इंश्योरेंस में धोखाधड़ी जमकर हो रही है, जानिए इससे बचने के तरीके

मुंबई– जनरल इंश्योरेंस सेक्टर ऑटोमोबाइल, स्वास्थ्य, कृषि आदि जैसे विभिन्न सेक्टर्स से काफी निकटता से जुड़ा हुआ है और इस प्रकार हमारी अर्थव्यवस्था को समर्थन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए यह एक ऐसा महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा उपकरण है जो किसी भी नुकसान या क्षति के मामले में आपके बचाव के लिए सदैव आगे आता है।

हालांकि, यह जानना निराशाजनक है कि हमारे देश में जनरल इंश्योरेंस की पैठ फिलहाल 1% से भी कम है जो निश्चित रूप से चिंता का कारण है। आखिर ऐसा क्यों है कि इसके तमाम फायदे के बावजूद लोग अभी भी बीमा पॉलिसी खरीदने से दूर भागते हैं। ऐसा क्यों है कि शत प्रतिशत दावों का भुगतान करने और घाटा उठाकर खुद उद्योग को मुश्किल में डालने के बावजूद लोगों में यह भ्रम बना हुआ है कि बीमा कराने के बाद उनके क्लेम जल्दी नहीं मिलते।

रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय बीमा उद्योग को फ्रॉड या धोखाधड़ी से हर साल करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है और यही इसके विकास में बाधा डालने का एक मुख्य कारण है। ये धोखाधड़ी उद्योग और समाज दोनों को प्रभावित करती है क्योंकि वे जरूरत वाले सही लोगों को बीमा का लाभ देने के लिए अवरोधक के रूप में कार्य करते हैं।

धोखाधड़ी जैसी घटनाएं बीमा कंपनियों के परिचालन लागत (operational costs) को बढ़ाती हैं और साथ ही साथ उनके रिसोर्सेज को कंगाल करती है जिसका नतीजा यह होता है कि ग्राहकों को इसकी कीमत चुकानी पड़ती है और कभी-कभी उन्हें ज्यादा प्रीमियम अदा करना पड़ता है। इन्श्योरेंस कॉन्ट्रेक्ट का मुख्य आधार विश्वास या ट्रस्ट होता है और मुझे लगता है कि यदि किसी व्यक्ति ने क्लेम फ़ाइल किया है, तो उसे यथाशीघ्र दे दिया जाना चाहिए। तभी उद्योग के बारे में लोगों की धारणा बदलेगी और इसके बदले में ज्यादा से ज्यादा लोग बीमा की पॉलिसी या खरीदने को आगे आएंगे।

हालांकि, यह भी सच है कि ऐसी धोखाधड़ी की घटनाओं के चलते ही बीमाकर्ता को वैध दावे (legitimate claims) का निपटारा करने में दिक्कतें आती हैं। बीमाकर्ता निश्चित रूप से दावा प्रक्रियाओं (claim processes) को सरल बनाने और उनकी सेवाओं को अपग्रेड करने के लिए जी तोड़ कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मुझे लगता है कि इस समस्या से निपटने के लिए सभी शेयरहोल्डर्स को एक साथ आने की जरूरत है।

इस तरह की धोखाधड़ी की गतिविधियों के आसान टारगेट वे ग्राहक होते हैं जो बीमा पॉलिसी खरीदते समय सतर्क नहीं होते हैं। इसलिए, उनके लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे ऐसी गतिविधियों के शिकार होने से बचने के लिए जागरूक रहें और कोई भी फैसला लेने से पहले सभी चीजों को अच्छी तरह से परख लें। इसके लिए कुछ विशेष सावधानियां यहां दी जा रही हैं।

पॉलिसी की प्रामाणिकता की जांच करें – पॉलिसी के नियमों और शर्तों को समझना और यह जांचना महत्वपूर्ण है कि आपके द्वारा खरीदी गई पॉलिसी असली है या नकली। इसके लिए कोई भी बीमाकर्ता से संपर्क कर सकता है और अपना पॉलिसी नंबर साझा कर इसकी प्रामाणिकता को सत्यापित कर सकता है। बीमाकर्ताओं के पास आज भी अपनी वेबसाइट पर क्यूआर कोड की सुविधा है जहां ग्राहक अपनी नीतियों को मान्य (validate) कर सकते हैं।

