कोटक महिंद्रा बैंक पर PNCPS का डिविडेंड देने पर रिजर्व बैंक की रोक

मुंबई– निजी सेक्टर के लीडिंग बैंक कोटक महिंद्रा बैंक को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। बैंकिंग रेगुलेटर RBI ने बैंक को PNCPS पर डिविडेंड देने पर रोक लगा दी है। RBI के मुताबिक बैंक परपेचुअल नॉन कम्युलेटिव प्रिफरेंस शेयर्स (PNCPS) पर डिविडेंड नहीं दे सकता है। PNCPS एक तरह का ऐसा फाइनेंशियल साधन है जो निवेशकों को एक तय डिविडेंड देता है। यह डिविडेंड काफी लंबे समय तक दिया जाता है।  

मॉनिटरी पॉलिसी में RBI ने कहा था कि वित्त वर्ष 2019-20 के लिए बैंक अपने फायदे में से कोई डिविडेंड नहीं दे सकते हैं। यह फैसला इसलिए किया गया था ताकि बैंक की बैलेंसशीट आगे मजबूत रहे और रियल इकोनॉमी में यह उधारी को सपोर्ट करे। RBI ने यह ऑब्जर्व किया कि आगे अभी भी सिस्टम में तनाव रहेगा और कोविड-19 की अनिश्चितता के चलते स्थिति खराब हो सकती है। इसीलिए बैंक इकोनॉमी को सपोर्ट करने के लिए इस साल डिविडेंड न दें। RBI ने कहा है कि अब यह फैसला PNCPS के डिविडेंड पर भी लागू होगा। 

अगस्त 2018 में कोटक महिंद्रा बैंक ने शेयर बाजार को दी गई सूचना में कहा था कि बोर्ड ने 100 करोड़ शेयरों के PNCPS निवेशकों को अलॉट किया करने का फैसला किया है। 5 रुपए प्रति PNCPS डिविडेंड देने का फैसला किया है। यह रकम 500 करोड़ रुपए होती है। इस वजह से बैंक का पेड-अप कैपिटल 953 करोड़ रुपए से बढ़कर 1,453 करोड़ रुपए हो गया है। कोटक की होल्डिंग इस शेयर के अलॉट होने से पहले 29.74% थी। इसी के साथ RBI यह भी योजना बना रहा है कि गैर बैंकिंग वित्तीय कॉर्पोरेशन (NBFC) की अलग-अलग कैटिगरी पर दिए जाने वाले डिविडेंड पर भी रोक लगाई जाए। 

बुधवार को एक ड्राफ्ट सर्कुलर में RBI का प्रस्ताव इसी NBFC के डिविडेंड को लेकर था। इसके मुताबिक डिपॉजिट लेनेवाली NBFC और डिपॉजिट न लेने वाली NBFC दोनों का कैपिटल टू रिस्क असेट रेशियो पिछले तीन सालों का कम से कम 15% के औसत पर होना चाहिए। साथ ही बुरे फंसे कर्ज यानी NPA भी इसी अवधि में हर साल 6% से कम होना चाहिए।   

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