ई-कॉमर्स पॉलिसी को छोड़ सकता है भारत, सरकार के भीतर ही है विवाद

मुंबई- भारत अपनी प्रस्तावित ई-कॉमर्स पॉलिसी को छोड़ सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि सरकार के भीतर ही इस पर विवाद है। यह विवाद कई अलग-अलग मुद्दों पर है। इसलिए इसके औचित्य पर सवाल उठाया जा रहा है। 

गुरुवार को एक अंतर-मंत्रालयी समूह (inter-ministerial group) ने पॉलिसी पर चर्चा की। इसमें कई अन्य बातों के अलावा, इस क्षेत्र के लिए एक रेगुलेटर स्थापित करने पर चर्चा हुई। इसमें ई-कॉमर्स कंपनियों को डेटा स्टोर, उपयोग, ट्रांसफर, प्रक्रिया और विश्लेषण को प्रतिबंधित करने के लिए एक नया कानून लागू करना चाहता है। बैठक में कॉमर्स मंत्री पीयूष गोयल मौजूद थे। इससे वाकिफ एक अधिकारी ने कहा कि ई-कॉमर्स पॉलिसी को स्क्रैप किया जा सकता है। क्योंकि कुछ मुद्दों पर कोई काफी मतभेद है। यहां तक कि मंत्री ने भी पॉलिसी के वास्तविक औचित्य पर सवाल उठाया।

इस नीति के लिए नोडल संस्था डिपार्टमेंट फ़ॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) ने विचार विमर्श किया था। विभिन्न मंत्रालयों ने रेगुलेटर की भूमिका और पहुंच, नीति में कंज्यूमर डेटा प्रोटेक्शन से संबंधित प्रावधानों, अन्य कानून और आंकड़ों के साथ ओवरलैप करने पर चिंता व्यक्त की थी। इनका कहना था कि इसके लिए पारदर्शी नीति की आवश्यकता होती है।

अधिकारी ने कहा कि प्रस्तावित नीति का उद्देश्य स्पष्ट नहीं है। मौजूदा प्रारूप में यह ईकॉमर्स सेक्टर में व्यापार करने की स्थिति का ब्यौरा देने वाला एक व्यापक दस्तावेज की तरह प्रतीत होता है। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी, कॉरपोरेट अफेयर्स, फाइनेंस और एग्रीकल्चर मंत्रालय इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप का हिस्सा हैं। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि बैठक में सभी संबंधित मंत्रालय और रेगुलेटर मौजूद थे।

ड्राफ्ट पालिसी में सुरक्षा, कानून और व्यवस्था, कानून प्रवर्तन, टैक्सेशन और व्यक्तियों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विनियमों का प्रावधान है ताकि सरकार को देश में संचालित ईकॉमर्स प्लेटफार्मों के माध्यम से मिलने वाले डेटा तक तेजी से पहुंच मिल सके। यह यह सुनिश्चित करने के लिए सोर्स कोड और एल्गोरिदम का प्रकटीकरण भी चाहता है ताकि कोई डिजिटल पक्षपात नहीं हो।

इस पालिसी को छोड़ने पर चर्चा ऐसे समय में हुई है जब यूरोपीय संघ ने विशेष रूप से बहुत बड़े बड़े ऑनलाइन प्लेटफार्मों के अतिरिक्त रेगुलेशन के लिए डिजटल मार्केट ऐक्ट को लागू किया है। एक विशेषज्ञ ने कहा, ‘ईयू की ड्राफ्ट पॉलिसी भारत के लिए एक अच्छी शुरुआत हो सकती है क्योंकि ईकॉमर्स जैसे विशाल क्षेत्र को अनियमित (unregulated) नहीं छोड़ा जा सकता।

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