सिर्फ दो चार शहरों के नहीं, बल्कि पूरे देश में इसी तरह के हैं। रोजाना 1.60 लाख से ज्यादा कोरोना के मामले आ रहे हैं। भारत अब दुनिया में दूसरे नंबर पर आ गया है। हालात अभी भी ऐसे हैं कि आप कुछ भी कह लें, अगला 15 दिन या 30 दिन इससे बेकार होने जा रहा है। क्योंकि हम चुनावों के आगे कुछ नहीं देख रहे हैं।  

हमारी सरकार की हालात ठीक उसी तरह है जेसे रोम जब जल रहा था, तब नीरो बांसुरी बजा रहा था। सन्‌ 1964 में रोम में अत्यंत रहस्यमय ढंग से आग की लपटें भड़क उठीं जिससे आधे से अधिक नगर जलकर खाक हो गया। जब आग धूधू कर के जल रही थी नीरो एक स्थान पर खड़े होकर उसकी विनाशलीला देख रहा था और सारंगी बजा रहा था। आग बुझ जाने के बाद नीरो ने नगर के पुनर्निमणि का कार्य आरंभ किया और अपने लिए ‘स्वर्ण मंदिर’ नामक एक भव्य महल बनवाया। असह्य करभार, शासन संबंधी बुराइयों तथा अनेक क्रूरताओं के कारण उसके विरुद्ध विद्रोह की भावना बढ़ती गई।  स्पेन के रोमन गवर्नर ने अपनी फौजों के साथ रोम पर हमला बोल दिया जिसमें स्वयं नीरो को अंगरक्षक सेना भी शामिल हो गई। नीरो को राज्य से पलायन करना पड़ा। इसी बीच सिनेट ने उसे फाँसी पर चढ़ा देने का निर्णय किया। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने आत्महत्या कर ली।  

भारत में हालात इससे बुरे हैं। अगर ऐसी स्थिति है तो चुनाव को टाला जा सकता था। अगर परीक्षाओं से लेकर सब कुछ बंद किया जा सकता है, लॉक डाउन लग सकता है, तो लोगों की जिंदगी बचाने के लिए चुनावों को क्यों नहीं टाला जा सकता है? बिहार के चुनाव में भी यही हुआ था। हमारी जिंदगी पहले होनी चाहिए, चुनाव बाद में। पर चुनाव आयोग भी इस पर मौन है। क्या चुनाव आयोग को कोरोना नहीं दिख रहा है? देश में स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाने, वैक्सीन को बढ़ाने और लोगों को बचाने की जगह चुनावी लड़ाई में सब व्यस्त हैं। जिस बंगाल में चुनाव चल रहा है, आंकड़े बताते हैं कि वहां चुनाव के दौरान कोरोना के मामलों में 5 गुना बढ़त आ गई है। लेकिन इससे किसी को कोई फर्क नहीं है। 

देखा जा रहा है कि देश की न्यायिक मशीनरी से लेकर चुनाव आयोग, तमाम राजनीतिक पार्टियों ने चुनाव के आगे सभी को मरने के लिए छोड़ दिया है। हरिद्वार जैसे महाकुँभ की जरूरत ही क्यों होनी चाहिए? जिस राम मंदिर के नाम पर सरकार ने हजारों करोड़ रुपए का चंदा जुटा लिया, क्या वह सरकार लोगों की जिंदगी बचाने के लिए कुछ नहीं कर सकती है? सरकार को चाहिए कि सख्त लॉकडाउन लगाकर लोगों की रोजी रोटी के लिए उपाय करे। लोग आज अपनी जिंदगी बचाने के लिए मौत से लड़ रहे हैं।  

गुजरात हाईकोर्ट की टिप्पणी देखिए- गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य में कोरोना से बिगड़ रहे हालात पर प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सोमवार को कहा कि प्रदेश और लोग जिस तरह की दिक्कतें झेल रहे हैं, वह सरकार के दावे से बहुत अलग है। चीफ जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस भार्गव करिया की बेंच ने कहा कि लोगों को लगने लगा है कि वे अब भगवान भरोसे हैं। 

कोरोना की टेस्टिंग के मुद्दे पर कोर्ट ने कहा कि लैब RT-PCR टेस्ट की रिपोर्ट देने में कई दिन लगा रही हैं। इससे पहले 8, 10 या 12 घंटे में रिपोर्ट आ जाती थी। अब इसमें लगभग 5 दिन लगते हैं। यह सब आम आदमी के लिए है। आप जैसे किसी शख्स या एडवोकेट देवनानी (मामले में एक पक्षकार) या हमारे लिए ऐसा हो सकता है कि हम लाइन जंप कर सकते हैं। लेकिन आज आम आदमी को टेस्ट की रिपोर्ट लेने में 5 से 7 दिन लगते हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि आपके पास इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है। आपने सुविधाएं नहीं बढ़ाई। 

देश के सभी राज्यों के हालात गंभीर हैं। अगर सरकार अब भी नहीं चेती तो अगला 15 दिन लोगों के लिए और मुश्किल खड़ा कर सकता है। नीरो रोम का सम्राट था। आप अगर किसी देश के सम्राट हैं, तो आप जिम्मेदारियों से भाग नहीं सकते हैं। आप चुनावों में व्यस्त होने की बजाय लोगों के जीवन को बचाने में व्यस्त होना चाहिए।  

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