चैनल को सत्यापित करें: यह जानना महत्वपूर्ण है कि आप किसी प्रामाणिक (authentic) बीमा चैनल से पॉलिसी खरीद रहे हैं या नहीं। उदाहरण के लिए, यदि आप ऑनलाइन पॉलिसी खरीद रहे हैं, तो जांच लें कि बीमाकर्ता की वेबसाइट डोमेन का नाम वास्तविक है या नहीं, क्योंकि धोखेबाज नकली वेबसाइटों के साथ आते हैं और लोगों को ठग कर चले जाते हैं। यदि आप किसी एजेंट से पॉलिसी खरीद रहे हैं, तो उनकी वैध आईडी के लिए अनुरोध करें और खरीदने के बाद बीमा कंपनी के साथ जांच करके ही पॉलिसी को मान्य करें।

भुगतान के सुरक्षित तरीके का विकल्प चुनें: यह सलाह दी जाती है कि आप चेक, डेबिट/क्रेडिट कार्ड या भुगतान के अन्य ऑनलाइन तरीकों के माध्यम से ही बीमाकर्ता को सीधे भुगतान करें। यह लेनदेन के उचित निशान (trail of transaction) स्थापित करने में मदद करता है, जो नकद भुगतान में संभव नहीं है। हालांकि एक अलर्ट ग्राहक कई धोखाधड़ी को रोक सकते हैं, पर अपनी ओर से बीमाकर्ता भी संभावित धोखाधड़ी की पहचान करने और धोखाधड़ी के मामले में धोखेबाजों को पकड़ने के लिए फोरेंसिक साइंस, डेटा एनालिटिक्स और तकनीक का लाभ उठा रहे हैं।

सरकार और रेगुलेटर के साथ बीमा उद्योग इस समस्या को रोकने की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, जनरल इंश्योरेंस काउंसिल ने डेटा शेयरिंग और एक्सपीरियंस शेयरिंग प्लेटफॉर्म्स को सक्षम किया है, जिसमें बीमाकर्ता अपने धोखाधड़ी के दावों (fraudulent claims) को लिस्ट कर सकते हैं। यह अन्य बीमा कंपनियों को क्लेम का आकलन या निपटारा करते समय एक समान धोखाधड़ी के पैटर्न को समझने में मदद करते हैं।

ऐसे असामाजिक तत्वों द्वारा बीमा के दुरुपयोग को प्रतिबंधित करने के लिए काफी कुछ और भी किया जा सकता है। एक केंद्रीकृत डिजिटल केवाईसी डेटाबेस विकसित किया जा सकता है, जो बीमाकर्ताओं को ग्राहकों की प्रामाणिकता को वैलीडेट करने में मदद कर सकता है। आईआईबी, वाहन जैसी संस्थाओं के साथ इंटीग्रेशन हुआ है, हालांकि, यूआईडीएआई, आरटीओ, सीसीटीएनएस, कोर्ट रिकॉर्ड, मेडिकल काउंसिल के साथ आगे इंटीग्रेशन हो सकता है, जिससे बीमा कंपनियों को क्लेम की जल्दी सूचना प्राप्त करने में मदद मिलेगी जिससे तेजी से क्लेम का सेटलमेंट किया जा सकेगा और और इससे जुड़े लिटिगेशन भी कम होंगे।

स्टैण्डर्ड मेडिकल प्रोटोकॉल और ट्रीटमेंट गाइडलाइंस भी आवश्यक हैं जो ज्यादा क्लेम अमाउंट और ट्रीटमेंट की झूठी लाइन को कम करेंगे। इन जैसे कुछ सावधानी भरे कदमों के साथ हम एक साथ धोखाधड़ी से निपटने के लिए बेहतर पोजिशन में होंगे।  

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