आलू की कीमतें 50 पर्सेंट गिरी, अब थोक भाव में 6 रुपए किलो

मुंबई-अच्छे पैदावार के चलते आलू की कीमत 50% सस्ता हो गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक उत्पादन और खपत दोनों क्षेत्रों में आलू इस समय 5 रुपए से 6 रुपए प्रति किलो के भाव पर मिल रहा है। सस्ते आलू से ग्राहकों को तो फायदा हुआ है, लेकिन इससे किसानों को अपनी लागत निकालने में भी दिक्कत हो रही है। 

फूड प्रोसेसिंग मिनिस्ट्री के मुताबिक, देश में कुल 60 प्रमुख आलू उत्पादक क्षेत्र हैं। इसमें से ऐसे 25 क्षेत्र हैं जहां आलू की कीमतें एक साल पहले के मुकाबले 50% घटी हैं। ये क्षेत्र उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, पंजाब, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात और बिहार में फैले हैं। खासकर उत्तर प्रदेश के संभल और गुजरात के दीशा में आलू की कीमत 3 साल के औसत थोक भाव 6 रुपए प्रति किलो से भी नीचे लुढ़क गई। रिटेल मार्केट में भी आलू के भाव 50% से ज्यादा घटे हैं। 20 मार्च को आलू की मॉडल रिटेल कीमत 10 रुपए प्रति किलो रही, जो एक साल पहले मार्च में 20 रुपए प्रति किलो थी। 

डेटा के मुताबिक, 1 साल पहले मार्च में उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में आलू की थोक कीमत 8-9 रुपए प्रति किलो और कुछ जिलों में 10 रुपए किलो से भी ज्यादा कीमत थी। यही नहीं राज्य की कुछ मंडियों में तो पिछले साल आलू की बोली 23 रुपए प्रति किलो तक लगी। मंत्रालय द्वारा यह आंकड़ा दिल्ली समेत देश के 16 प्रमुख खपत क्षेत्रों में से 12 क्षेत्रों से मिले इनपुट के आधार पर तैयार किया गया है। 

उपभोक्ता मामलों की सचिव लीना नंदन का कहना है कि हम ग्राहकों के लिहाज से कीमतों को ट्रैक करते हैं। इस बार आलू की फसल काफी अच्छी रही है। इससे मंडियों में आलू की आवक भी अच्छी है, जिससे कीमतें घटी हैं और ग्राहकों को इसका फायदा मिल रहा है। वहीं किसानों को अच्छी कीमत मिलने के सवाल पर नंदन ने कहा कि इस मामले को कृषि मंत्रालय देख रहा है। 

1 एकड़ में आलू की पैदावार करने पर करीब 70 हजार रुपए का खर्च आता है। इसमें आलू का बीज, पानी, खाद और लेबर का खर्च शामिल है। एक एकड़ में 50-50 किलो की करीब 200 बोरी आलू पैदा होता है। मौजूदा भाव के अनुसार, 1 एकड़ में करीब 40 हजार रुपए का आलू पैदा हो रहा है, जबकि किसान की लागत 70 हजार रुपए होती है। यदि किसान कोल्ड स्टोर में आलू रखता है तो उसे 150 रुपए प्रति बोरी अतिरिक्त खर्च करने पड़ते हैं। ऐसे में किसान के लिए आलू की फसल की लागत निकालना भी भारी पड़ रहा है। 

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