देश में प्रति व्यक्ति 7200 रुपए जीडीपी में गिरावट, उत्तर प्रदेश में बढ़ी

मुंबई– सभी बड़े राज्य नए साल का बजट पेश कर चुके हैं। कोविड-19 से लड़ाई में सभी राज्य आगे रहे हैं। महामारी ने उनकी आमदनी पर करारी चोट की है और खर्च बढ़ा दिया है। इसको देखते हुए SBI ने मौजूदा वित्त वर्ष में टॉप 13 राज्यों का एवरेज फिस्कल डेफिसिट 4.5% रहने का अनुमान दिया है। स्टेट बैंक के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर के मुताबिक, राज्यों ने अगले फाइनेंशियल ईयर में फिस्कल डेफिसिट बजट के 3.3% बराबर रहने का अनुमान लगाया है। 

राज्यों की GDP ग्रोथ का अनुमान केंद्र के GDP आउटलुक का इशारा देता है। इससे यह भी पता लगाया जा सकता है कि कोविड-19 के चलते उनके यहां प्रति व्यक्ति GDP में कितनी गिरावट आएगी। FY21 में ऑल इंडिया लेवल पर प्रति व्यक्ति GDP में सालाना आधार पर 7,200 रुपए की गिरावट आने के आसार हैं। इनके मुकाबले कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में प्रति व्यक्ति GSDP में 10,000 रुपए से ज्यादा बढ़ोतरी हो सकती है। 

राज्यों के ऊपर बकाया कर्ज में बढ़ोतरी हुई है क्योंकि संसाधनों की कमी के चलते उनको ज्यादा कर्ज लेना पड़ा था। SBI के मुताबिक, इसके चलते राज्यों के प्रति व्यक्ति कर्ज में खासा इजाफा हुआ है। वित्त वर्ष 2022 के बजट अनुमान के मुताबिक तीन साल में 13 बड़े राज्यों की औसत प्रति व्यक्ति आय 7.1% बढ़ी है जबकि उनके प्रति व्यक्ति कर्ज में 16.4% की बढ़ोतरी हुई है। 

प्रति व्यक्ति कर्ज में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी (20%) कर्नाटक और झारखंड (कम बेस के बावजूद) के अलावा मध्य प्रदेश में हुई है। वित्त वर्ष 2022 में कर्नाटक, केरल और उत्तराखंड जैसे राज्यों का प्रति व्यक्त कर्ज 60,000 रुपए से ज्यादा रहने का अनुमान है। जहां तक रेवेन्यू कलेक्शन की बात है तो सेंट्रल और स्टेट जीएसटी एस्टीमेट के मुताबिक उनमें वित्त वर्ष 2021 के बजट अनुमान के मुकाबले काफी कम रह सकती है। सेंट्रल और स्टेट जीएसटी के रिवाज्ड आंकड़ों के मुताबिक, टैक्स कलेक्शन मौजूदा वित्त वर्ष के लिए बजट में दिए गए अनुमान से 21.2% कम रह सकता है। 

राज्यों का वैट और सेल्स टैक्स कलेक्शन भी बजट अनुमान से 14.7% कम रहा है। इसकी वजह वित्त वर्ष 2021 के शुरुआती महीनों में क्रूड ऑयल का कम दाम और कम खपत है। रेवेन्यू में हुए लॉस की भरपाई के लिए राज्यों ने अपना खर्च बजट अनुमान से 11.3% ज्यादा घटा दिया है। कैपिटल एक्सपेंडिचर में गिरावट ज्यादा रही है और कुछ राज्यों में तो इस मद में पिछले साल से 30% कम खर्च किया गया है। 

कोविड-19 ने राज्यों को हेल्थकेयर की गुणवत्ता, लोगों की पहुंच और किफायती बनाने पर काम करने का मौका दिया है। SBI ने जिन 13 राज्यों का बही-खाता देखा है, उनमें से सिर्फ 5 राज्यों ने वित्त वर्ष 2022 के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण के बजट में 20% से ज्यादा बढ़ोतरी की है। इससे पता चलता है कि आमदनी में गिरावट के चलते राज्य स्वास्थ्य सेवाओं के लिए केंद्र के फंड पर कितना ज्यादा निर्भर हैं। 

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